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शतरूपा: ब्रह्मा की 'सौ रूपों वाली' पहली स्त्री, जिनसे हुई मानव जाति की उत्पत्ति! जानिए इसका सच

Shatarupa Story: हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान ब्रह्मा ने दुनिया को जीव-जंतु से आबाद करने की इच्छा जाहिर की. तब उनके मन से प्रथम पुरुष और प्रथम स्त्री की रचना हुई, जिनका नाम मनु और शतरूपा था.

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  • मनु-शतरूपा ने पृथ्वी को आबाद किया, धर्म की स्थापना.

Origin of Shatarupa: भारतीय वैदिक पुराणों और मनुस्मृति के मुताबिक, जब ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ, तब सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा ने दुनिया को जीव-जंतु से आबाद करने की इच्छा जाहिर की. तब उनके मन से प्रथम पुरुष और प्रथम स्त्री की रचना हुई, जिनका नाम मनु और शतरूपा था.

शतरूपा के नाम का मतलब 'सौ रूपों वाली' जो दुनिया के अनंत संभावनाओं का प्रतीक है. मनु और शतरूपा ने मिलकर समस्त मानव जाति के पूर्वज और संसार पर जीवन के प्रथम जनक बने. 

दुनिया की पहली महिला शतरूपा

हिंदू धर्म के मुताबिक, दुनिया की पहली महिला शतरूपा की रचना मात्र जैविक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय थी. वह प्रकृति जो स्त्री का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि ब्रह्मा पुरुष शक्ति का प्रतीक है. उनका मिलन ऊर्जा और चेतना को दर्शाता है. 

शिव पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में मौजूद सबसे विवादास्पद व्याख्याओं में से एक यह है कि, जब शतरूपा प्रकट हुई तब उनकी सुंदरता देखकर ब्रह्मा खुद मोहित हो उठे.

जैसे-जैसे वह अलग-अलग दिशाओं में विचरण करने लगी, ब्रह्मा उनपर और ज्यादा मोहित होते गए और उन्हें निहारने के लिए उनके 4 सिर उग आए और आखिर जब वह आकाश में उड़ी तो उनका 5वां सिर भी उग गया.

यह घटना देवताओं के अंदर भी इच्छा के जन्म का प्रतीक है. भगवान शिव ने इस इच्छा को देखते हुए उनका पांचवा सिर धड़ से अलग कर दिया, जो ब्रह्मांडीय व्यवस्था बनाए रखने और सभी मनुष्यों को स्मरण कराना था कि, सृष्टि को पवित्र बनाए रखना चाहिए, इसमें आसक्ति और वासना की कोई जगह नहीं है. 

शतरूपा: ब्रह्मा की 'सौ रूपों वाली' पहली स्त्री, जिनसे हुई मानव जाति की उत्पत्ति! जानिए इसका सच

मनु-शतरूपा ने पृथ्वी को किया आबाद

इस घटना के बाद शतरूपा का मनु से दिव्य मिलन हुआ और उन्होंने मिलकर पृथ्वी को आबाद करने का काम किया. माना जाता है कि, उनकी संतानें आगे चलकर मानव जाति की पूर्वज बनीं, जिन्होंने परिवार, समाज और धर्म के सिद्धांतों की स्थापना की.

इस तरह, शतरूपा की कथा पाप या प्रलोभन की नहीं, बल्कि संतुलन, सृजन और उस पवित्र स्त्री की कहानी है, जो संसार की पहली महिला बनी. 

शतरूपा की कहानी का असली ज्ञान

शतरूपा की कहानी का प्रतीकात्मक अर्थ गहरा है. वह पृथ्वी के कई रूपों का प्रतिनिधित्व करती है. यह कथा दर्शाती है कि, दिव्य शक्तियों को भी धर्म के नियमों का पालन करना होता है. उनकी ये कथा बताती है कि, सृष्टि तभी पवित्र होती है, जब वह ज्ञान के द्वारा निर्देशित हो और स्त्री शक्ति ब्रह्मांडीय सामंजस्य के लिए काफी जरूरी है. 

पौराणिक कथाओं में शतरूपा का नाम अक्सर कम आता है, फिर भी हिंदू चिंतन में वे संपूर्ण सृष्टि की जड़ हैं. उनकी कथा से पता चलता है कि, स्त्री की शक्ति गौण नहीं, बल्कि सर्वोच्च है. शतरूपा को याद करते हुए हमें सृष्टिकर्ता और ब्रह्म शक्ति के बीच संतुलन का सम्मान करना चाहिए. 

नैमिषारण्य में मनु शतरूपा का मंदिर 

मनु-शतरूपा का मंदिर उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित नैमिषारण्य में है, मंदिर में प्रवेश करते ही मन-मस्तिष्क शांत हो जाता है. माना जाता है कि, मानव जाति की उत्पत्ति नैमिष की पवित्र धरती पर ही हुई थी. 

गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानस में मनु और शतरूपा के संदर्भ में लिखते हैं कि, शुरुआत में, वे कुछ समय तक फल-सब्जियां और कंद-मूल खाकर भगवान सच्चिदानंद की भक्ति करते थे. धीरे-धीरे उन्होंने फल-फूल को त्याग दिया. वे केवल पानी पीकर ही तपस्या करते थे. इसके बाद वे केवल वायु की सहायता ही तपस्या करते थे. 

उनकी भक्ति और कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके समक्ष प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा. 

भगवान विष्णु ने कहा, 'तुमने सालों तक तपस्या की, मैं काफी खुश हुं, तुम जो चाहते मांगो मुझसे मैं तुम्हारी सभी इच्छाओं को पूरा करूंगा.'

तब मनु ने कहा, 'भगवान मुझे आपके ही तरह एक पुत्र की कामना है. भगवान विष्णु ने उनकी इच्छाओं का सम्मान करते हुए आशीर्वाद दिया.'

उन्होंने कहा कि, 'मनु, आने वाले भविष्य में तुम अयोध्यापुरी के राजा दशरथ के रूप में जन्म लोगे और रानी शतरूपा कौशल्या बनेगी. तब मैं तुम्हारे घर राम के रूप में अवतार लूंगा, तुम्हारे एक नहीं बल्कि 4 पुत्र होंगे.'

भगवान मनु-शतरूपा और व्यास गद्दी की तपोस्थली के बाद ही नैमिष की यात्रा पूरी मानी जाती है. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

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Frequently Asked Questions

मनु और शतरूपा का मंदिर कहाँ है?

मनु और शतरूपा का मंदिर उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित नैमिषारण्य में है। माना जाता है कि मानव जाति की उत्पत्ति नैमिष की पवित्र धरती पर ही हुई थी।

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