किसानों का मार्च शाम होते-होते बना विपक्षी पार्टियों का सियासी मंच, निशाने पर PM मोदी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों की मांग का समर्थन करते हुये कहा है कि किसानों की इस मांग के साथ विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं. उन्होंने कहा कि हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, मगर किसान और युवाओं के भविष्य के लिये हम सब एक हैं.

नई दिल्ली: कल सुबह करीब एक लाख किसान कर्जमाफी और फसलों के उचित दामों की मांग को लेकर संसद मार्ग पर उतरे. किसानों का यह मार्च शाम होते-होते विपक्षी एकता का मंच बनता दिखाई दिया. एक दूसरे की धुर-विरोधी रही पार्टियां कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, स्वराज इंडिया, एनसीपी, टीएमसी, वामदल और नेशनल कांफ्रेंस एक साथ खड़ी दिखी. इन पार्टियों ने किसानों की बदहाली के बहाने बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को निशाने पर लिया और नजर 2019 लोकसभा चुनाव पर थी.
दरअसल, कुछ मौकों को छोड़ दिया जाए तो तमाम दावों के बावजूद विपक्षी पार्टियां अलग-थलग दिखती रही है. इसकी वजह प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी और क्षेत्रिय वजूद है. कांग्रेस का कहना है कि वह राज्यवार गठबंधन करेगी. वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) फेडरल फ्रंट फॉर्मूले पर आगे आने की बात कर रही हैं.
किसानों का मार्च अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने बुलाया था. जिसे देश भर के करीब 200 किसान संगठनों का समर्थन मिला. समिति के नेता और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा ‘‘अब स्पष्ट है कि मौजूदा सरकार अब तक की सबसे अधिक किसान विरोधी सरकार साबित हुयी है. किसान विरोधी सरकार को हराना है और जो किसान हितैषी होने का दावा कर रहे हैं उनको डराना है जिससे वे बाद में वादे से मुकर न जायें.

संसद मार्ग पर आयोजित किसान सभा में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विभिन्न गैर एनडीए दलों के नेता शामिल हुये. इस दौरान किसानों की कर्ज से मुक्ति और फसल का पूरा दाम दिलाने सहित 21 सूत्री मांग पत्र (किसान चार्टर) पेश किया गया.
राहुल बोले- एकजुट है विपक्ष
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों की मांग का समर्थन करते हुये कहा है कि किसानों की इस मांग के साथ विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं. उन्होंने सभा में मौजूद अन्य दलों के नेताओं का जिक्र करते हुये कहा ‘‘हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, मगर किसान और युवाओं के भविष्य के लिये हम सब एक हैं. मोदी जी और बीजेपी से हम कहना चाहते हैं कि अगर हमें कानून बदलना पड़े, मुख्यमंत्री बदलना पड़े या प्रधानमंत्री बदलना पड़े, हम किसान का भविष्य बनाने के लिये एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाले हैं.’’
केजरीवाल का पीएम मोदी पर निशाना
इस दौरान आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कृषि उपज मूल्य के निर्धारण से सबंधित स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने से मोदी सरकार के मुकरने को किसानों के साथ धोखा बताते हुये कहा है कि सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार को किसानों का तत्काल प्रभाव से पूरा कर्ज माफ कर भविष्य में फसल की उचित कीमत का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिये जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकें. इसके बाद प्राकृतिक आपदाओं से फसल के नुकसान से किसान को बचाने के लिये बीमा के बजाय दिल्ली की तर्ज पर मुआवजा योजना लागू की जानी चाहिये.
फारुख ने बताया खतरे की घंटी
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने किसान आंदोलन को केन्द्र सरकार के लिये खतरे की घंटी बताया. उन्होंने किसानों से कहा ‘‘हम आपकी बदहाली से वाकिफ हैं. हमें पता है आपको खेत पर किस हाल में काम करना पड़ता है और जब फसल अच्छी नहीं होती है तो आपको भूखा रहना पड़ता है.’’
समाजवादी पार्टी ने कहा- सरकार को गिराने की ताकत है
समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा किसानों के उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य पाने के उनके अभियान को मजबूत करने का काम किया है. उन्होंने कहा, ‘‘हम आपके प्रदर्शनों का समर्थन करने के लिए हमेशा यहां आए हैं और ऐसा करते रहेंगे.’’ उन्होंने कहा कि किसानों को कम नहीं आंकना चाहिए और उनके पास ‘‘सरकार गिराने’’ की ताकत है.
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव अतुल अनजान ने आरोप लगाया कि किसानों के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार के उदासीन रवैये ने कृषि क्षेत्र में संकट पैदा किया और स्थिति खराब हो रही है.
माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा नेता एस सुधाकर रेड्डी, आप सांसद संजय सिंह और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुए. येचुरी ने कहा, ‘‘हमारे पास वोटों की ताकत है. अगर सरकार अपना रुख नहीं बदलती है तो उसे सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा.’’ उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एकजुट है और ‘‘हम अगले चुनावों में मोदी को हटा देंगे.’’
भाकपा के महासचिव सुधाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार सबसे ज्यादा ‘‘किसान विरोधी सरकार’’ है. उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक पारित करने की कोशिश की लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हुआ. अगर भाजपा दोबारा जीत जाती है तो वह विवादित विधेयक को पारित करने के लिए कदम उठाएगी.’’
टीएमसी ने भि लिया भाग
तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी ने कहा, ‘‘भारत के किसान हमारे सामने खड़े हैं. यह भारत का अभियान है. ममता जी ने आपके लिए प्रेम व्यक्त किया है. अगर आपका संकल्प मजबूत हैं तो आप सब कुछ हासिल कर सकते हैं.’’
राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश में किसानों की स्थिति बदलने की जरुरत है लेकिन सरकार उनकी दुर्दशा की ओर ‘‘सहानुभूति’’ नहीं दिखा रही है. वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने कहा कि किसानों के साथ मोदी सरकार ने जो वादाखिलाफी की है उसे किसान माफ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा ‘‘हम किसानों की मांग के साथ खड़े हैं और संसद के आगामी सत्र में किसानों द्वारा प्रस्तावित विधेयक पर यहां मौजूद सभी नेताओं के दल से समर्थन मिलेगा.’’






















