Sarojini Naidu Birth Anniversary: 12 साल में मैट्रिक टॉप, देश की पहली राज्यपाल, जानें 'नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' की कहानी
महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में पूरा जीवन देने वाली भारत कोकिला की आज जयंती है. देश उनका योगदान कभी नहीं भूल सकता है. आजादी से लेकर प्लेग महामारी तक में उन्होंने जो काम किया है, वो अविस्मरणीय है.

Sarojini Naidu Birth Anniversary : देश की महिलाओं के नाम पूरा जीवन करने और उनके अधिकारों के लिए खूब संघर्ष करने वाली भारत कोकिला यानी 'नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' सरोजिनी नायडू की आज जयंती है. आज के दिन राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. वह देश की पहली महिला राज्यपाल, कांग्रेस की कमान संभालने वाली पहली महिला थी. भारत की आजादी में भी उनका अहम योगदान रहा है.
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12 साल की उम्र से कविताओं से प्यार
सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में बंगाली परिवार में हुआ था. पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय साइंटिस्ट और मां सुंदरी देवी बांग्ला कविताएं लिखती थीं. सरोजिनी के भाई हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय भी एक कवि थे. 8 भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी थीं. घर में लिखने-पढ़ने के माहौल का उन पर काफी असर पड़ा और 12 साल की उम्र में कविताएं लिखनी शुरू कर दी.
मैट्रिक टॉप, इंग्लैंड से हायर एजुकेशन
सरोजिनी नायडू ने 12 साल की उम्र में ही मद्रास यूनिवर्सिटी से मैट्रिक परीक्षा टॉप कर लिया था. उनकी प्रतिभा को देखते हुए हैदराबाद के निजाम कॉलेज में उन्हें एडमिशन मिला. 16 साल की उम्र में हायर एजुकेशन के लिए इंग्लैंड चली गईं. वहां किंग्स कॉलेज, लंदन और गिरटन कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की.
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19 की उम्र में शादी, गांधी जी से मुलाकात
सरोजनी नायडू (Sarojini Naidu) की शादी 19 साल की उम्र में डॉ. गोविंद राजालु नायडू से हुई. 1914 में उनकी मुलाकात पहली बार महात्मा गांधी से हुई. यहीं से देश की आजादी के आंदोलन से जुड़ीं और गांधी के भारत आने से पहले उनके साथ दक्षिण अफ्रीका में भी काम किया. 1925 में उन्हें भारतीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. वो पहली भारतीय महिला थीं, जो कांग्रेस की कमान संभाल रही थीं.
केसर-ए-हिंद का सम्मान
जब भारत में प्लेग महामारी फैली, तब सरोजनी नायडू ने लोगों के लिए खूब काम किया और उनकी मदद की. उनके योगदान को देखते हुए 1928 में उन्हें केसर-ए-हिंद का सम्मान दिया गया.
15 अगस्त 1947 को जब देश को आजादी मिली, तब उन्हें यूनाइटेड प्रोविंस (अब उत्तर प्रदेश) का राज्यपाल चुना गया. वह देश की पहली महिला राज्यपाल बनीं. इस पद पर निधन होने तक बनी रहीं. 2 मार्च 1949 को लखनऊ में हार्ट अटैक आने से उनका निधन हो गया था. सरोजिनी नायडू की 135वीं जयंती 13 फरवरी 2014 से देश में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई.
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