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Vikat Sankashti Chaturthi Katha: विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत की संपूर्ण कथा पढ़ें, गणेश जी का मिलेगा आशीर्वाद

Vikat Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख की विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को है. इस व्रत से शत्रुओं का अन्त होता है और संतान, सफलता, सुख प्राप्त होते हैं. जानें वैशाख विकट संकष्टी चतुर्थी की कथा.

Vikat Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख की विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को है. इसे साल की बड़ी चतुर्थी कहा जाता है. विकट संकष्टी चतुर्थी में व्रत कथा जरुर पढ़ना चाहिए तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.

वैशाख विकट संकष्टी चतुर्थी की कथा

श्री कृष्ण ने कहा - 'हे राजा युधिष्ठिर! जिसने इस कल्याण प्रदायिनी वैशाख की विकट चतुर्थी का व्रत किया है तथा उसे जो भी फल प्राप्त हुआ, मैं उसका वर्णन कर रहा हूँ.

प्राचीन काल में रन्तिदेव नाम के एक अत्यन्त कीर्तिमान एवं पराक्रमी राजा थे. जिस प्रकार अग्नि तृण समूहों को भस्म कर देती है उसी प्रकार वे अपने शत्रुओं को नष्ट कर देते थे. रन्तिदेव की मित्रता यम, कुबेर, इन्द्र आदि देवताओं से थी. उन्हीं के राज्य में धर्मकेतु नाम के एक उत्तम ब्राह्मण निवास करते थे.

उनकी दो धर्मपत्नियाँ थीं जिनका नाम सुशीला एवं चञ्चला था. सुशीला नित्य नाना प्रकार के व्रत-उपवास आदि कर्म किया करती थी जिसके फलस्वरूप उसका शरीर दुर्बल हो गया था. उधर चञ्चला कभी किसी प्रकार का व्रत नहीं करती थी तथा भरपेट भोजन ग्रहण करती थी.

कालान्तर में सुशीला के गर्भ से सुन्दर लक्षणों से युक्त एक कन्या ने जन्म लिया तथा चञ्चला के गर्भ से एक पुत्र उत्पन्न हुआ. पुत्र रत्न की प्राप्ति के उपरान्त चञ्चला सुशीला को विभिन्न प्रकार से ताने देने लगी तथा उसे चिढ़ाते हुये बोली - 'अरी सुशीला! तूने इतने सारे व्रत-उपवास आदि करके अपनी देह को निर्बल कर लिया किन्तु तुझे तो एक कृशकाय कन्या प्राप्त हुयी है.

एक ओर मुझे देख, मैंने कभी व्रत-उपवास नहीं किये तथा भरपेट भोजन करके हृष्ट-पुष्ट बनी रही जिसके कारण मैंने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया है.' अपनी सौतन के मुख से निकले इन कटु वचनों को सुनकर सुशीला आहत हो गयी. वह पूर्ण विधि-विधान से भगवान गणेश जी की आराधना करने लगी. सुशीला द्वारा भक्तिपूर्वक संकटनाशक गणेश चतुर्थी का व्रत करने के फलस्वरूप भगवान गणेश उसके समक्ष प्रकट हो गये.

भगवान श्री गणेश ने कहा - 'हे पुत्री! तूने पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति से मेरी आराधना की है, जिसके फलस्वरूप में तुझसे अति प्रसन्न हूँ. मुझे तेरी मनोकामना ज्ञात है. अतः तेरे गर्भ से एक शास्त्रवेत्ता पुत्र उत्पन्न होगा.' इस प्रकार वरदान देकर भगवान गणेश जी वहाँ से अन्तर्धान हो गये.

गणेश जी की कृपा के फलस्वरूप सुशीला की कन्या के मुख से मोती, मूँगा आदि बहुमूल्य रत्न झड़ने लगे. कुछ समय के उपरान्त सुशीला को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति भी हुयी. पुत्र जन्म के कुछ समय पश्चात् ही धर्मकेतु का स्वर्गवास हो गया. धर्मकेतु की मृत्यु के उपरान्त चञ्चला उसकी समस्त धन-सम्पत्ति लेकर अन्यत्र निवास करने लगी.

परन्तु कन्या के मुख से मूँगा, मोती आदि बहुमूल्य रत्न उत्पन्न होने के कारण सुशीला ने अल्पकाल में ही अत्यधिक धन सञ्चित कर लिया. सुशीला के धनवान होने के कारण उसकी सौत चञ्चला उससे ईर्ष्या करने लगी.

एक दिन सुशीला की कन्या कुयें पर जल भर रही थी उसी समय चञ्चला ने उस कन्या को कुयें में धकेल दिया. किन्तु गणेश जी ने उस कन्या की रक्षा की और वह सुरक्षित अपनी माता के समीप आ गयी. उस कन्या को जीवित देखकर चञ्चला का हृदय परिवर्तन हो गया तथा वह विचार करने लगी कि, 'जिस जीव की रक्षा स्वयं ईश्वर करता है, उसे भला कौन मार सकता है?'

सुशीला भी अपनी पुत्री को सकुशल देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुयी तथा उसको हृदय से लगाते हुये बोली - 'श्रीगणेश जी की कृपा से तुझे पुनः जीवन प्राप्त हुआ है. मेरे गजानन ही अनाथों के नाथ हैं. वे अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं.'

भगवान गणपति की महिमा से प्रभावित होकर चञ्चला को प्रायश्चित्त हुआ तथा वह सुशीला के समक्ष आकर उसके चरणों में नतमस्तक होकर बोली - 'हे सुशीले! मेरी बहन! मैं अत्यन्त पापिनी एवं दुष्टा हूँ. आप मेरे द्वारा किये अपराधों को क्षमा करें. जिसकी रक्षा स्वयं ईश्वर करें उसका मनुष्य कैसे अहित कर सकता है? जो लोग धर्मात्माओं एवं सदाचारियों में दोष दर्शन करते हैं, वे अपने कर्मफल के प्रभाव से नष्ट हो जाते हैं.'

उसके बाद चञ्चला ने भी भगवान गणेश के पुण्यदायी व्रत का पालन किया. भगवान गणेश की कृपा से उन दोनों में परस्पर स्नेह एवं सौहार्द में निरन्तर वृद्धि होने लगी. श्री गणपति जी की कृपा से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं. सुशीला द्वारा किये गये व्रत के प्रभाव से उसकी सौतन चञ्चला का हृदय परिवर्तन हो गया."

भगवान गणेश आगे कहते हैं - "हे माता! मैंने आपको पूर्वकाल का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुना दिया है. संसार में इससे उत्तम समस्त विघ्नों को नष्ट करने वाला कोई अन्य व्रत नहीं है."

॥इति श्री विकट संकष्टी चतुर्थी कथा सम्पूर्णः॥

Vikat Sankashti Chaturthi 2026: अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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