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Nirjala Ekadashi 2026: 45°C की जानलेवा गर्मी में कैसे पूरा करें निर्जला एकादशी व्रत? जान लें ये आसान नियम और 5 उपाय

Nirjala Ekadashi 2026: जून की भीषण गर्मी और 45 डिग्री के पारे में बिना पानी के निर्जला एकादशी व्रत कैसे रखें? जानें वेदव्यास जी का वो नियम और 5 आसान उपाय जिससे आपका सबसे कठिन व्रत पूर्ण होगा.

Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा. जून की भीषण गर्मी और 45 डिग्री के पारे में बिना पानी के 24 घंटे का निर्जला एकादशी व्रत रखना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.

शास्त्रों के अनुसार, महाभारत काल में जब भीमसेन साल की सभी एकादशियां नहीं रख पा रहे थे, तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें केवल इस एक व्रत को पूरे नियम से रखने की सलाह दी थी और कहा था कि इससे सालभर के व्रतों का पुण्य मिल जाएगा.

Nirjala Ekadashi 2026: 45°C की जानलेवा गर्मी में कैसे पूरा करें निर्जला एकादशी व्रत? जान लें ये आसान नियम और 5 उपाय

लेकिन इस जानलेवा धूप में अपनी आस्था को सुरक्षित रखने के लिए आपको कुछ बेहद आसान धार्मिक और वैज्ञानिक नियमों का तालमेल बिठाना होगा, ताकि आपका व्रत बिना किसी बीमारी के आराम से पूरा हो सके.

व्रत से एक रात पहले की ये गलती, अगले दिन आपका गला सुखा देगी

इस व्रत की सफलता की शुरुआत एक रात पहले यानी दशमी की रात से ही हो जाती है. ज्यादातर श्रद्धालु गलती यह करते हैं कि व्रत शुरू होने से ठीक पहले ढेर सारा पानी पी लेते हैं, जिससे रात में ही वह पानी शरीर से बाहर निकल जाता है और अगले दिन जल्दी प्यास लगने लगती है. 

नियम यह कहता है कि दशमी की रात को आप भारी भोजन की जगह हल्का सात्विक खाना खाएं और साथ में नारियल पानी, तरबूज या खीरा लें. यह चीजें शरीर के भीतर पानी को लंबे समय तक रोककर रखती हैं, जिससे अगले दिन सूरज की तेज तपिश में भी गला सूखा नहीं रहता.

यह भी पढ़ें- Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी तिथि 2 दिन रहेगी, किस दिन करें व्रत-पूजा ? जानें सही डेट

शास्त्रों में क्यों मना है इस दिन गुस्सा करना और बार-बार थूकना?

धार्मिक नियमों के अनुसार इस व्रत में नमक और मसालेदार भोजन से दूरी बनाना अनिवार्य है, जो आपकी सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है. अगर आप व्रत से एक रात पहले बहुत ज्यादा तीखा या नमक वाला खाना खाते हैं, तो अगले दिन सुबह से ही आपको भयंकर प्यास लगने लगेगी क्योंकि नमक शरीर के पानी को सोख लेता है.

इसके साथ ही शास्त्रों में इस दिन गुस्सा करने और बार-बार थूकने की मनाही है. इसका सीधा कारण यह है कि गुस्सा करने से शरीर गर्म होता है और बार-बार थूकने से मुंह सूख जाता है, जिससे प्यास बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है.

जब प्यास बर्दाश्त से बाहर हो, तो आजमाएं यह ट्रिक

दोपहर के समय जब धूप अपने चरम पर हो और कंठ पूरी तरह सूखने लगे, तब आयुर्वेद और योग के 'शीतली प्राणायाम' का सहारा लेना चाहिए. इसके लिए अपनी जीभ को बाहर निकालकर एक पाइप की तरह गोल मोड़ लें और उसी के रास्ते ठंडी हवा को अंदर खींचें, फिर मुंह बंद करके नाक से सांस छोड़ें.

यह छोटी सी क्रिया शरीर के अंदरूनी तापमान को तुरंत ठंडा कर देती है और मुंह में थूक (लार) बनाती है, जिससे बिना पानी पिए भी प्यास का अहसास काफी हद तक शांत हो जाता है और भगवान के भजन में मन लगा रहता है.

बिना पानी पिए शरीर को अंदर से ठंडा रखने का वैज्ञानिक तरीका

जब व्रत के कड़े नियमों के कारण गले से नीचे पानी उतारना वर्जित हो, तब शास्त्रों में जल के बाहरी स्पर्श की पूरी छूट दी गई है. इस जानलेवा गर्मी में आप दिन में दो-तीन बार ठंडे पानी से नहा सकते हैं. 

अगर आप काम के सिलसिले में बाहर हैं, तो एक सूती कपड़े या पट्टी को ठंडे पानी में भिगोकर अपने माथे, गर्दन के पीछे और पैरों के तलवों पर रखें. शरीर के इन हिस्सों को ठंडा रखने से लू (हीट स्ट्रोक) का खतरा बहुत कम हो जाता है और कमजोरी की वजह से आपका व्रत टूटने की नौबत नहीं आती.

इस पावन दिन पर इन चीजों के दान से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु

इस पावन दिन पर खुद को पूरी तरह शांत रखें और धूप में बाहर निकलने या भारी मेहनत वाले कामों से बचें, क्योंकि पसीना बहने से शरीर का सारा पानी खत्म हो जाएगा. इस दिन केवल ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे. 

शास्त्रों में इस दिन मिट्टी के घड़े, खरबूजे और पंखे के दान का बड़ा महत्व बताया गया है, इसलिए घर में आराम से बैठकर प्रभु का ध्यान करें और दान की चीजें एकत्र करें, जिससे आपका मन भी लगा रहेगा और गर्मी का अहसास भी नहीं होगा.

पुराणों की वो बात, जिसे संकट के समय कभी न भूलें

आखिर में सबसे जरूरी बात यह है कि सनातन धर्म में 'प्राण रक्षा' को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. अगर दोपहर या शाम के समय आपको बहुत ज्यादा चक्कर आने लगें, आंखों के आगे अंधेरा छा जाए या धड़कन बहुत तेज हो जाए, तो अपनी जान जोखिम में डालकर जबरदस्ती व्रत न खींचें. 

ऐसी स्थिति में भगवान के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगें और तुरंत नींबू पानी या ओआरएस (ORS) का घोल पी लें, क्योंकि पुराणों में भी साफ लिखा है कि संकट के समय अपने शरीर को सुरक्षित रखना ही भगवान की असली भक्ति है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. निर्जला एकादशी पर प्यास से बचने के लिए एक रात पहले क्या करना चाहिए?
Ans: निर्जला एकादशी से एक रात पहले (दशमी की रात) भारी, तैलीय और अत्यधिक नमक वाले भोजन से पूरी तरह दूरी बना लें. नमक शरीर के पानी को सोख लेता है, जिससे अगले दिन बहुत तेज प्यास लगती है. इसकी जगह रात के भोजन में सात्विक आहार के साथ नारियल पानी, तरबूज, खीरा या पुदीने का पानी लें, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखते हैं.

Q2. यदि व्रत के दौरान भीषण गर्मी में गला बहुत ज्यादा सूखने लगे, तो क्या करें?
Ans: जब बिना पानी के कंठ सूखने लगे, तो योग और आयुर्वेद के 'शीतली प्राणायाम' का सहारा लें. इसके लिए अपनी जीभ को बाहर निकालकर पाइप की तरह गोल मोड़ें और उसी के रास्ते ठंडी हवा अंदर खींचकर नाक से सांस छोड़ें. यह क्रिया शरीर के आंतरिक तापमान को तुरंत कम करती है और मुंह में लार बनाती है, जिससे प्यास शांत होती है.

Q3. क्या निर्जला एकादशी पर शरीर को ठंडा रखने के लिए बार-बार नहा सकते हैं?
Ans: हां, शास्त्रों और विज्ञान दोनों के अनुसार व्रत के कड़े नियमों के तहत गले से नीचे पानी उतारना वर्जित है, लेकिन जल के बाहरी स्पर्श की पूरी छूट है. भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए आप दिन में दो-तीन बार ठंडे पानी से स्नान कर सकते हैं या गीले सूती कपड़े को अपने माथे, गर्दन के पीछे और पैरों के तलवों पर रख सकते हैं.

Q4. निर्जला एकादशी के दिन किन चीजों का दान करना सबसे शुभ माना जाता है?
Ans: ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी के कारण इस दिन शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं के दान का महापुण्य है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन मिट्टी के घड़े (मटके), जल से भरे कलश, खरबूजा, आम, हाथ का पंखा, सत्तू और छाते का दान करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं.

Q5. अगर अत्यधिक गर्मी के कारण तबीयत बिगड़ने लगे, तो क्या व्रत तोड़ा जा सकता है?
Ans: हां, सनातन धर्म और शास्त्रों में 'प्राण रक्षा' को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. यदि दोपहर या शाम के समय गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें, जैसे चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या धड़कन तेज होना, तो भगवान से क्षमा मांगते हुए तुरंत नींबू पानी या ओआरएस (ORS) का घोल पीकर व्रत खोल लेना चाहिए. अस्वस्थ स्थिति में जबरदस्ती शरीर को कष्ट देना शास्त्रों में वर्जित है.

यह भी पढ़ें- Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर क्या करने से प्राप्त होता है 26 एकादशियों का पुण्य ?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में CJP आंदोलन को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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