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विशेष सीरीज: दुनिया ही नहीं, क्यों अपनी जनता के सामने भी कटघरे में खड़ा है चीन? जानें कोरोना के फैलने का पूरा सच

कोरोना वायरस महामारी को लेकर चीन पर ये आरोप लगे कि उसने दूसरे देशों के इसके बारे में देरी से बताया. आखिर क्यों चीन पर ये आरोप लगे और क्या चीन ने अपने देश की जनता से भी कोरोना वायरस की सच्चाई छिपाई, चीन की उन छह दिन की चुप्पी का सच बताने वाली रिपोर्ट में चीन के कौन से राज़ से पर्दा उठा दिया है?

कोरोना वायरस के इलाज के साथ साथ जो चीज पूरी दुनिया के लिए पहेली बनी हुई है, वह चीन की चुप्पी है. सबसे पहली बार कोरोना का मामला पिछले साल दिसंबर में चीन में सामने आया और फिलहाल दुनिया के 190 से ज्यादा देश इसकी चपेट में हैं. असल में, इस महामारी को लेकर चीन पर शुरू से ये आरोप लगे कि उसने इसके बारे में दूसरे मुल्कों को नहीं बताया. लेकिन चीन कब से इस राज को छुपाए था और चीन में किन किन लोगों को इसके बारे में पता था अब इस पर पर्दा उठ गया है. अब सवाल है कि आखिर चीन ने कोरोना वायरस के बारे में जानकारी देने में देरी क्यों की और अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिऐटेड प्रेस ने अब इसको लेकर ऐसा क्या दावा किया है?

अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिऐटेड प्रेस ने किया ये दावा

अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिऐटेड प्रेस ने दावा किया है कि चीन में जब कोरोना वायरस फैला तो कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने अपनी जनता को छह दिन तक इस बारे कुछ भी नहीं बताया.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 14 जनवरी को नेशनल हेल्थ कमीशन ने प्रिवेंशन हेल्थ अथॉरिटी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जिसका मकसद शी जिनपिंग और प्रीमियर ली केचियांग और वाइस प्रीमियर सुन चुन लान के संदेश को पहुंचाना था. इसका मतलब ये हुआ कि 14 जनवरी से पहले चीन के तीनों बड़े नेता जानते थे कि कोरोना वायरस छूने से फैल सकता है. लेकिन फिर भी चीन की सरकार ने अपनी जनता को 20 जनवरी तक ये बात नहीं बताई.

ऐसे में इस मौजूदा माहौल में चीन भूमिका और इसको लेकर तमाम चर्चाओं को केंद्र में रखते हुए एबीपी न्यूज़ दर्शकों और पाठकों के लिए स्पेशल सीरीज के साथ मुखातिब हो रहा है. इस सीरीज में सभी बिंदूओं पर विस्तार से चर्चा होगी. ये इस स्पेशल सीरीज का पहला भाग है.

अपने लोगों को ही गुमराह कर रहा है चीन

दरअसल, चीन दुनिया से झूठ बोल रहा है. हैरान करने वाली बात ये है कि चीन अपने लोगों को भी गुमराह कर रहा है. दावा है कि कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए चीन के करोड़ों नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया. भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी किस कदर खतरनाक हो चुका है, इसे समझने के लिए अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन चलना होगा. जहां चीन सीधे सीधे व्हाइट हाउस में घुसकर चीन अमेरिका को ललकार रहा है. जिस चीन से निकलकर कोरोना वायरस दुनिया फैला, जिस चीन ने कोरोना को लेकर झूठ बोला उस चीन की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि वो प्रोपेगैंडा वॉर से अमेरिका पर चीन से सहयोग के लिए दबाव बनवा रहा है.

कैसे अपने लोगों को चीन ने किया गुमराह?

क्या वुहान को ये पता ही नहीं था कि वो कोरोना जैसे खतरनाक वायरस की चपेट में है और उनकी सरकार ये सच उनसे छिपा रही है? अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिऐटेड प्रेस की रिपोर्ट कहती है कि जबकि चीन की सरकार लोगों को आगाह करने के बजाए उन्हें गुमराह कर रही थी. 14 जनवरी को चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन के प्रमुख ने फोन पर बातचीत करते हुए बताया था कि स्प्रिंग फेस्टिवल में बाहर से लोग आने वाले हैं ऐसे में वायरस के फैलने का खतरा बहुत ज्यादा है, इसलिए सभी एजेंसियां तैयारी कर लें. लेकिन जनता को ये बताया जा रहा था कि इस वायरस के इंसानों से इंसानों में फैलने की आशंका कम है.

चीन ने कोरोना का सच क्यों छिपाया?

दावा है कि चीन की सरकार की चिंता लोगों की जान से ज्यादा देश में राजनीतिक स्थिरता को लेकर थी. सरकारी नोटिस में बाकायदा कहा गया कि सारा फोकस मार्च में होने वाली कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे बड़ी बैठक के मुद्दों पर लगाया जाए. इसका अर्थ ये है कि वुहान में चीन की सरकार ने वायरस को फैलने दिया. देश में राजनीतिक अस्थिरता न हो जाए, इसलिए कोरोना के सच को छिपाया गया. ताकि कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को कोई खतरा पैदा न हो.

इस तरह चीन में न जानें कितने बेकसूर लोग अपनी सरकार के निजी हितों की भेंट चढ़ गए. अमेरिका की तरह ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा चीन से अब इस मामले में जवाब मांग रहे हैं तो वहीं रूस चीन को क्लीन चिट देकर उसके साथ जा खड़ा हुआ है. इस तरह चीन से निकले वायरस ने सारी दुनिया को बांट दिया है.

क्या मदद का ड्रामा कर रहा है चीन?

कोरोना वायरस के बाद दुनिया चीन से नाराज है. इस नाराजगी को खत्म करने के लिए चीन मदद का ड्रामा कर रहा है लेकिन उसका असल मकसद अपनी छवि को चमकाना है. उसने ऐसी ही कोशिश व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी की. लेकिन इस पर जब चीन पर नजर रखने वाली न्यूज एजेंसियों ने पड़ताल की तो असली सच सामने आया. जो महिला रिपोर्टर व्हाइट हाउस में चीन की खुलकर तारीफ कर रही थी, वो जिस फीनिक्स टीवी में काम करती है उसके मालिक चीन की सेना के पूर्व अफसर लियो चांग हैं. जिनके चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से करीबी रिश्ते हैं.

चीन पर नजर रखने वाली एजेंसियां कहती हैं कि चांग भले ही ताइवान में पैदा हुए वहीं पढ़े लिखे लेकिन वो ताइवान में रहकर अब शंघाई मीडिया ग्रुप के साथ काम कर रहे हैं जिसे चीन की सरकार चलाती है. कंपनी के पुराने मालिक जिनका दखल अब भी इस ग्रुप में चलता है उनका गहरा रिश्ता चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के साथ है. वे कोई साधारण पार्टी मेंबर नहीं हैं बल्कि वो एक बार शंघाई में पार्टी के डिप्टी सेक्रेट्री जनरल भी रह चुके हैं.

चीन के इसी रवैये ने सबको कोरोना की मुश्किल में डाल दिया है. लोग अपना चेहरा छूने तक से डर रहे हैं. दुनिया की महाशक्ति अमेरिका अपने 39 हजार से ज्यादा लोगों को गंवा चुका है. कोरोना की वजह से अमेरिका का बुरा हाल है. मेडिकल स्टाफ जरूरी सामान की कमी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका इस सबके लिए चीन पर ही निर्भर था. लेकिन कोरोना वायरस की वजह से चीन में फैक्ट्रियां बंद हो गईंं और सुपर पावर अमेरिका में लाशों का अंबार लग गया.

मैं चीन से खुश नहीं हूं- ट्रंप

अमेरिका में जान माल के नुकसान के लिए अमेरिका चीन को दोषी ठहरा रहा है. डॉनल्ड ट्रंप तो ये बात खुलकर कह रहे हैं, ''मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि कोरोना वायरस चीन से आया है. मैं दो टूक बोलता हूं. मैं चीन से खुश नहीं हूं. मैं वाकई में चीन से खुश नहीं हूं.'' शुक्रवार को डॉनल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, ''इस अज्ञात शत्रु से होने वाली मौतों का आंकड़ा चीन अचानक बढ़ा कर दोगुना कर दिया है. लेकिन ये इससे कहीं अधिक है, ये अमरीका में हो रही मौतों के आंकड़े से भी कहीं अधिक हैं.''

चीन ने कोरोना से हुई मौत का आंकड़ा बढ़ा दिया

दरअसल, चीन के हुबेई प्रांत के वुहान में अधिकारियों ने कोविड-19 से होने वाली मौतों के आंकड़े को 50 फीसदी तक बढ़ा दिया. इसने चीन पर लगने वाले इस आरोप की पुष्टि कर दी कि वो मौत के आंकड़े छिपा रहा है. चीन का कहना है कि जेलों और मुर्दाघरों में मौतों के संबंध में रखी गई रिपोर्टों से जो नया डेटा मिला है उसी के आधार पर नए आंकड़े जारी किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार और 1290 मौतें कोरोना वायरस के वजह से हुई हैं. इसके साथ ही हुबेई में मौतों का कुल आंकड़ा 3869 तक पहुंच गया और चीन के लिए ये आंकड़ा 4600 तक पहुंच गया है. लेकिन चीन पर कोई भी यकीन करने को तैयार नहीं है.

डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, ''जब मैं ये सुनता हूं कि दुनिया में कोरोना की वजह से अमेरिका में सबसे ज्यादा मौत हुई हैं. लेकिन सच ये है कि सबसे ज्यादा लोग चीन में मरे हैं. वो बहुत बड़ा देश है. कोरोना की वजह से बड़ी मुश्किल था. इसलिए वहीं सबसे ज्यादा मौत हुई होंगी. चीन ने मौत के आंकड़े दोगुने कर दिए हैं. लेकिन ये आंकड़े सिर्फ वुहान के हैं. चीन वुहान के बाहर की बात नहीं कर रहा. ये वाकई में दुख की बात है.''

चीन के नए इलाकों में किया जा रहा है लॉकडाउन

ट्रंप की बातों में इसलिए दम नजर आता है क्योंकि कोरोना को काबू में करने वाले चीन के नए इलाकों में लॉकडाउन किया जा रहा है. चीन के सोशल मीडिया पर इस तरह की तस्वीरें देखने को मिल रही हैं. चीन के अलग अलग शहरों में लॉकडाउन का दावा किया जा रहा है. सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है. चीन के हुबेई प्रांत में अस्पताल के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ वाली तस्वीरें भी सामने आई हैं.

दावा किया जा रहा है कि हुबेई प्रांत में इमरजेंसी नोटिस जारी किया गया है. इसमें सभी से लॉकडाउन का पालन करने का आदेश दिया गया है. इसके अलावा लोगों का टेंपरेचर भी नोट किया जा रहा है. अब सवाल ये है कि अगर वुहान से कोरोना वायरस खत्म हो चुका है तो फिर चीन के दूसरे राज्यों में लॉकडाउन क्यों हो रहा है, क्या हुबेई के अलावा चीन के बाकी राज्यों में वायरस फैल गया है. इसीलिए अब डॉनल्ड ट्रंप सीधे चीन पर उंगली उठा रहे हैं, उसे झूठा करार दे रहे हैं?

ट्रंप का सवाल- चीन ने सबसे पहले कोरोना पर कैसे काबू पाया?

ट्रंप ने कहा, ''वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी सच का पता नहीं लगा सका. इसलिए चीन ने सच नहीं बोला. कोरोना पर चीन का का रुख बहुत निराशाजनक और कमजोर था. लेकिन चीन कहता है कि उन्हें भी नहीं पता था. लेकिन फिर उन्होंने इस पर सबसे पहले काबू पा लिया. चीन के अंदर क्या चल रहा है उसने दुनिया को कुछ नहीं बताया.''

भारत के खिलाफ साजिश की सुरंग

भारत के खिलाफ भी चीन का रवैया सबके सामने है. म्यांमार के क्यॉकप्यू में बंदरगाह, बांग्लादेश के चिट्टी गांव में पोर्ट, दक्षिण में भारत के पड़ोसी श्रीलंका के हंबनटोटा में आधुनिक बंदरगाह, अफ्रीका के जिबूती में मिलिट्री बेस, पाकिस्तान के ग्वादर में आधुनिक बंदरगाह और पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में काराकोरम हाइवे, भारत के खिलाफ साजिश की सुरंग चीन में जाकर खुलती है. ये चीन के वो मोती हैं जो भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुके हैं. जिसे दुनिया 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' के नाम से जानती है.

क्या है 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स'

आज से करीब 15 साल पहले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने ‘एशिया में ऊर्जा का भविष्य’ नाम की एक खुफिया रिपोर्ट में 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' का जिक्र किया. पेंटागन की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि ये चीन के वो सामरिक ठिकाने हैं जिनका इस्तेमाल वो भारत के खिलाफ जरूरत पड़ने पर कर सकता है. रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (रिटा.) एस के चटर्जी कहते हैं, ''चीन ने हमारे पड़ोसियों के जरिए हमारी घेराबंदी की कोशिश की है. हर जगह निवेश किया है. श्रीलंका में हंबनटोटा पोर्ट को लीज़ पर लिया है. पाकिस्तान तो पूरी तरह चीन के कब्जे में है.''

चीन की महत्वाकांक्षा हिलोरे मार रही है

लेकिन इन 15 सालों में काफी कुछ बदल चुका है. चीन पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बन चुका है. चीन ने बड़े पैमाने पर अपनी सेना में निवेश किया है, उसे खतरनाक हथियारों से लैस कर लिया है. दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने के बाद चीन की महत्वकांक्षा हिलोरे मार रही है. चीन की महत्वकांक्षा को विस्तारवाद का वायरस संक्रमित कर चुका है. भारत के सीमा में होने वाली घुसपैठ इसी का संकेत और डोकलाम उसका सबसे बड़ा उदाहरण है. नौबत ये आ चुकी है कि ड्रैगन भारत ही नहीं दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है.

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