Som Pradosh Vrat 2026 Live: सोम प्रदोष व्रत की शाम न करें ये गलती, पूजा के फल से रह सकते हैं वंचित
Second Sawan Somwar 2026 Jalabhishekh LIVE Updates: सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा सोम प्रदोष का शुभ संयोग! जानें जलाभिषेक की सही विधि, 4 सबसे शुभ मुहूर्त और शिव पूजा में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां
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Sawan Second Somwar 2026: सावन माह का दूसरा सोमवार व्रत आज, 10 अगस्त 2026 को देशभर में पूरे विधि-विधान और अपार श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. इस वर्ष सावन के दूसरे सोमवार का महत्व इसलिए भी कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन सोम प्रदोष व्रत का अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार, आज आर्द्रा नक्षत्र और वज्र योग का प्रभाव रहेगा. शास्त्रों में मान्यता है कि सावन के दौरान सृष्टि का संचालन भगवान महाकाल के हाथों में होता है. ऐसे में इस दिन सच्चे मन से शिव उपासना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे मनचाहा वरदान प्राप्त होता है.
पूजा और जलाभिषेक के 4 खास शुभ मुहूर्त
आज के दिन शिव भक्तों को पूजा और अभिषेक के लिए दिनभर में 4 विशेष शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं. प्रदोष काल की पूजा का समय स्थान के अनुसार थोड़ा परिवर्तित हो सकता है.
- प्रातः पूजा मुहूर्त (अमृत चौघड़िया): सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक
- शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 09:07 बजे से 10:46 बजे तक
- सायंकाल पूजा (अमृत चौघड़िया): शाम 05:25 बजे से 07:05 बजे तक
- सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त: रात 07:05 बजे से 09:14 बजे तक
प्रदोष काल की पूजा का समय स्थान के अनुसार थोड़ा परिवर्तित हो सकता है.
शिवलिंग जलाभिषेक की प्रामाणिक विधि और मंत्र
स्मरण एवं संकल्प: प्रातः स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें. मंदिर पहुंचकर सर्वप्रथम हाथ जोड़कर नंदी महाराज और महादेव का ध्यान करें.
जल एवं पंचामृत अर्पण: तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें गंगाजल मिलाएं. इसके बाद जल में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर तथा गन्ने का रस मिलाकर शिवलिंग पर पतली व शांत धारा में अर्पित करें.
शुद्ध जल व पूजन सामग्री: पंचामृत से अभिषेक के पश्चात् पुनः स्वच्छ जल और गंगाजल चढ़ाएं. इसके बाद शिवलिंग पर अक्षत (अखंडित चावल), काले तिल, शमी पत्र, धतूरा और बेलपत्र अर्पित करें.
दीपक एवं आरती: आटे का दीपक जलाकर भोलेनाथ और माता पार्वती की भावपूर्ण आरती करें.
जल चढ़ाने का शिव मंत्र:
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् .
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः . स्नानीयं जलं समर्पयामि॥
शिव जी का मूल मंत्र: ॐ नमः शिवाय
शिव पूजा के दौरान इन 7 गलतियों से बचें
तेज धार से जल न डालें: शिवलिंग पर कभी भी ऊंचाई से या तेजी से जल न बहाएं. शांत और पतली धारा से अभिषेक करना ही सही विधि है.
अभिषेक के बाद साफ जल जरूर चढ़ाएं: दूध, दही या गन्ने का रस चढ़ाने के बाद अंत में स्वच्छ जल से शिवलिंग को साफ करना अनिवार्य है, ताकि स्वच्छता बनी रहे.
खंडित बेलपत्र न चढ़ाएं: कीड़े लगे, कटे-फटे या गंदे बेलपत्र अर्पित न करें. हमेशा स्वच्छ तीन पत्तियों वाला बेलपत्र धोकर ही चढ़ाएं.
वर्जित सामग्री का प्रयोग न करें: शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी का फूल, हल्दी और सिंदूर चढ़ाना शास्त्रों में वर्जित माना गया है.
पूरी परिक्रमा न करें: शिवलिंग की जलहरी (जल निकलने का स्थान) को कभी नहीं लांघना चाहिए. हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्र परिक्रमा) करके लौट आएं.
नंदी और शिवलिंग के मध्य न खड़े हों: नंदी और शिवलिंग के बीच का मार्ग बाधित न करें. एक तरफ खड़े होकर ही दर्शन और पूजन करें.
प्लास्टिक व कचरा मंदिर में न छोड़ें: जल की खाली बोतलें, दूध की थैलियां व प्लास्टिक मंदिर परिसर में न फेंकें. प्रकृति प्रेमी शिव की पूजा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.
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Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत का पारण कब करें
श्रावण कृष्ण त्रयोदशी 10 अगस्त को सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे तक रहेगी. 10 अगस्त की शाम प्रदोष काल में शिव पूजा और आरती करने के बाद रात में व्रत जारी रखें. 11 अगस्त को सूर्योदय के बाद स्नान, भगवान शिव की पूजा और प्रार्थना करके व्रत खोल सकते हैं.
Som Pradosh Vrat 2026 LIVE: प्रदोष काल पूजा में शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाएं
शिव पूजा के समय इन सामग्री को शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है.
- हल्दी
- कुमकुम या सिंदूर
- तुलसी दल
- केतकी का फूल
- चंपा का फूल
- टूटे बेलपत्र






















