S-400 Missile System: भारत को इस हफ्ते मिलेगा चौथा S-400 स्क्वॉड्रन, जानिए कहां होगी तैनाती
S-400 Missile System: रूस निर्मित S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का चौथा स्क्वॉड्रन इस सप्ताह भारत पहुंचने वाला है.राजस्थान और आसपास के इलाकों में हवाई खतरों से सुरक्षा क्षमता को मतबूत करने की तैयारी.

रूस निर्मित S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का चौथा स्क्वॉड्रन इस सप्ताह भारत पहुंचने वाला है. सूत्रों के मुताबिक, इसे भारत की पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जाएगा, ताकि राजस्थान और आसपास के इलाकों में हवाई खतरों से सुरक्षा क्षमता और मजबूत हो सके. 2018 में भारत और रूस के बीच पांच S-400 यूनिट की खरीद का समझौता हुआ था. रूस-यूक्रेन युद्ध, भुगतान संबंधी दिक्कतों और सप्लाई चेन बाधाओं के कारण डिलीवरी में देरी हुई. पांचवां और अंतिम स्क्वॉड्रन भी इस साल के अंत तक भारत को मिल सकता है.
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समुद्री जहाज से सैन्य विमान तक: भारत कैसे पहुंचेगा चौथा S-400 स्क्वॉड्रन
इस सप्ताह डिलिवरी होने वाले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का चौथा स्क्वॉड्रन की डिलीवरी एक जटिल मल्टी-मोड लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन के जरिए की जाती है, जिसमें समुद्री जहाजों और भारी सैन्य परिवहन विमानों दोनों का इस्तेमाल होता है.
सूत्रों के मुताबिक, S-400 के बड़े और भारी उपकरण जैसे मिसाइल लॉन्चर, ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर (TEL) और तकनीकी सपोर्ट वाहन रूस से सुरक्षित कार्गो जहाजों के जरिए भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाए जाते हैं. वहीं रडार सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल मॉड्यूल और शुरुआती इंटरसेप्टर मिसाइलों जैसे संवेदनशील उपकरणों को सीधे भारतीय वायुसेना के एयरबेस तक एयरलिफ्ट किया जाता है.
इसके लिए Ilyushin Il-76 और Boeing C-17 Globemaster III जैसे भारी सैन्य परिवहन विमानों का इस्तेमाल किया जाता है. भारत पहुंचने के बाद सभी उपकरणों को एकीकृत कर परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद स्क्वॉड्रन को ऑपरेशनल तैनाती के लिए तैयार किया जाता है.
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम: भारत की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा ढाल
भारत को अब तक तीन स्क्वॉड्रन मिल चुके हैं, जो फिलहाल सक्रिय सेवा में हैं. S-400 ‘सुदर्शन चक्र’ भारत की सबसे उन्नत लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों में से एक है. रूस की अल्माज-एंटी कंपनी द्वारा विकसित यह सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन जैसे हवाई खतरों को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखता है.
S-400 एक मोबाइल Surface-to-Air Missile System है, जिसे कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर तैनात किया जा सकता है. इसकी रडार प्रणाली लगभग 600 किलोमीटर तक हवाई गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम मानी जाती है. वहीं, यह सिस्टम एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और इंटरसेप्ट कर सकता है.
इस प्रणाली में अलग-अलग दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह बहुस्तरीय सुरक्षा कवच प्रदान करती है. इसकी खासियत यह भी है कि यह इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी प्रभावी तरीके से काम कर सकती है. भारत ने रूस के साथ S-400 सिस्टम की खरीद के लिए समझौता किया था, जिसके बाद इसे भारतीय वायु सुरक्षा नेटवर्क का अहम हिस्सा बनाया गया. भारत के अलावा रूस, चीन, तुर्किये और बेलारूस भी इस एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं.
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