RSS महासचिव होसबोले का PM मोदी पर बड़ा बयान - 'उनके नेतृत्व में भारत...'
RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भोपाल में कहा कि भारत की तरक्की का फायदा पूरी मानवता को मिलना चाहिए. उन्होंने जाति भेदभाव और छुआछूत खत्म करने की अपील की.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने रविवार (20 सितंबर 2026) को कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए. भारत आगे बढ़े तो उसका फायदा पूरी मानवता को मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति का उद्देश्य दूसरे देशों पर दबदबा बनाना या उनका शोषण करना नहीं होना चाहिए. होसबोले भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में RSS के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित स्वयंसेवक एकत्रीकरण को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में भोपाल विभाग के पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी.
होसबोले ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक, औद्योगिक और वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रहा है. उनके मुताबिक देश की प्रगति का इस्तेमाल मानवता के हित में होना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया और कहा कि उनके नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ी है. यह होसबोले का राजनीतिक आकलन था.
जाति और छुआछूत को बताया समाज की कमजोरी
RSS सरकार्यवाह ने अपने भाषण में जाति के आधार पर भेदभाव और छुआछूत का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने इसे हिंदू समाज के लिए एक बड़ी समस्या और धब्बा बताया. होसबोले ने कहा कि जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की कि जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करने की शुरुआत अपने घर और अपने व्यवहार से करें. उन्होंने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच भेदभाव समाज को कमजोर करता है. उनके अनुसार केवल कानून बनाने या भाषण देने से यह समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि लोगों को अपने रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव लाना होगा.
शबरी और भगवान राम का उदाहरण दिया
होसबोले ने सामाजिक समानता की बात करते हुए रामायण में भगवान राम और शबरी के प्रसंग का उदाहरण दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब धार्मिक परंपरा में समानता और सामाजिक जुड़ाव के उदाहरण मौजूद हैं, तो जाति के नाम पर भेदभाव कैसे किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि समाज में एकता तभी मजबूत होगी जब लोग जाति, क्षेत्र, भाषा और दूसरी पहचान के आधार पर आपसी दूरी कम करेंगे. RSS के कार्यक्रम में सामाजिक समरसता को संगठन के प्रमुख संदेशों में शामिल किया गया.
संकट के समय समाज की भागीदारी जरूरी
होसबोले ने प्राकृतिक आपदाओं और कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्यों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि संकट के समय केवल किसी एक संगठन के कार्यकर्ताओं की मदद पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे समाज को आगे आना चाहिए. असम में हाल की बाढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि RSS से जुड़े सेवा भारती के स्वयंसेवक राहत कार्यों के लिए वहां पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि युवाओं, कॉलेज छात्रों और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों ने भी प्रभावित लोगों की मदद की.
पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी भी बताई
RSS नेता ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी लोगों से रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव करने की अपील की. उन्होंने कहा कि केवल बैठकों में प्रस्ताव पास करने से पर्यावरण की समस्या का समाधान नहीं होगा. उनके मुताबिक नदियों की सफाई, प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का काम घर, स्कूल, दफ्तर, बाजार और आसपास के इलाकों से शुरू होना चाहिए. उन्होंने स्वयंसेवकों से अपने काम के जरिए पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने को कहा.
मोहन भागवत के बयान का भी जिक्र
होसबोले का यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के उज्जैन में दिए गए भाषण के दो दिन बाद आया. भागवत ने ‘युवा धर्म संसद’ में शामिल करीब 1,700 Gen Z प्रतिभागियों से बात करते हुए इंसान के अहंकार और प्रकृति के सामने उसकी सीमाओं का उदाहरण दिया था. उन्होंने सूर्य का उदाहरण देते हुए कहा था कि इंसान चाहे उसके बारे में कुछ भी माने, लेकिन सूर्य का उगना और डूबना उसके नियंत्रण में नहीं है. भागवत का संदेश मानव क्षमता और प्रकृति के बीच संतुलन की ओर था.






















