अनुच्छेद 370: गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा- सुरक्षा बलों को अधिकतम सतर्क रहने को कहें
गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे सुरक्षाबलों को अधिकतम सर्तक रहने को कहें. मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि ये जरूरी है कि असामाजिक तत्वों को देश के किसी भी हिस्से में सद्भाव के माहौल को खराब करने की अनुमति नहीं दी जाए.

नई दिल्ली: केंद्र ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित फैसलों के बाद सुरक्षा के किसी भी उल्लंघन को रोकने के वास्ते राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बोला है कि वे सुरक्षा बलों को अधिकतम सतर्क रहने को कहें. गृह मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक सर्कुलर में कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समग्र राष्ट्रीय हित में और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जम्मू-कश्मीर से संबंधित आज कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. यह आवश्यक है कि असामाजिक तत्वों को देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षा, शांति और जन सद्भाव के माहौल को खराब करने की अनुमति नहीं दी जाए.’’
इसमें सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को सुरक्षा व्यवस्था के किसी भी उल्लंघन को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को ‘‘अधिकतम सतर्क’’ रहने का निर्देश जारी करने को कहा गया है. इसमें कहा गया है, ‘‘यह अनुरोध किया जाता है कि देश के सभी हिस्सों में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जा सकते हैं और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है.’’
सरकार ने राज्य सरकारों को उनके राज्यों में रहने वाले जम्मू कश्मीर के निवासियों और छात्रों का विशेष ध्यान रखने के लिए कहा है. इसमें कहा गया है कि हिंसा और सांप्रदायिक तनाव को भड़काने और शांति के माहौल को बाधित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर प्रचारित झूठे, असत्यापित समाचार, अफवाहें और अनैतिक संदेशों के खिलाफ निगरानी रखने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों को उचित निर्देश जारी किये जाने चाहिए.
अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी घोषित करने के लिये संविधान संशोधन की जरूरत नहीं- अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया है कि जम्मू कश्मीर के बारे में विशेष प्रावधान करने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी घोषित करने के लिये संविधान में संशोधन करने की कानूनी बाध्यता नहीं है. उन्होंने जम्मू कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी घोषित करने संबंधी संकल्प को राज्यसभा में पेश करते हुये बताया कि इस प्रावधान को राष्ट्रपति की महज एक अधिसूचना के माध्यम से संशोधित किया जा सकता है.
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने सदन में व्यवस्था का सवाल उठाते हुये कहा कि संविधान के किसी प्रावधान में किसी भी प्रकार का संशोधन करने के लिये संविधान संशोधन करना अनिवार्य है. उन्होंने गृह मंत्री से पूछा कि ऐसे में सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक के बिना अनुच्छेद 370 को हटाने का संकल्प कैसे प्रस्तुत किया है.
इसके जवाब में अमित शाह ने सदन को बताया कि अनुच्छेद 370 के खंड तीन में राष्ट्रपति को एक अधिसूचना के द्वारा अनुच्छेद 370 को खत्म करने का अधिकार देने का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान के साथ ही संविधान में एक शर्त यह जोड़ी गयी है कि अनुच्छेद 370 में बदलाव से पहले राज्य की विधानसभा से सहमति लेनी होगी. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण इस बाध्यता का पालन अनिवार्य नहीं रह जाता है.
गृहमंत्री ने सदन को बताया, ‘‘आज सुबह राष्ट्रपति ने एक अधिसूचना जारी कर संवैधानिक आदेश पारित किया है. इसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा वजूद में नहीं होने के कारण राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य विधानसभा के समस्त अधिकार संसद के दोनों सदनों में निहित हैं. इसलिये राष्ट्रपति के आदेश को दोनों सदनों के साधारण बहुमत के द्वारा संसद से पारित कर सकते हैं.’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से पहली बार इस तरह की पहल नहीं की गयी है. इसके पहले कांग्रेस की सरकार 1952 और 1962 में इस प्रक्रिया का पालन करते हुये अनुच्छेद 370 में संशोधन कर चुकी है. मौजूदा सरकार ने भी इसी प्रक्रिया का पालन किया है.
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Source: IOCL






















