सीमा विवाद: चीन की घेराबंदी में अब खुलकर सामने आए अमेरिका और भारत
चीन के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद से अमेरिका भारत के पक्ष में पहले के बनिस्पत ज़्यादा मज़बूती से उतर आया है.

नई दिल्ली: चीन की घेराबंदी में अब अमेरिका और भारत खुलकर सामने आ चुके हैं. आपको याद होगा अभी चंद दिनों पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ये तक कह दिया था कि दक्षिण एशिया में चीन की गतिविधियों और भारत से तनाव को देखते हुए अमेरिका, जर्मनी समेत यूरोप से अपनी सैन्य टुकड़ियों को इस इलाके में भेज रहा है. ये सब भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के बीच हुई फोन पर बातचीत के बाद हुआ.
अमेरिकी जंगी जहाजों ने साउथ चाइना सी में अभ्यास किया
चीन के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद से अमेरिका भारत के पक्ष में पहले के बनिस्पत ज़्यादा मज़बूती से उतर आया है. यहां तक कि अमेरिका ने साउथ चाइना सी में अपने जंगी जहाजों की तैनाती तक बढ़ा दी है. एक दिन पहले ही अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमेरिकी जंगी जहाजों ने साउथ चाइना सी में अभ्यास भी किया.
यही नहीं हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक कांफ्रेंस में साफ ऐलान तक कर दिया था कि दक्षिण एशिया में चीन की गतिविधियों और भारत से तनाव को देखते हुए अमेरिका, जर्मनी समेत युरोप से अपनी सैन्य टुकड़ियों को इस इलाके में भेज रहा है.
बड़ी बात ये कि एबीपी न्यूज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गलवान में चीनी फौज के साथ हुई झड़प के बाद, तकरीबन 10 दिन पहले भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की फोन फर बात हुई थी, जिसमें जयशंकर ने चीन के साथ सीमा पर टकराव के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को पूरी जानकारी भी दी थी. सूत्रों के मुताबिक इसी दौरान माइक पोम्पियो ने भारत को हर तरह के मदद का भरोसा दिलाया था. इसके बाद अमेरिका ने भारत द्वारा 59 चीनी Apps पर रोक लगाने के फैसले का भी स्वागत किया था.
चीन के खिलाफ कोई मिलिट्री एलायंस नहीं बना रहा भारत
हालांकि जानकारों का मानना है कि भारत, चीन के खिलाफ कोई मिलिट्री एलायंस नहीं बना रहा, हां ये जरूर है कि कोरोना वायरस और दूसरी वजहों से पहले से ही चीन से खार खाया बैठा अमेरिका अब गलवान में हुई झड़प के बाद भारत का खुल के साथ दे रहा है. विदेश मामलों पर नज़र रखने वालों के मुताबिक फिलहाल भारत को समूचे विश्व का समर्थन प्राप्त है. मगर चीन के खिलाफ इस लड़ाई को भारत को मुख्यतः अपने बल बूते ही लड़ना है.
सूत्रों के मुताबिक ये जयशंकर और पोम्पियो के बीच हुई इस महत्वपूर्ण बातचीत का ही नतीजा है कि पिछले रविवार ही फिलीपीन्स सी में 2 अमेरिकी एयरक्राफ्ट्स ने अभ्यास भी किया. इससे एक हफ्ते पहले हीं USS Nimitz और USS Theodore Roosevelt ने इस इलाके में साझा आपरेशन्स किये थे. गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच भी 2 जून को फोन पर लंबी बात हुई थी, मगर गलवान घाटी की घटना इसके बाद हुई थी. लिहाज़ा अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई बातचीत का सीधा मतलब ज़रूरत पड़ने पर चीन के खिलाफ सैन्य लामबन्दी की तरफ है...और चीन को स्पष्ट संदेश मिल चुका है.
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