Viral Video: बिन सिंदूर अधूरा था सात जन्मों का बंधन, डिलीवरी बॉय बना संकटमोचक और मिनटों में पहुंचाई सिंदूर
Trending Viral Video: हिंदू विवाह संस्कार सिंदूर बिना अधूरा है. इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें क्विक डिलीवरी की मदद से सिंदूरदान की रस्म पूरी हुई. यह घटना परंपरा और आधुनिकता का उदाहरण है.

Trending Viral Video: भारतीय हिंदू परंपरा में विवाह में सिंदूर दान को केवल एक रस्म नहीं, बल्कि सात जन्मों के बंधन का प्रतीक माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, विवाह के समय वर वधू की मांग में सिंदूर भरता है, जोकि विवाह के संपन्न होने और पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते की पूर्णता का संकेत है. लेकिन जब विवाह मंडप में सिंदूर ही न हो, तो इस रीति में बड़ी बाधा पहुंच सकती है.
हाल ही में एक जोड़े के विवाह में ठीक ऐसी ही समस्या उत्पन्न हुई, जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. हालांकि बाद में इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया गया.
सिंदूर लाना भूल गया दूल्हा
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि, एक विवाह समारोह के दौरान जब दूल्हा-दुल्हन मंडप में बैठे होते हैं, तभी पता चला कि सिंदूर तो उपलब्ध ही नहीं है. दूल्हे पक्ष की तरफ से सिंदूर लाना ही भूल गए थे. लेकिन सिंदूर के बिना तो विवाह की अंतिम और महत्वपूर्ण रस्म अधूरी मानी जाती है. ऐसे में शादी समारोह में कुछ देर के लिए सभी लोग परेशान हो गए.
संकटमोचक बना डिलीवरी बॉय
इसी दौरान परिवार की एक महिला सदस्य ने क्विक डिलीवरी सेवा का सहारा लिया और कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन डिलीवरी से सिंदूर मंगवा लिया. कुछ ही मिनट में सिंदूर पहुंच गया और दूल्हे ने दुल्हन की मांग में सिंदूर भरकर विवाह की रस्म पूरी की. इस तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से धार्मिक परंपरा के निर्वहन में डिलीवरी बॉय ने संकटमोचक की भूमिका निभाई.
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बता दें कि, धर्मशास्त्रों में सिंदूर को सौभाग्य, दीर्घायु और वैवाहिक स्थिरता का प्रतीक माना गया है. लगभग हिंदू धर्म के सभी ग्रंथ-पुराणों में विवाहित स्त्री के लिए सिंदूर के महत्व का उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि मांग में सिंदूर लगाने करने से पति की आयु और दांपत्य जीवन की रक्षा होती है.
आस्था और साधन से संपन्न हुआ विवाह
इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो मस्ती-मजाक नहीं बल्कि विवाह में सिंदूर के महत्व को भी दर्शाता है. साथ ही यह घटना इस बात का संदेश देती है कि आस्था या परपंरा के लिए भले ही साधन बदल जाए, लेकिन भाव वही रहता है. धर्म और तकनीक का यह मेल यह भी दर्शाता है कि आज की पीढ़ी परंपराओं को छोड़ नहीं रही, बल्कि नए तरीकों से उन्हें सहेज रही है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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