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अमशीपोरा एनकाउंटर: सेना ने अपने अधिकारियों और सैनिकों को दोषी माना, कार्रवाई के दिए आदेश

इस कार्रवाई के आदेश तब दिए गए जब खुद थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे दो दिन के कश्मीर दौरे पर थे.

नई दिल्ली: दक्षिणी कश्मीर के अमशीपोरा एनकाउंटर मामले में सेना ने अपनी ही राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) की एक यूनिट के अधिकारियों और सैनिकों को प्रथम-दृष्टया दोषी मानते हुए उनके खिलाफ अनुशात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों और सैनिकों ने ना केवल आर्म्ड फोर्स स्पेशल पॉवर एक्ट यानि आफस्पा की दी हुई ताकत का दुरूपयोग किया बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद थलसेन प्रमुख द्वारा काउंटर-टेरेरिस्ट ऑपरेशन के लिए बनाए गए चार्टर का भी उल्लंघन किया है.

इस कार्रवाई के आदेश तब दिए गए जब खुद थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे दो दिन के कश्मीर दौरे पर थे. वे वहां एलओसी और कश्मीर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने पहुंचे थे.

श्रीनगर स्थित रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता, कर्नल राजेश कालिया के मुताबिक, 18 जुलाई को शोपियां के अमशीपोरा में हुए एनकाउंटर के मामले में जांच पूरी हो गई है और जांचकर्ता ने इस मामले में आरोपियों (आरोपी सैन्य अधिकारियों और सैनिकों) के खिलाफ आर्मी एक्ट के तहत कारवाई के आदेश दिए हैं. लेकिन सेना ने ये साफ नहीं किया है कि इस मामले में कितने सैन्य अफसर और सैनिक दोषी पाए गए हैं.

आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर के अमशीपोरा एनकाउंटर केस में पिछले महीने सेना ने कोर्ट ऑफ एंक्वायरी के आदेश दिए थे. इसके तहत राजौरी जिले के गायब हुए तीन मजदूरों के परिवारवालों के डीएनए सैंपल ले लिए गए थे ताकि‌ उनका मिलान मारे गए आतंकियों के डीएनए से कराया जा सके. 18 जुलाई को शोपियां के अमशीपोरा में सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराए जाने का दावा किया था. लेकिन सोशल मीडिया में आई खबरों के आधार पर सेना ने इस मामले में कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए थे.

दरअसल, ‌सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि जिन तीन 'आतंकियों' को सेना ने मारने का दावा किया है, वे तीनों जम्मू-कश्मीर के ही राजौरी जिले के मजदूर थे और अपने घरों से लापता थे. सोशल मीडिया की इन खबरों के आधार पर सेना ने मामले के जांच के आदेश दिए थे. इसी कड़ी में सेना ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद से लापता हुए मजूदरों के परिवारवालों के डीएनए सैंपल कलेक्ट किए हैं. इसके‌ साथ ही कुछ अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज कराए गए.

कर्नल राजेश कालिया ने हालांकि साफ किया कि अभी तक मारे गए मजदूरों की डीएनए रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन इस बात की पुष्टि हो गई है कि मारे गए तीनों 'आतंकी'  की पहचान इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद अबरार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से राजौरी जिले के रूप में हुई है. साथ ही इन तीनों युवकों के आतंकी संगठनों से संबंध होने की जांच जम्मू कश्मीर पुलिस कर रही है. लेकिन प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि‌ भारतीय सेना "सभी एंटी-टेरेरिस्ट ऑपरेशन्स के नैतिक आचरण के लिए प्रतिबद्ध है."

गौरतलब है कि 18 जुलाई की तड़के सेना की राष्ट्रीय राईफल्स (आरआर) की '62 यूनिट' ने शोपियां जिले के अमशीपोरा में एक एनकाउंटर किया थ, जिसमें तीन आतंकियों के मारे जाने का दावा किया था. मारे गए आतंकियों के पास से दो पिस्टल भी बरामद हुए थे. ये एनकाउंटर आरआर की स्थानीय यूनिट ने 'ह्यूमन-इंट' यानि ह्यूमन-इंटेलीजेंस के आधार पर किया था.

आरआर की यूनिट को एक इनपुट मिला था, कि अमशीपोरा के एक घर में 4-5 आतंकी छिपे हुए हैं. इसी के आधार पर आरआर यूनिट ने वहां कोर्डन एंड सर्च ऑपरेशन लॉन्च किया था. सेना का दावा था कि कोर्डन लगाते वक्त ही आतंकियों ने एके-47 से उन पर जबरदस्त फायरिंग की थी. इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के टुकड़ियां भी एनकाउंटर-स्थल पर पहुंच गई थीं. घर में दाखिल होते वक्त भी उन पर पिस्टल से फायर हुआ था. सेना की जवाबी कारवाई में घर में मौजूद तीनों 'आतंकी' मारे गए थे. मारे गए आतंकियों के पास‌ से सुरक्षाबलों को दो पिस्टल भी बरामद हुए थे.

उस एनकाउंटर के बाद स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी भी की थी लेकिन सीआरपीएफ और पुलिस ने मिलकर भीड़ को तितरबितर कर दिया था. इस एनकाउंटर के बाद आरआर के अधिकारियों ने दावा किया था कि इस‌ इलाके में पाकिस्तानी और स्थानीय आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी जो आईईडी ब्लास्ट के जरिए सुरक्षाबलों को निशाना बनाना चाहते थे. हालांकि सेना ने एनकाउंटर के बाद ये भी माना था कि अमशीपोरा‌ इलाके में काफी समय बाद आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी.

18 जुलाई के एनकाउंटर के समय इन तीनों 'आतंकियों' की पहचान नहीं हो पाई थी और तीनों को अज्ञात बताकर अंतिम संस्कार (दफन) कर दिया गया था.  लेकिन 11 अगस्त को सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर (15वीं कोर) ने सोशल मीडिया में आई खबरों के आधार पर इस एनकाउंटर के उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए थे.

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नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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