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दिल्ली: बीजेपी के बूथ मैनेजमेंट में हुआ बदलाव, अब पन्ना प्रमुख नहीं गेट प्रमुख होंगे

बीजेपी अपने बूथ मैनेजमेंट को काफी गंभीरता से लेती है और इसी बूथ मैनेजमेंट के दम पर पिछले कई सालों में कई विधानसभा और लोकसभा के चुनाव जीत रही है. साल 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी बुरी तरह हार गई थी.

नई दिल्ली: दिल्ली में 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी पूरी तरह से तैयारी में जुट गई है. बीजेपी ने इसके लिए अपनी अलग-अलग चुनाव समिति भी बना ली है और नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी भी देना शुरू कर दिया है. अपने बूथ मैनेजमेंट का काम भी तेजी से कर रही है. हर विधानसभा में अपने बूथ मैनेजमेंट का काम पूरा हो गया और अब इन बूथ इंचार्ज से 5 जनवरी को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में मुलाक़ात करेंगे और इन्हें जीत का मंत्र देंगे. इस बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन के लिए नारा भी तैयार किया गया है "बूथ जीता चुनाव जीता".

बीजेपी अपने बूथ मैनेजमेंट को काफी गंभीरता से लेती है और इसी बूथ मैनेजमेंट के दम पर पिछले कई सालों में कई विधानसभा और लोकसभा के चुनाव जीत रही है. लेकिन इस बार अपने इस बूथ मैनेजमेंट में बदलाव किया है. बीजेपी बूथ मैनेजमेंट में सबसे पहले आता है पन्ना प्रमुख, लेकिन अब पन्ना प्रमुख नहीं बल्कि गट प्रमुख होंगे.

अब तक बीजेपी अपने बूथ मैनेजमेंट में सबसे पहले पन्ना प्रमुख बनाती थी. पन्ना प्रमुख यानी वो व्यक्ति जिसे एक विधानसभा के एक पोलिंग बूथ पर वोटर लिस्ट के एक पन्ने पर मौजूद वोटर की जिम्मेदारी होती है. उन तक पार्टी का प्रचार और वोट डलवाने की जिम्मेदारी होती थी. लेकिन इस बार पार्टी ने इस जिम्मेदारी और नाम में बदलाव किया है. अब इन्हें पन्ना प्रमुख की जगह गट प्रमुख कहा जाएगा. वहीं अब ये वोटर लिस्ट के आधार पर नहीं बल्कि एरिया यानी भौगोलिक स्थिति के आधार पर होंगें. एक बूथ पर 15 से 25 गट प्रमुख होंगे और उनकी जिम्मेदारी एक पन्ने पर मौजूद वोटर नहीं बल्कि एक गली या लेन की पूरी जिम्मेदारी होगी.

ये बदलाव नहीं है बल्कि एक अलग तरह की व्यवस्था है- हर्ष मल्होत्रा

दिल्ली बीजेपी में बूथ प्रबंधन प्रभारी हर्ष मल्होत्रा ने एबीपी न्यूज़ को बताया "ये बदलाव नहीं है बल्कि एक अलग तरह की व्यवस्था है. हम आमतौर पर पन्नों के हिसाब से करते थे लेकिन इस बार भौगोलिक स्थिति यानी गलियों के आधार पर कर रहे हैं. यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि कई बार उस पन्ने पर मौजूद कई वोटर नहीं होते हैं या किसी और जगह रहने चले जाते हैं. ऐसे में एक ही गली की जिम्मेदारी देने पर वहां के वोटर से सीधा संवाद रहेगा और पार्टी की नीतियों को बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा. वहीं यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि यह वोट डालने जरूर जाएं."

दिल्ली बीजेपी में बूथ प्रबंधन प्रभारी हर्ष मल्होत्रा ने बताया "बीजेपी एक का कैडर बेस पार्टी है और बीजेपी की ताकत उसका बूथ कार्यकर्ता है. यही कार्यकर्ता केंद्र सरकार और एमसीडी के कामों को लोगों तक पहुंचाएंगे और विधानसभा में बीजेपी को जीत दिलाएंगे. नाम बदलने से काम पर असर नहीं होगा."

दिल्ली में कुल 13,750 बूथ हैं. बीजेपी ने हर बूथ का एक बूथ अध्यक्ष बनाया है. इन बूथ अध्यक्ष के अंतर्गत 10 से 25 तक गट प्रमुख होंगे जिन्हें इलाके के हिसाब से एक एक गली की जिम्मेदारी दी जाएगी. ये सभी बूथ के कार्यकर्ता शहरी केंद्र प्रमुख मंडल अध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे और रिपोर्ट करेंगे. जो आगे मंडल अध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे. और ये मंडल अध्यक्ष जिला अध्यक्ष को रिपोर्ट करेंगे. इस सिस्टम को लागू कर दिया गया है. वहीं इन लोगों की प्रदेश कार्यालय में रोजाना बैठक हो रही है. साल 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी बुरी तरह हार गई थी. 70 में सिर्फ 3 सीट पर ही बीजेपी जीत दर्ज कर पाई.

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