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Vaishakh Vinayak Chaturthi Vrat Katha: आज वैशाख विनायक चतुर्थी व्रत में पढ़ें ये कथा, गणेश जी की बरसेगी कृपा

Vaishakh Vinayak Chaturthi 2026: 20 अप्रैल को आज संकर्षण विनायक चतुर्थी व्रत है. इस दिन गणपति जी की पूजा में कथा का पाठ जरुर करना चाहिए, तभी व्रत फलित होता है. देखें वैशाख संकर्षण विनायक चतुर्थी व्रत कथा

Vaishakh Vinayak Chaturthi 2026: आज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी है. ये व्रत समस्त कार्यों में आ रहे विघ्न को दूर कर सफलता प्रदान करता है. साथ ही जीवन में कष्ट भोग रहे साधक की परेशानियां दूर होती है. इस व्रत में कथा का जरुर श्रवण करना चाहिए इसके बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है.

संकर्षण विनायक चतुर्थी व्रत कथा

एक बार राजा दशरथ ने महर्षि वशिष्ठ से कहा -हे गुरुदेव! कृपया वैशाख शुक्ल चतुर्थी व्रत का महत्व बताइए. वशिष्ठ जी बोले - गुजरात में भद्रक नाम का एक सुंदर नगर था. वहाँ राजा ब्रह्मप्रिय नाम के एक धर्मात्मा और दानी राजा राज्य करते थे.

वे बहुत ज्ञानी थे, यज्ञ करते थे और ब्राह्मणों व अतिथियों का सम्मान करते थे. लेकिन उनके जीवन में एक बड़ी समस्या थी— उनकी पत्नियाँ एक-एक करके मरती चली गईं. उनकी पांच पत्नियों की मृत्यु हो गई, जिससे वे बहुत दुखी हो गए. दुखी होकर राजा ने राज्य छोड़ दिया और जंगल में अपने गुरु श्वेतकेतु के आश्रम में पहुंच गए.

राजा ने अपनी सारी दुखभरी कहानी सुनाई. तब श्वेतकेतु जी ध्यान में गए और बोले हे राजन! यह सब इसलिए हुआ क्योंकि तुम्हारे राज्य में चतुर्थी व्रत का पालन नहीं हो रहा था. जो लोग यह व्रत नहीं करते, उनके शुभ कर्म भी फल नहीं देते. राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पूछा “हे गुरुदेव! यह व्रत कैसे किया जाता है और किसकी पूजा होती है?

यह व्रत भगवान गणेश का होता है, जो सभी विघ्नों को दूर करने वाले हैं. उन्होंने आगे अपनी कहानी सुनाई उनके पिता उद्दालक ने उन्हें सिखाया था कि मन (चित्त) को शांत करके भगवान गणेश की उपासना करनी चाहिए.  गणेश जी की कृपा से मन शांत होता है और इंसान मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त कर सकता है.

श्वेतकेतु जी ने राजा को गणेश जी का मंत्र दिया. राजा ब्रह्मप्रिय वापस अपने राज्य आए और पूरे राज्य में घोषणा कर दी. हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत किया जाए. उन्होंने खुद भी श्रद्धा से व्रत रखा और गणेश जी की पूजा की.

फलस्वरूप उनका जीवन सुखमय हो गया उन्होंने अच्छे से राज्य किया. अंत में वे भगवान में लीन (मोक्ष) हो गए दूसरी कथा (पापी ब्राह्मण की) वशिष्ठ जी ने एक और उदाहरण दिया- महाराष्ट्र में एक बहुत पापी ब्राह्मण रहता था.वह शराब पीता, चोरी करता और बुरे काम करता था.

एक दिन वह एक स्त्री के साथ गलत काम करते हुए पकड़ा गया और उस स्त्री के पति ने उसे घायल कर दिया. उस दिन चतुर्थी तिथि थी, और चोट के कारण वह ब्राह्मण पूरे दिन भूखा रहा. अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई. लेकिन चौंकाने वाली बात यह हुई कि  अनजाने में चतुर्थी का व्रत रखने के कारण उसे भी मोक्ष मिल गया.

जो मनुष्य वैशाख शुक्ल चतुर्थी के माहात्म्य का श्रवण अथवा पाठ करेगा, उसके सभी मनोरथ सिद्ध होंगे. इस प्रकार श्रीमुद्गलपुराण में वर्णित वैशाख शुक्ल चतुर्थी माहात्म्य सम्पूर्ण होता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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