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पाकिस्तान को जिसने किया तबाह, भारत की उस ब्रह्मोस के दीवाने हुए मुस्लिम देश, ये रही पूरी लिस्ट

Brahmos Missile Export: फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया, मलेशिया भी ब्रह्मोस खरीदने की दौड़ में शामिल हैं. दक्षिण चीन सागर में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ये देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना चाहते हैं.

भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस आज सिर्फ देश की सैन्य ताकत का प्रतीक नहीं रही, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी उसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. जिस मिसाइल को हालिया भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के रूप में देखा गया, उसी ब्रह्मोस को अब कई मुस्लिम देश अपनी सुरक्षा का भरोसेमंद हथियार मान रहे हैं. दक्षिण चीन सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक कई देश इस मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई पहचान मिल रही है.

दक्षिण चीन सागर से खाड़ी देशों तक बढ़ी मांग
दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से चिंतित कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस को एक प्रभावी विकल्प मान रहे हैं. भारत का पहला विदेशी ग्राहक फिलीपींस पहले ही इस मिसाइल प्रणाली को अपने रक्षा बेड़े में शामिल कर चुका है. वर्ष 2022 में दोनों देशों के बीच 375 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ था, जिसके तहत ब्रह्मोस की तीन तटीय एंटी-शिप बैटरियों की आपूर्ति की जा रही है.

फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया और मलेशिया भी ब्रह्मोस खरीदने की दौड़ में शामिल हैं. रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण चीन सागर में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ये देश अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना चाहते हैं. मलेशिया ने अपने Su-30MKM लड़ाकू विमानों के लिए ब्रह्मोस के एयर-लॉन्च संस्करण में भी रुचि दिखाई है.

वियतनाम के साथ बड़े समझौते की संभावना
वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए गंभीरता से बातचीत कर रहा है. संभावित सौदे का आकार 450 से 700 मिलियन डॉलर के बीच बताया जा रहा है. इस समझौते में सेना और नौसेना दोनों के लिए मिसाइल प्रणालियां शामिल हो सकती हैं. दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ बढ़ते तनाव के कारण वियतनाम अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना चाहता है.

खाड़ी देशों की भी बढ़ी दिलचस्पी
मध्य पूर्व के कई देश भी ब्रह्मोस को अपनी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनाना चाहते हैं. संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने इस मिसाइल प्रणाली में विशेष रुचि दिखाई है. क्षेत्रीय तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए ब्रह्मोस को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है. इसके अलावा कतर, ओमान और मिस्र भी इस मिसाइल प्रणाली को खरीदने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की लंबी दूरी और तेज गति इसे खाड़ी देशों के लिए आकर्षक बनाती है.

ब्रह्मोस की ताकत क्या है?
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है. यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज, यानी मैक 2.8 से मैक 3.0 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है, जिससे दुश्मन के रडार इसे देर से पहचान पाते हैं. इसके अलावा इसे जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा भरोसा
रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, हाल के सैन्य अभियानों और परीक्षणों में ब्रह्मोस के प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है. इसकी सटीकता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है, जिसके बाद विभिन्न देशों की रुचि और बढ़ी है.

चीन और पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ीं
ब्रह्मोस की बढ़ती लोकप्रियता को चीन और पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि भारत की इस मिसाइल प्रणाली को लेकर दोनों देशों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए गए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रह्मोस को लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है.

भारत के रक्षा निर्यात को मिल रही नई पहचान
फिलीपींस के साथ सफल रक्षा समझौते के बाद ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी है. दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

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