किसानों के दिल्ली कूच का असर 2027 चुनाव में भी? 2022 का सियासी इतिहास फिर दोहराएगा पंजाब?
पंजाब में एक बार फिर किसानों के मुद्दे पर सियासत गर्म हो सकती है. 2022 के चुनाव के पहले तीन कृषि कानून बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बने थे और अब आगामी चुनाव से पहले एक और आंदोलन तैयार होता दिख रहा है.

किसान एक बार फिर सड़कों पर हैं. भारत और अमेरिका की प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ किसान आंदोलनरत हैं. दिल्ली स्थित किसान घाट पर किसान पहुंचे और अपनी बात रखी. किसानों का दावा है कि अमेरिका और भारत के बीच हुए ट्रेड डील से नुकसान होगा. हालांकि इस दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने किसानों को हिरासत में ले लिया. एक ओर जहां दिल्ली में किसान एकजुट हो रहे हैं तो वहीं इसका असर पंजाब चुनाव पर भी पड़ेगा.
किसानों का मौजूदा दिल्ली कूच एकदिवसीय है लेकिन इसका सियासी असर ज्यादा हो सकता है. दिल्ली कूच साल 2022 की याद भी दिला रहा है जहां चुनाव से कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने विवादित तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया था.
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय ‘किसान महापंचायत’ आयोजित करने की योजना है. किसान नेताओं ने पहले ही कहा था कि पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में किसान इस महापंचायत में भाग लेंगे.
शंभू सीमा पर रोके गए किसान
हालांकि पंजाब से किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर रखी है. बड़ी संख्या में किसान शंभू बॉर्डर पर जुटे हुए हैं और बैरिकेड्स हटाए जाने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे दिल्ली की ओर कूच कर सकें. मौके पर करीब 100 बसों के साथ कई छोटे वाहनों में किसान पहुंचे हैं, जिससे बॉर्डर पर भारी भीड़ जमा हो गई है.
अब इस फैसले को लेकर किसान हरियाणा सरकार से नाराज हैं. किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली जाना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का ‘असली चेहरा’ सामने आ गया है, जबकि वह अक्सर पंजाब आकर राज्य के लोगों से बड़े-बड़े वादे करते हैं.
इससे पहले सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को पुलिस ने कुरुक्षेत्र में उस समय हिरासत में ले लिया था, जब वह महापंचायत में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे थे.
2022 में आई थी 2 सीट
अब बात करते हैं साल 2022 के चुनाव के पहले एक साल तक चले आंदोलन की. तीनों कृषि कानून जब लागू हुए थे तब भारतीय जनता पार्टी जनता को उसके फायदे गिना रही थी. हालांकि चुनाव से कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामने आए और तीनों कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर दिया.
हालांकि तीनों कृषि कानूनों पर बीजेपी के बैकफुट पर जाने का पार्टी को फायदा नहीं हुआ और उसे पंजाब विधानसभा चुनाव में सिर्फ 2 सीटें मिलीं. इन्हीं कानूनों की वजह से शिरोमणि अकाली दल से बीजेपी का अलायंस भी टूट गया. माना जाता है कि इस आंदोलन को लेकर दिल्ली में तत्कालीन आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने पक्ष में माहौल बनाया जिसका लाभ उसे पंजाब में हुआ और वह पहली बार किसी राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही.
लोकसभा में पंजाब से 0 बीजेपी
लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के लिए राह आसान नहीं रही और वह पंजाब से 1 सीट भी नहीं जीत सकी.
जानकारों की मानें तो अगर यह एकदिवसीय महापंचायत, अगले कुछ दिनों या महीनों में आंदोलन का स्वरूप लेता है तो भारतीय जनता पार्टी के राह आसान नहीं होगी. फिलहाल हरियाणा से लेकर पंजाब और दिल्ली तक बीजेपी की लीडरशिप एक दिवसीय महापंचायत पर चुप है.
वहीं कांग्रेस इस मामले में वेट एंड वॉच की रणनीति अपना रही है. उधर, आम आदमी पार्टी बीजेपी को पहले से किसान विरोधी बताती रही है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी कुछ समय में किसानों का यह आंदोलन कैसा स्वरूप लेता है और उसका सियासी असर क्या होगा?
किसानों के आंदोलन पर क्या बोली कांग्रेस?
किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि पहले भी किसानों ने आत्महत्या की थी और कृषि कानूनों का विरोध किया था. आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और उनकी मांगें माननी पड़ीं. भारत एक कृषि प्रधान देश है, और जिस तरह से भारत ने व्यापार समझौते में घुटने टेके हैं और टैरिफ लगाए गए हैं, वह किसानों के खिलाफ है. मेरा हमेशा से यही मानना रहा है कि यह सरकार समाज के हर वर्ग के प्रति विरोधी रवैया रखती है और किसी भी तरह से सत्ता में बने रहने पर आमादा है. यह लगातार विधायकों और सांसदों को तोड़ने के तरीके ढूंढती रहती है. बंगाल या महाराष्ट्र जैसी जगहों पर उन्होंने जो हथकंडे अपनाए, वे जनता के जनादेश का अपमान हैं.
किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इस सरकार ने किसानों के साथ पहले ही बहुत बड़ा धोखा किया है. किसान आंदोलन के दौरान MSP की कानूनी गारंटी से जुड़ी जो भी मांगें मानी गई थीं, उनमें से किसी को भी पूरा नहीं किया गया है.
आप ने भी दिया समर्थन
उधर, AAP सांसद मालविंदर सिंह कांग ने कहा कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील वह निश्चित रूप से देश के कृषि क्षेत्र को बर्बाद कर देगी. मेरा मानना है कि किसानों को पहले कभी इतना बड़ा झटका नहीं लगा है. यह आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ है, लेकिन देश भर के किसान इस डील के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे.
शिरोमणि अकाली दल भड़की
किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा मैं पिछले दो सत्रों से इस ट्रेड डील के बारे में बात कर रही हूँ. हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है. हमें इसके बारे में व्हाइट हाउस की प्रेस रिलीज़ से पता चला. पिछले 10 महीनों से यह संदेह बना हुआ है. सरकार को किसानों से मिलना चाहिए, उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए और उनसे बातचीत करनी चाहिए. सरकार को उन्हें बॉर्डर पर रोकना नहीं चाहिए, उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए.
























