ईरान से डील पर अमेरिका में ही फूट! तेहरान में जासूसी के बाद सीआईए के अलर्ट से हड़कंप
खबर है कि सीआईए समेत कई प्रशासनिक दिग्गजों ने इस डील पर संदेह खड़ा किया है. साथ ही ट्रंप पर आरोप हैं, कि उन्होंने ईरान को बेहद ज्यादा ढील दी है. ट्रंप के लिए यह मुश्किल हो सकती कि किस टीम को संतुष्ट करें.

हस्ताक्षर होना मतलब डील होना होता है. ईरान और अमेरिका ने अंतरिम समझौते के फैसले पर मुहर लगाकर युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी हो, लेकिन अब खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड अपने ही गृहदेश यानी अमेरिका में फंस चुके हैं.
खबर है कि सीआईए समेत कई प्रशासनिक दिग्गजों ने इस डील पर संदेह खड़ा किया है. साथ ही ट्रंप पर आरोप हैं, कि उन्होंने ईरान को बेहद ज्यादा ढील दी है. ट्रंप के लिए यह मुश्किल हो सकती कि किस टीम को संतुष्ट करें. क्योंकि एक तरफ जहां ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ट्रंप के एडवाइजर और एंबेसडर स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर हैं, तो दूसरी तरफ सीआईए समेत प्रशासनिक लोग हैं. इनमें दो लेफ्टिनेंट विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षामंत्री पीट हेगसेथ भी शामिल हैं.
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सीआईए का इनपुट- अमेरिका को फिर से मिलने वाला धोखा
सीआईए ने हाल ही में एक इनपुट साझा किया है कि अमेरिका को फिर से धोखा मिलने वाला है. अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने राष्ट्रपति ट्रंप समेत अन्य अधिकारियों को बताया कि इसमे शक है कि ईरान किसी भी तरह से अमेरिका की परमाणु मामलों की मांग मानेगा या रियायत देगा. रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों ने हाई लेवल मीटिंग की.
अब ऐसे में देखना होगा कि अगर ईरान परमाणु मांगों को नहीं मानता है, तो अमेरिका क्या कदम उठा सकता है? इधर, एक व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सभी की राय सुनते हैं, और अंतिम फैसला खुद लेते हैं.
समझौते में क्या है परमाणु प्रोग्राम से जुड़ी शर्त?
समझौते के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान के पास किसी तरह का परमाणु हथियार न हो. न ही ज्यादा एनरिच करे यूरेनियम रख सके. हालांकि, अभी तक 14 पॉइंट वाले शुरुआती समझौते के टेक्सट को जारी नहीं किया गया है.
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