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पुणे हिंसा: मेरे खिलाफ आरोप अमावस में सूरज दिखने जितने ही सही: संभाजी भिड़े

शिव प्रतिष्ठान संस्थान के संस्थापक 85 साल के संभाजी भिड़े और हिन्दू एकता मोर्चा के मिलिंद एकबोटे पर पुणे में हिसा का आरोप है.

नई दिल्ली: पुणे के पास भीमा कोरेगांव में एक जनवरी को हुई हिंसा के आरोपी 85 साल के संभाजी भिड़े सामने आए हैं. संभाजी भिड़े ने खुद के ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है. एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए संभाजी भिड़े ने आरोपों को अपने खिलाफ साजिश बताया है.

संभाजी भिड़े ने कहा, ''लोकतंत्र का मतलब ये हो गया है कि सत्ता को बनाए रखने के लिए अपनी मर्जी से काम करते हैं. जो नई सत्ता आई है उन्हें अपना सिंहासन खतरे में नजर आता है इसलिए असुरक्षा की भावना है. जब किसान आत्महत्या करते हैं तब उस पर राजनीति होती है. ये बहुत बुरी बात है.''

उन्होंने कहा, ''भगवान कृष्ण पर भी मणि चुराने का आरोप लगा था जो गलत साबित हुआ था, मुझे लगता है कि इतिहास दोहराया जा रहा है भिड़े गुरुजी, एकबोटे ने लोगों को भड़काया इस आरोप के पीछे का सच ढूंढना पड़ेगा. अगर कोई खगोलशास्त्री बोले की अमावस्या की रात को बारह बजे मैंने सूरज देखा, वो जितना सत्य है उतना ही सत्य हमारे खिलाफ लगाया गया हिंसा का आरोप है.''

उन्होंने कहा, ''जब मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन हुआ तब कहा गया कि सिंहासन छोड़ना पड़ेगा. जब आंदोलन होता है तब राजनीति होती है, अगर आप इसके पीछे जाते हैं तो पता चलता है कि इसके पीछे सत्ता की भूख होती है. लोकतंत्र का नाम लेकर सत्ता के लिए अपनी मर्जी के मुताबिक पाप करते हैं, ऐसी राजनीति हर पार्टी के नेता करते आए हैं और आज भी कर रहे हैं.'' संभाजी भिड़े ने कहा, ''सत्ता पाने के लिए हिंदू समाज में तोड़ फोड़ कर रहे हैं, ये राजनीति ऐसी है जैसे पांडवों के साथ धोखा हुआ था, उन्हें लक्षागृह में डाला था, विष देने की कोशिश हुई थी, वैसी कौरव वाली राजनीति सत्ता के लिए आज भी चल रही है. ये ध्यान में रखना जीत पांडवों की ही होगी.''

कौन हैं संभाजी भिड़े? पुणे के भीमा कोरेगांव में साल के पहले दिन दलितों पर जो हमला हुआ और उसके बाद हुई हिंसा के मामले में जिन दो लोगों पर केस दर्ज किया उनमें हिंदू एकता मोर्चा संगठन चलाने वाले मिलिंद एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान संस्था के संभाजी भिड़े का नाम है. इनमें से 85 साल के आरोपी संभाजी भिड़े का किरदार और इतिहास बेहद दिलचस्प है.

महाराष्ट्र के सांगली गांव में इन्हें हर कोई गुरुजी के नाम से जानता है लेकिन इनकी असली शख्सियत का अंदाजा आपको तब होगा जब आपको पता चलेगा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्हों गुरू जी कहते हैं. गुरु संभाजी भिड़े पर पुणे के पिंपरी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज हुआ है. उनके संगठन शिव प्रतिष्ठान के लोग गुरुजी पर लगे आरोपों को गलत बता रहे हैं.

संभाजी भिड़े का असली नाम मनोहर है, उन्होने एटॉमिक साइंस में एमएससी की हुई है. वे पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं. इस सब के बाद 1984 में उन्होने शिव प्रतिष्ठान नाम का संगठन बनाया, जिसका मकसद था शिवाजी महाराज के विचारों को फैलाना है.

खुद संभाजी भिड़े का रहन सहन और अंदाज बिलकुल अलग है. नंगे पैर रहने वाले संभाजी इस उम्र में भी घूमघूम कर लोगों से मिलते रहते हैं. वो कभी कार में नहीं चले, आज भी वो साइकिल या बस से ही अपनी यात्राएं करते हैं. बड़ी संख्या में युवा उन्हें अपना आदर्श मानते हैं, वो जहां जाते हैं उनके इर्द गिर्द युवाओं की भीड़ लग जाती है, कहा जाता है कि उनके एक इशारे पर 4 से 5 लाख युवा एक जगह जमा हो सकते हैं, यही संभाजी की ताकत मानी जाती है.

वो साल 2009 में तब चर्चा में आए जब उनके समर्थकों ने जोधा-अकबर फिल्म के विरोध के नाम पर सांगली, सतारा और कोल्हापुर में जमकर उत्पात किया. उसी साल तब उन्होने जमकर हंगामा किया जब सांगली के एक गणेश पंडाल में शिवाजी महाराज का एक चित्र लगाने से रोका गया.

संभाजी के संगठन के 2 कार्यकर्ता रोज रायगढ़ किले में शिवाजी की पूजा के लिए जाते हैं. उन्होने रायगढ़ क़िले में सोने का सिंहासन बनाने का संकल्प किया है जिसमें करीब 144 किलोग्राम सोना इस्तेमाल होगा.

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