2014 से 2026: बुनियादी चुनौतियों से अहम मुद्दों तक, PM मोदी के भाषण में 'देश पहले'
साल 2014 में पहली बार लाल किले के प्राचीर से देश को बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था. तब से अबतक 13वीं बार प्रधानमंत्री स्वंतत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं.

PM Narendra Modi Freedom Day Speeches: साल 2014 में पहली बार लाल किले के प्राचीर से देश को बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था. तब से अबतक 13वीं बार प्रधानमंत्री मोदी स्वंतत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं. इतने सालों में देश में मूल भूत सुविधाओं के साथ-साथ तकनीक की दुनिया में काफी तब्दीली आई है. इतने सालों में प्रधानमंत्री के भाषण में भी कई बदलाव आए हैं. बात शौचालय के विकास से निकलकर सेमीकंडक्टर के विकास तक आ चुकी है.
मोदी सरकार के शुरुआती सालों में भाषण अक्सर ऐसी समस्याओं के बारे में होते थे, जो आज मामूली सी नजर आती है. शौचालय, बिजली, गरीबी, सड़कें, बैंक खाते, खाद की कमी ऐसे तमाम मुद्दे पहले के भाषणों में हुआ करते थे. तब देश में इस तरह की समस्याएं बेहद ही जटिल हुआ करती थी. उस समय जब पीएम मोदी इन मुद्दों पर बात करते थे, तो उनका लहजा बेहद ही गंभीर, जरूरी काम वाला होता था. चुनौती यह थी कि जो चीजें खराब थीं, उन्हें ठीक किया जाए. उन लोगों तक पहुंच बनाई जाए, जो बेहद ही पीछे छूट गए थे.
साल दर साल गुजरे, पीएम मोदी के भाषण की शब्दावली में भी तब्दीली आने लगी. बातचीत सुविधाओं की पहुंच से निकलकर आशा आकांक्षओं की ओर अग्रसर होने लगी. कमियों को दूर करने से लेकर समस्याओं को हल करने के ऐसे सिस्टम बनाने की ओर बढ़ चुकी हैं, जहां विकसित भारत के रास्ते की ओर बढ़ा जा सके.
शौचालय से सेमीकंडक्टर तक
साल 2014 के भाषण पर नजर डालें तो उनके मुद्दों में शौचालय जैसे मुद्दे थे. तब उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि क्या हम अपनी माताओं और बहनों की गरीमा के लिए शौचालयों का इंतजाम नहीं कर सकते?
अब अगर 2026 के भाषण को देखें तो उन्होंने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया और टेक्नोलॉजी से चलने वाले दौर में हम चिप की अहमियत को समझते हैं. चाहे इलेक्ट्रॉनिक सामान हो, मेडिकल उपकरण हों या ट्रांसपोर्ट सिस्टम, चिप हर जगह जरूरी है. दुनिया ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां चिप के बिना पूरा सिस्टम ठप हो सकता है. इसीलिए, भारत ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अपनी सेमीकंडक्टर बनाने की क्षमता विकसित करना शुरू कर दिया है.
ग्रामीण सड़कों से AI और क्वांटम कप्यूटिंग तक
साल 2016 में पीएम मोदी ने अपने भाषण में देश में ग्रामीण सड़कों से जुड़े मुद्दे की चर्चा की थी. तब उन्होंने कहा था कि हर ग्रामीण नागरिक पक्की सड़कों की चाहत रखता है.
2018 के भाषण में उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने एक ही बार में 100 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च किए, इससे दुनिया हैरान रह गई. 2024 में उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि चंद्रयान मिशन की सफलता के बाद हमारे स्कूलों और कॉलेजों में साइंस और टेक्नोलॉजी की दिलचस्पी में एक नया माहौल बना है. 2025 में हम अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर भारत के तहत गगनयान मिशन की तैयारी खुद कर रहे हैं. हम अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
2026 के भाषण में उन्होंने कहा कि आज का दौर एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस, रोबोटिक्स और डेटासेंटर्स का है. एक बिल्कुल नया क्षेत्र खुल गया है. नई नई टेक्नोलॉजी हर पल हमें चुनौती दे रही हैं. इसलिए हमें अपने देश को सिर्फ दुनिया के लिए बाजार नहीं बनाना है. हमें इनोवेशन हब बनना है.
गरीबी की लड़ाई
2014 के भाषण में पीएम मोदी ने गरीबी मिटाने पर जोर दिया था. तब उन्होंने कहा था कि अगर भारत के लोग बिना सरकारी ताकत, बिना हथियारों और बिना संसाधनों के इतने बड़े साम्राज्य को उखाड़ फेंक सकते थे, तो दोस्तों आज गरीबी मिटाना समय की जरूरत है. क्या हम गरीबी से पार नहीं पा सकते? क्या हम गरीबी को हरा नहीं सकते? मेरे 125 करोड़ प्यारे देशवासियों, आइए गरीबी मिटाने और उससे जीतने का संकल्प लें.
2026 के भाषण में उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब विकास आखिरी व्यक्ति तक पहुंचेगा. 2014 से पहले सिर्फ 25 करोड़ लोगों के पास सोशल सिक्योरिटी कवर था. हमने एक दश के भीतर 100 करोड़ देशवासियों को सोशल सिक्योरिटी कवर दिया है.
महिलाओं की गरिमा से लेकर महिलाओं के लीडरशिप रिजर्वेशन तक
2014 में पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि हम 21वीं सदी में जी रहे हैं. क्या हमें कभी इस बात का दुख हुआ है कि हमारी माताओं और बहनों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है? क्या महिलाओं की गरिमा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी नहीं है? गांव की गरीब महिलाएं रात का इंतज़ार करती हैं; जब तक अंधेरा नहीं हो जाता, वे शौच के लिए बाहर नहीं जा सकतीं. क्या हम अपनी माताओं और बहनों की गरिमा के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं कर सकते?
2018 में उन्होंने कहा कि मैं गर्व के साथ घोषणा करता हूं कि भारतीय सशस्त्र बलों के शॉर्ट सर्विस कमीशन में महिला अधिकारियों की नियुक्ति के लिए परमानेंट कमीशन दिया जाएगा.
2026 के भाषण में उन्होंने कहा कि आइए उनकी गरिमा बनाए रखने के लिए आगे बढ़ें और यह सुनिश्चित करें कि हमारी माताओं और बहनों को जल्द से जल्द विधानसभाओं और लोकसभा में 33% प्रतिनिधित्व मिले, ताकि वे भारत की नीतियां बनाने में योगदान दे सकें. यह समय की जरूरत है और मैं एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि वे आएं और इस मुहिम में शामिल हों.
किसानों को प्राथमिकता
पीएम मोदी ने किसानों के मुद्दे पर भी अपने भाषणों में भी गंभीरता से जिक्र किया. साल 2014 के भाषण में उन्होंने कहा था कि कृपया मुझे बताएं कि हमारे किसान आत्महत्या क्यों करते हैं? एक किसान साहूकार से कर्ज लेता है, लेकिन उसे चुका नहीं पाता. वह अपनी बेटी की शादी के लिए कर्ज लेता है, पर उसे भी नहीं चुका पाता. उसे जिंदगी भर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. आखिर में वह आत्महत्या कर लेता है. ऐसे किसानों के गरीब परिवारों को कौन बचाएगा?
2018 के भाषण में उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्री, किसान संगठन, किसान और राजनीतिक पार्टियां मांग कर रही थीं कि किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना MSP मिलना चाहिए. इस मामले पर सालों तक बहस हुई, फाइलें इधर-उधर घूमती रहीं, लेकिन बात अटकी रही. आखिरकार, हमने फैसला लिया. हमने किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना MSP देने का एक बड़ा फैसला लिया.





















