Xप्लेन: BRICS समिट में पहले दिन क्या-क्या हुआ? जानिए एक-एक घटना का हिसाब
BRICS समिट का पहला दिन भारत की कूटनीति के लिए शत-प्रतिशत सफल रहा. जिस मंच पर ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे दुश्मन देश बैठे थे, वहां भारत ने सर्वसम्मति से घोषणापत्र पास कराया.

भारत मंडपम में 12 सितंबर 2026 को 18वें BRICS समिट के पहले दिन भारत ने वो कर दिखाया, जो पिछले कई महीनों से असंभव लग रहा था. ईरान, सऊदी अरब और UAE समेत सभी देशों ने मिलकर 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन 2026' को सर्वसम्मति से पास कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले दिन की बातचीत के अंत में इसकी घोषणा की और कहा कि यह घोषणा सदस्य देशों के साझा संकल्प को बेहतर दिशा देती है. यह सिर्फ एक कागजी जीत नहीं है. तो इसी खुशी के मौके पर जानते हैं कि आज BRICS में क्या-क्या हुआ...
BRICS में एक-एक घटना का हिसाब
समिट की शुरुआत सुबह लीडर्स की फैमिली फोटो और पेड़ लगाने के कार्यक्रम से हुई. इसके बाद मोदी ने अपने स्वागत भाषण में एक बड़ा नारा दिया, 'रूल-टेकर्स से रूल-शेपर्स.' PM मोदी ने कहा कि बदलती दुनिया को पुरानी संस्थाएं नहीं चला सकतीं और सुधार जरूरी है. मोदी ने सुझाव दिया कि BRICS देश मिलकर वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिन्हें आगे 'BRICS रिफॉर्म रोडमैप' में बदला जा सके.
Planted a banyan tree with fellow BRICS leaders in Delhi.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
It is a fitting symbol of what BRICS stands for…deep roots, growing strength and coming together for a shared future.
May our partnership continue to grow in the times to come. pic.twitter.com/B6miHcmUC7
इसके बाद मोदी ने तीन बड़े प्रस्ताव रखे, जो पहले दिन की सबसे बड़ी निकली:
- BRICS कंटीन्यूइटी एंड इम्प्लीमेंटेशन मैकेनिज्म. इसका मतलब है कि हर साल अध्यक्षता बदलने के बाद भी BRICS के फैसलों पर अमल होता रहे. यह ट्रोइका (पिछले, मौजूदा और अगले अध्यक्ष) के जरिए होगा.
- सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क. होर्मुज और बाब अल-मंदीब जैसे समुद्री रास्तों पर जंग की वजह से नाविक फंसे हुए हैं. इस नेटवर्क से डिस्ट्रेस अलर्ट, मेडिकल मदद, परिवार से संपर्क और निकासी में सहायता मिलेगी. यह भारत के लिए खास है, क्योंकि भारत का 30% तेल होर्मुज से होकर आता है और वहां फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा सीधा राष्ट्रीय हित है.
- BRICS स्टार्टअप इनोवेशन फंड और इनक्यूबेटर नेटवर्क. युवाओं के स्टार्टअप के लिए वर्चुअल प्लेटफॉर्म भी बनेगा.
भारत को क्या फायदा हुआ?
भारत को 5 बड़े फायदे हुए:
- UNSC में भारत को समर्थन: दिल्ली डिक्लेरेशन में साफ लिखा है कि चीन और रूस ने UN सिक्योरिटी काउंसिल में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन दोहराया. यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है. हालांकि यह कोई नई बात नहीं है, लेकिन विस्तारित BRICS के संदर्भ में इसे दोबारा दर्ज करना अहम है.
- जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की निंदा: घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले की 'सबसे कड़े शब्दों में' निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए थे. आतंकवाद के सभी रूपों, सीमा पार आतंकी गतिविधियों, आतंकी फंडिंग और सेफ हेवन्स के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की बात कही गई. आतंकवाद पर दोहरे मापदंड को भी खारिज किया गया. भारत के लिए यह बयान बेहद मायने रखता है.
- एकतरफा टैरिफ पर चिंता: घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गंभीर चिंता जताई गई. कहा गया कि ऐसे उपाय व्यापार को विकृत करते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं को खतरे में डालते हैं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधि में अनिश्चितता पैदा करते हैं. WTO सुधार और विवाद निपटान तंत्र की बहाली की मांग भी की गई. यह उन देशों के लिए करारा संदेश है जो टैरिफ को हथियार बना रहे हैं.
- MSME और स्टार्टअप पर बड़ा फोकस: भारत की अध्यक्षता में MSME को बड़ा मुद्दा बनाया गया. अगरतला में पहला BRICS MSME फोरम हुआ और 'एडवांसिंग MSME कॉम्पिटिटिवनेस इन BRICS' रिपोर्ट जारी की गई. घोषणापत्र में MSME के लिए ट्रेड फाइनेंस तक पहुंच आसान बनाने का वर्कप्लान भी शामिल है.
- लोकल करेंसी में व्यापार: घोषणापत्र में लोकल करेंसी में व्यापार को आगे बढ़ाने की बात कही गई. भारत ने UPI को डिजिटल लिंक के तौर पर पेश किया. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने BRICS बिजनेस फोरम में कहा कि भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी पहल की है. भारत-रूस के बीच UPI और फास्टर पेमेंट्स सिस्टम को जोड़ने पर MoU भी साइन होने की उम्मीद है. इससे रुपए का अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रोल बढ़ेगा और लेनदेन लागत घटेगी.
Sharing my concluding remarks during the BRICS Summit. pic.twitter.com/PNkEBxAD3O
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
PM मोदी-शी की 7 साल बाद मुलाकात
समिट के पहले दिन की सबसे बड़ी साइडलाइन मीटिंग थी नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत. शी 7 साल बाद भारत आए हैं. 2020 के लद्दाख गतिरोध के बाद यह पहला मौका है जब चीनी राष्ट्रपति भारत की धरती पर हैं.
दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और सीमा मुद्दों पर बात की. PM मोदी ने कहा, 'मैं आपका भारत में स्वागत करता हूं.' यह मुलाकात भारत-चीन रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
BRICS Summit 2026 gets underway in Delhi. pic.twitter.com/WN7YWi5bTg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
ईरान और सऊदी की मौजूदगी में भारत की भूमिका
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, दोनों दिल्ली में मौजूद हैं. ईरान ने अपने गल्फ पड़ोसियों UAE और सऊदी अरब के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है, जिससे BRICS की सभी बैठकों में मतभेद की स्थिति बनी हुई थी. UAE ने ईरान के मिसाइल हमलों के बाद ईरान के साथ सारा व्यापार निलंबित कर दिया है.
भारत के लिए चुनौती यह थी कि वह ईरान और UAE को एक मंच पर लाए. भारत ने यह कर दिखाया. घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई और एकतरफा प्रतिबंधों को खारिज किया गया. यह भारत की कूटनीतिक काबिलियत का सबूत है.
पहले दिन के अन्य बड़े फैसले:
- 20 साल पूरे: BRICS के 20 साल पूरे होने पर सदस्य देशों के नेताओं ने दो स्मारक डाक टिकट जारी किए.
- 400 से ज्यादा बैठकें: भारत की अध्यक्षता में देश के 30 शहरों में 400 से ज्यादा बैठकें और कार्यक्रम हुए.
- महिला नेतृत्व: कोच्चि में हुई BRICS महिला मंत्रिस्तरीय बैठक के नतीजों का स्वागत किया गया, जिसमें महिला नेतृत्व वाले विकास पर जोर दिया गया.
- ऊर्जा सुरक्षा: घोषणापत्र में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत बताई गई और परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर हमलों की निंदा की गई.
इसके अलावा नेताओं ने हॉल 14 में आयोजित 'भारत इनोवेट्स एग्जीबिशन' का दौरा कर भारत की तकनीकी और नवाचार क्षमताओं का जायजा लिया. शाम को भारत मंडपम के लेवल 3 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेहमानों के लिए गाला डिनर ऑर्गनाइज किया.
यानी पहला दिन भारत के नाम?
मोदी-शी की 7 साल बाद मुलाकात ने भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा दी. UNSC में समर्थन, आतंकवाद पर सख्त रुख, MSME और स्टार्टअप पर फोकस और लोकल करेंसी में व्यापार जैसे हर मोर्चे पर भारत को फायदा मिला. अब दूसरे दिन की नजर इस पर है कि ये फैसले जमीन पर कैसे उतरते हैं और BRICS का विस्तार किस दिशा में आगे बढ़ता है.





















