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अयोध्या मामलाः जानें SC के उन पांच जजों के बारे में जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया

कौन है वो पांच जज जिन्होंने अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवादित जमीन रामलला को दी जाए. वहीं मुस्लिम पक्ष को कही और पांच एकड़ जमीन दिया जाएगा.संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर पांच जजों की पीठ ने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाया. आइए जानते हैं कौन हैं वह पांच जज जिन्होंने यह फैसला सुनाया.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के बेटे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर, 1954 को हुआ था. रंजन गोगोई ने डिब्रूगढ़ के डॉन बोस्को स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा अर्जित की और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इतिहास के छात्र रहे.

रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत के लिए पंजीकरण कराया था. उन्होंने संवैधानिक, कराधान और कंपनी मामलों में गुवाहाटी हाई कोर्ट में वकालत की. उन्हें 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. उनका नौ सितंबर, 2010 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में तबादला किया गया था. उन्हें 12 फरवरी, 2011 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था. वह 23 अप्रैल, 2012 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त किए गए.

शरद अरविंद बोबडे शरद अरविंद बोबडे का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को नागपुर में हुआ था. उनके पिता का नाम अरविंद श्रीनिवास बोबडे है. शरद अरविंद ने नागपुर विश्वविद्यालय से बी.ए. और एल.एल.बी डिग्री ली है. मौजूदा समय में वो सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम जज हैं. शरद अरविंद बोबडे अपर न्यायाधीश के रूप में 29 मार्च, 2000 को बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ का हिस्सा बने. 16 अक्टूबर, 2012 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. 12 अप्रैल, 2013 को भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया. उनका कार्यकाल 23 अप्रैल, 2021 में खत्म होने जा रहा है.

डीवाई चंद्रचूड़ डीवाई चंद्रचूड़ ने सेंट स्टीफन कॉलेज, नई दिल्ली से अर्थशास्त्र में ऑनर्स के साथ बी.ए. दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी किया है. इसके साथ ही उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल, यूएसए से एलएलएम की डिग्री और ज्यूरिडिकल साइंसेज (एसजेडी) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. डीवाई चंद्रचूड़ को 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया. चंद्रचूड़ 2013 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और बॉम्बे हाई कोर्ट के जज भी रहे हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ 1998 तक भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

जस्टिस अशोक भूषण जस्टिस अशोक भूषण का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 5 जुलाई 1956 को हुआ था. उनके पिता का नाम चंद्रमा प्रसाद श्रीवास्तव और माता का नाम कलावती श्रीवास्तव था. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक अशोक भूषण ने साल 1979 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ही फर्स्ट डिवीजन में एलएलबी की डिग्री भी हासिल की. 9 अप्रैल 1979 को वो उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में रजिस्टर्ड हुए और इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. साल 2001 तक वो वहां रहे. 24 अप्रैल 2001 को वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज नियुक्त किए गए. 2014 में वो केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. 13 मई 2016 को अशोक भूषण को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया.

जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर जस्टिस नजीर का जन्म 5 जनवरी 1958 को कर्नाटक के कनारा में हुआ था. नजीर ने 18 फरवरी 1983 में बेंगलुरु में कर्नाटक हाई कोर्ट में एक वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की. 12 मई 2003 में उन्हें कर्नाटक हाई कोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया. 24 सितंबर 2004 को कर्नाटक हाई कोर्ट में उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया. फरवरी 2017 में उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय में प्रोन्नत किए गए. अब्दुल नजीर ने 2017 में ट्रिपल तलाक मामले की सुनवाई भी की थी.

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