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Explained: आसिम मुनीर की डिक्टेटरशिप का आगाज! प्रधानमंत्री से ज्यादा ताकत और परमाणु बटन मिलेगा, क्या खुद ही ले डूबेंगे पाकिस्तान?

ABP Explainer: आसिम मुनीर की विचारधारा पाकिस्तानी आर्मी में इतनी गहरी है कि उन्होंने अपने काल्पनिक दुश्मन बना लिए हैं. किसी अन्य देश को नुकसान हो या न हो, लेकिन खुद पाकिस्तान को बर्बाद कर देंगे.

'दिल के फफोले जल उठे सीने के दाग से,
इस घर को आग लग गई घर के चिराग से...'

उर्दू शायर महताब राय ताबां का ये मशहूर शेर पाकिस्तान और उसकी आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर दुरुस्त बैठता है. अब आप सोचेंगे ऐसा क्यों? तो बता दें कि आसिम मुनीर ने पाकिस्तान के संविधान में संशोधन करके तीनों आर्मी की कमान और परमाणु बम का बटन अपने हाथों में ले लिया है. 10 नवंबर को सीनेट और 11 नवंबर को निचले सदन ने बिल को मंजूरी दे दी. आसिम मुनीर के भाषण धार्मिक शब्दों और संदर्भों से भरे होते हैं. मुनीर की विचारधारा पाकिस्तानी आर्मी में इतनी गहराई तक घुस गई है कि उन्होंने अपने काल्पनिक दुश्मन बना लिए हैं. इससे किसी अन्य देश को नुकसान हो या न हो, लेकिन खुद पाकिस्तान को बर्बाद कर देंगे.

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि आसिम मुनीर ने संविधान में क्या बदलाव किए, कितने ताकतवर हुए पाक आर्मी चीफ और कैसे पाकिस्तान को ही ले डूबेंगे...

सवाल 1- पाकिस्तानी आर्मी में CDF का पद क्या है और यह कितना ताकतवर है?
जवाब- पाकिस्तान में अभी तक चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) नाम का कोई पद नहीं था. यह खासतौर पर आसिम मुनीर के लिए बूनाया जा रहा है. इसके साथ ही मौजूदा चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद 27 नवंबर 2025 को खत्म कर दिया जाएगा. CDf ही तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा...

  • CDF बनने के बाद सेना प्रमुख (COAS) को संपूर्ण सैन्य सेवाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेना पर संवैधानिक अधिकार मिल जाएगा.
  • इससे सेना प्रमुख का पद पहली बार संविधान में स्थायी रूप से सर्वोच्च सैन्य शक्ति के रूप में दर्ज हो जाएगा.
  • अब तक CJCSC तीनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल बनाने का काम करती थी. जबकि असल ताकत आर्मी चीफ के पास होती थी, लेकिन अब दोनों ही चीजें CDF के पास होंगी.
  • थलसेना प्रमुख को ही CDF का पद भी दिया जाएगा. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर CDF फोर्सेज की नियुक्ति करेंगे.
  • NSC नाम की एक नई कमांड बनाई जाएगी. इसे परमाणु हथियारों और मिसाइलों का कंट्रोल दिया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री कीजगह CDF के पास होगी.

सवाल 2- आसिम मुनीर को CDF बनाने के लिए क्या-क्या हुआ?
जवाब- शहबाज सरकार इसके लिए संविधान में बदलाव कर रही है. इससे जुड़ा बिल 10 नवंबर को संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में पास हुआ. इसके पक्ष में 64 वोट पड़े, जबकि विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया.

  • पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट ARY न्यूज के मुताबिक, 11 नवंबर को निचले सदन यानी नेशनल असेंबली में इस बिल को पेश किया, जो पारित हो गया. लेकिन इसमें कुछ संशोधन करने के बाद दोबारा पेश किया जाएगा. इसके दोबारा पारित होने की उम्मीद है.
  • इस विधेयक को पाकिस्तान के इतिहास में सबसे बड़ा और विवादास्पद प्रस्ताव माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि यह देश की न्याय व्यवस्था और सैन्य ढांचे दोनों को बदलकर रख देगा. पाकिस्तान का संविधान 1973 का है, जिसमें अब 27वां संशोधन हो रहा है.
  • 27वें संविधान संशोधन का एक बहुत खास हिस्सा है नेशनल स्ट्रैटजिक कमांड (NSC) का गठन. यह कमांड पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और मिसाइल सिस्टम की निगरानी और कंट्रोल करेगी.
  • पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट में एक्सपर्ट के हवाले से बताया गया है कि इससे देश में सेना और ज्यादा ताकतवर हो जाएगी. संविधान में हो रहा संशोधन सेना के अधिकारों को स्थायी रूप से संविधान में दर्ज कर देगा.
  • आगे कोई भी नागरिक सरकार इन बदलावों को आसानी से उलट नहीं पाएगी. यानी व्यवहार में ‘राष्ट्रपति के सुप्रीम कमांडर’ की भूमिका सिर्फ औपचारिक रह जाएगी.

सवाल 3- आसिम मुनीर के लिए CDF का पद कितना जरूरी है?
जवाब- मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर को फील्ड मार्शल का सम्मान मिला. यह पाकिस्तान का दूसरा ऐसा पद था. पहले 1959 में अयूब खान ने खुद को दिया था. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद के प्रेसिडेंट हाउस में 20 मई 2025 को यह पदवी दी. लेकिन फील्ड मार्श का यह खिताब संवैधानिक रूप से असुरक्षित था. इसलिए 27वां संशोधन की बात उठी.

  • पाकिस्तान अखबार द डॉन के मुताबिक, यह संशोधन आसिम मुनीर को न सिर्फ लाइफटाइम प्रिविलेज देता है, बल्कि उन्हें COAS के साथ-साथ CDS का पद भी सौंपता है. कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने सीनेट में कहा, 'यह खिताब जिंदगीभर का है. जैसे अन्य देशों में मार्शल ऑफ द एयर फोर्स या एडमिरल ऑफ द फ्लीट होता है.' यह मुनीर के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि 28 नवंबर को वे रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में अगर यह पद मिल गया, तो वो जिंदगीभर रिटायर नहीं होंगे.
  • डॉन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करने का जो काम पूर्व सैन्य शासक जनरल जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ जैसे ताकतवर शख्स अपने दौर में नहीं कर पाए, अब वह काम चुनी हुई संसद करने जा रही है. यह संशोधन साबित कर देगा कि संसद के पास सब कुछ बदलने की ताकत है. यह भी कि अगर वह चाहे तो न्यायपालिका की रीढ़ भी तोड़ सकती है.
  • आसिम मुनीर को जिया-उल-हक का असली उत्तराधिकारी माना जाता है, क्योंकि वे पाकिस्तानी आर्मी में जिहाद की बात करते हैं. वे पाकिस्तानी आर्मी को इस्लामिक आर्मी बनाना चाहते हैं.

सवाल 4- यह सब होने की वजह सिर्फ मुनीर के लिए हमदर्दी है या कुछ और भी?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह संशोधन सैन्य-राजनीतिक गठजोड़ का नतीजा है. शहबाज शरीफ सरकार ने इसे 'मॉडर्नाइजेशन' बताया, लेकिन कहानी मई 2025 के भारत-पाक संघर्ष में हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने जीत का दावा किया, इससे मुनीर की पोजिशन मजबूत हुई. हालांकि, इंटरनल रिपोर्ट्स ने इसे नाकामी बताया था.

राजनीतिक रूप से इमरान खान की पॉलिटिकल पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को दबाने के लिए सेना का समर्थन जरूरी था. इमरान जेल में हैं और PTI को आपराधिक संगठन घोषित करने की कोशिश हुई. गठबंधन ने संशोधन को लेकर बहुमत जुटाया,. बिलावल भुट्टो ने कहा, 'हम आर्टिकल 243 के सैन्य बदलाव का समर्थन करेंगे, लेकिन हमारे प्रांत में आजादी का रोल बैक नहीं.'

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका ने चुप्पी साधी. ट्रंप प्रशासन ने मुनीर को सपोर्ट किया, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन जो विल्सन और डेमोक्रेट जिमी पानेता ने 'पाकिस्तान डेमोक्रेसी एक्ट' पेश किया, जो मुनीर पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है. फिर भी सूदी अरब और वेस्ट एशिया के साथ मुनीर के डिफेंस पैक्ट ने इसे आसान बनाया.

सवाल 5- क्या मुनीर को बेहिसाब ताकत देना, पाकिस्तान के लिए ही मुसीबत बन जाएगी?
जवाब- विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर ए. के. पाशआ के मुताबिक, यह संशोधन पाकिस्तान के लिए लंबे समय में घातक साबित हो सकता है. अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा गया, 'यह सेना को स्थायी वर्चस्व देगा, जो लोकतंत्र को कमजोर करेगा.' इसके अलावा...

  • संस्थागत असंतुलन: पाकिस्तान के पूर्व डिफेंस सेक्रेटरी आसिफ यासीन मलिक ने कहा है कि यह एक व्यक्ति के लिए बनाया गया लगता , न कि रक्षा संरचना मजबूत करने के लिए. नेवी और एयर फोर्स में असंतोष बढ़ सकता है, जिससे आंतरिक विद्रोह या कमजोर समन्वय हो सकता है.
  • लोकतंत्र का अंत: तहरीक-ए-तहफुज एन-ए-पाकिस्तान (TTAP) ने 9 नवंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन घोषित किए. अखुंद जिया के पोस्टर पर 'लॉन्ग लिव डेमोक्रेसी, डाउन विद डिक्टेटरशिप' लिखा. इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी और पहले से संकट में जूझ रही अर्थव्यवस्था को ज्यादा नुकसान होगा.
  • परमाणु जोखिम का खतरा: न्यूक्लियर कमांड का एक व्यक्ति पर निर्भर होना मिसकैलकुलेशन बढ़ाएगा. इससे भारत या अफगानिस्तान के साथ तनाव गहरा सकता है. मुनीर की महत्वकांक्षा व्यक्तिगत निर्णयों को बढ़ावा देगी.
  • मुनीर का पाकिस्तान को तबाह करना: इतिहास गवाह है कि अयूब खान (1958), जिया-उल-हक (1977) और परवेज मुशर्रफ (1999) ने सैन्य शक्ति को अस्थिर किया. मुनीर की सत्ता के लालच से आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और विद्रोह बढ़ सकता है. यह सिविल-मिलिट्री असंतुलन को स्थायी कर देगा, जो पाकिस्तान को अंदर से खोखला करेगा.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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