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Solar Eclipse 2026: भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण, फिर आज क्यों महसूस हो रही थकान?

Surya Grahan 2026: क्या सूर्य ग्रहण के कारण सिरदर्द, थकान या सुस्ती होती है? जानें भारत में ग्रहण की दृश्यता, वैज्ञानिक कारण और आंखों की सुरक्षा के जरूरी नियम.

Surya Grahan 2026: आज 12 अगस्त 2026 को साल का महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण लग रहा है. दुनिया के कई हिस्सों में लोग इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देख सकेंगे. इसी बीच सोशल मीडिया पर ग्रहण के कारण सुस्ती, सिरदर्द और शरीर में भारीपन होने की चर्चाएं भी तेज हैं.

कुछ लोग सुबह से थकान या सिर भारी होने की शिकायत कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वास्तव में सूर्य ग्रहण शरीर पर असर डाल रहा है?

भारत में नहीं दिखाई देगा 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण

NASA के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे से हिस्से में दिखाई देगा. यूरोप, कनाडा, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण नजर आएगा.

भारत इस ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं है. यहां दिन के समय सूर्य की रोशनी में ग्रहण के कारण कोई अचानक बदलाव नहीं होगा. ऐसे में भारत में महसूस होने वाली थकान को सूर्य ग्रहण का सीधा प्रभाव नहीं माना जा सकता. 

क्या ग्रहण के कारण मेलाटोनिन बढ़ जाता है?

हमारे शरीर की एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है. इसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है. यह रोशनी और अंधेरे के अनुसार नींद, जागने और शरीर की कई गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करती है.

लेकिन ग्रहण के दौरान कुछ समय के लिए रोशनी कम होने से इंसानों में मेलाटोनिन हार्मोन तुरंत बढ़ जाता है, इसका पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

ग्रहण दिखाई देने वाले क्षेत्रों में वातावरण की रोशनी और तापमान कुछ देर के लिए बदल सकते हैं. इससे कुछ लोगों को माहौल अलग महसूस हो सकता है. इसका अर्थ यह नहीं कि ग्रहण प्रत्येक व्यक्ति को नींद, सुस्ती या मांसपेशियों में ढीलापन दे देगा.

भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यह संभावना भी लागू नहीं होती, लेकिन पूरी तरह से इंकार भी नहीं किया जा सकता है क्योंकि हमारे पौराणिक ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में सूर्य ग्रहण को लेकर विस्तार से बताया गया है और इसे शुभ खगोलीय घटना के रूप में नहीं मानते हैं.

यह भी पढ़ें- 12 अगस्त को एक साथ अमावस्या और सूर्य ग्रहण, पूजा करें या लगेगा सूतक? जानें सही नियम

फिर आज सिरदर्द और सुस्ती क्यों हो सकती है?

सिरदर्द और थकान के कई सामान्य कारण होते हैं. इनमें नींद पूरी नहीं होना, गर्मी, लंबे समय तक स्क्रीन देखना, मानसिक तनाव, भोजन नहीं करना और शरीर में पानी की कमी शामिल हैं.

यदि कोई व्यक्ति धार्मिक मान्यताओं के कारण ग्रहण से पहले ही खाना या पानी छोड़ देता है, तो उसकी दिनचर्या बदल सकती है. लंबे समय तक खाली पेट रहने से कमजोरी, चक्कर या सिरदर्द महसूस हो सकता है.

इसी तरह पर्याप्त पानी नहीं पीने पर डिहाइड्रेशन हो सकता है. इसके सामान्य लक्षणों में प्यास, थकान, सिरदर्द, चक्कर, मुंह सूखना और पेशाब का रंग गहरा होना शामिल है. 

इस स्थिति में परेशानी का कारण ग्रहण नहीं, बल्कि पानी और भोजन की कमी हो सकती है.

वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय राहु सूर्य को जकड़ लेता है, जिस कारण सूर्य को पीड़ा होती है, सूर्य को ज्योतिष में आत्मा का कारक माना गया है. राहु को भ्रम का कारक बताया गया है. 

Nocebo Effect: ग्रहण का डर भी करा सकता है परेशानी

किसी नकारात्मक प्रभाव की आशंका के कारण वैसी ही परेशानी महसूस होने को nocebo effect कहा जाता है.

यदि कोई व्यक्ति पहले से मानता है कि ग्रहण वाले दिन तबीयत खराब होगी, तो वह शरीर के सामान्य बदलावों पर भी अधिक ध्यान देने लगता है. हल्की थकान उसे असामान्य लग सकती है. सामान्य सिरदर्द को भी ग्रहण का प्रभाव माना जा सकता है.

ग्रहण से जुड़ी डरावनी पोस्ट, वीडियो और अपुष्ट दावे इस चिंता को बढ़ा सकते हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संबंधित व्यक्ति की परेशानी काल्पनिक है. तनाव वास्तव में सिरदर्द, बेचैनी, मतली और थकान जैसे लक्षण पैदा कर सकता है.

सीधे सूर्य को देखना सबसे बड़ा खतरा

सूर्य ग्रहण से शरीर के बीमार होने का कोई प्रमाण नहीं है. लेकिन ग्रहण को गलत तरीके से देखना आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

ग्रहण के समय सूर्य की चमक कुछ कम दिखाई दे सकती है. इसके बावजूद उसे नंगी आंखों से देखना सुरक्षित नहीं होता. सीधे सूर्य को देखने से रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है. इसे solar retinopathy कहा जाता है.

रेटिना में दर्द महसूस करने वाली नसें नहीं होतीं. इसलिए आंख को नुकसान पहुंचने के दौरान तत्काल दर्द होना जरूरी नहीं है. बाद में धुंधला दिखाई देना, रंग बदले हुए दिखना या नजर के बीच काला धब्बा आने जैसी शिकायत हो सकती है.

हालांकि भारत में आज ग्रहण दिखाई नहीं देगा, फिर भी सामान्य दिनों में भी सीधे सूर्य को देखना सुरक्षित नहीं है.

ग्रहण देखने के लिए कैसा चश्मा जरूरी है?

जहां ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहां उसे देखने के लिए केवल ISO 12312-2 मानक वाले eclipse glasses या सुरक्षित handheld solar viewer का इस्तेमाल करना चाहिए.

साधारण धूप का चश्मा, एक्स-रे फिल्म, काला शीशा, मोबाइल कैमरा या घरेलू जुगाड़ आंखों को सुरक्षित नहीं रखते. कैमरा, दूरबीन और टेलीस्कोप के लिए उनके सामने विशेष solar filter लगाना जरूरी है.

NASA यह भी स्पष्ट करता है कि वह किसी खास ब्रांड के eclipse glasses को प्रमाणित या अधिकृत नहीं करता.
क्या ग्रहण कोई खतरनाक रेडिएशन पैदा करता है?

सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य से कोई नई, रहस्यमयी या असामान्य किरण नहीं निकलती. ग्रहण केवल सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की खगोलीय स्थिति का परिणाम है.

आंखों के लिए खतरा इसलिए पैदा होता है क्योंकि लोग सूर्य की कम दिखाई देने वाली चमक के कारण उसे अधिक देर तक देखते हैं. नुकसान ग्रहण की किसी विशेष किरण से नहीं, बल्कि सीधे सूर्य को देखने से होता है.

इसी तरह ग्रहण के दौरान गुरुत्वाकर्षण में ऐसा कोई असाधारण बदलाव नहीं होता जो इंसानों में अचानक सिरदर्द या कमजोरी पैदा कर दे.

सुस्ती या सिरदर्द हो तो क्या करें?

यदि आज सिर भारी या शरीर सुस्त लग रहा है, तो पहले अपनी दिनचर्या देखें.

  • पर्याप्त पानी पिएं.
  • लंबे समय तक खाली पेट न रहें.
  • नियमित और हल्का भोजन लें.
  • कुछ समय स्क्रीन से दूर रहें.
  • नींद पूरी करें.
  • गर्मी में लंबे समय तक बाहर रहने से बचें.
  • सिरदर्द बार-बार हो रहा है तो उसके समय और संभावित कारण लिखें.

डायबिटीज, गर्भावस्था या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक भोजन या पानी बंद नहीं करना चाहिए.

इन लक्षणों को ग्रहण समझकर नजरअंदाज न करें

अचानक बहुत तेज सिरदर्द, बेहोशी, लगातार उल्टी, बोलने में परेशानी, नजर धुंधली होना, चेहरे या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं.

यदि किसी ने सीधे सूर्य को देखा हो और उसके बाद नजर में धब्बा, धुंधलापन या रंगों में बदलाव महसूस हो, तो जल्द नेत्र चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए भारत में आज महसूस होने वाली सुस्ती, सिरदर्द या शरीर के भारीपन को ग्रहण का सीधा वैज्ञानिक प्रभाव बताना सही नहीं है.

इन लक्षणों के पीछे पानी की कमी, खाली पेट रहना, तनाव, गर्मी, नींद पूरी न होना या पहले से मौजूद माइग्रेन जैसे कारण अधिक संभावित हैं. ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है. इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं, लेकिन सूर्य को सुरक्षित तरीके से देखने और शरीर के गंभीर संकेतों को पहचानने की जरूरत जरूर है.

FAQ

क्या 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.

क्या सूर्य ग्रहण से सिरदर्द या सुस्ती होती है?
इसका कोई प्रमाणित सीधा संबंध नहीं है. पानी की कमी, खाली पेट रहना, तनाव और नींद की कमी अधिक संभावित कारण हैं.

क्या ग्रहण के दौरान खतरनाक रेडिएशन निकलता है?
नहीं, ग्रहण कोई नई रहस्यमयी radiation पैदा नहीं करता. सीधे सूर्य को देखना सामान्य दिनों की तरह ही आंखों के लिए हानिकारक है.

ग्रहण देखने के लिए कौन-सा चश्मा सुरक्षित है?
ISO 12312-2 मानक वाला eclipse viewer इस्तेमाल करना चाहिए. साधारण धूप का चश्मा सुरक्षित नहीं है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

यह भी पढ़ें- 12 अगस्त की रात सूर्य ग्रहण और अमावस्या का दुर्लभ संयोग, भारत में दिखेगा नहीं फिर भी इन 4 राशियों को क्यों रहना होगा सावधान?

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में CJP आंदोलन को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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