Sawan Durga Ashtami 2026: सावन तो शिव का महीना है, फिर 20 अगस्त को क्यों होगी मां दुर्गा की पूजा ?
Durga Ashatmi 2026: सावन में शिव जी के अलावा मां दुर्गा की पूजा का खास महत्व है, शत्रु बाधा, भय, रोग, दोष से मुक्ति पाने के लिए सावन दुर्गाष्टमी की शाम कैसे करें माता की पूजा देखें.

Durga Ashatmi 2026: वैसे तो सावन शिव जी का महीना है लेकिन इस माह में देवी की उपासना के लिए दुर्गाष्टमी का दिन बहुत खास माना जाता है. 20 अगस्त को आज सावन दुर्गाष्टमी है. सावन के दौरान शिव और शक्ति दोनों की उपासना करने वालों को जीवन में तमाम सुख, सुविधा प्राप्त होती है और कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलने की मान्यता है.
सावन दुर्गाष्टमी का क्या महत्व है?
श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का महीना माना जाता है, लेकिन इस पूरे माह में शक्ति उपासना का भी अपना महत्व है. सावन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर आने वाली दुर्गाष्टमी देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित मानी जाती है. मासिक दुर्गाष्टमी का संबंध देवी शक्ति की आराधना से है, इसलिए इस दिन साधक अपनी श्रद्धा के अनुसार मां दुर्गा का पूजन, मंत्र जाप और व्रत कर सकते हैं.
धार्मिक दृष्टि से देवी दुर्गा को शक्ति, साहस और दुष्ट शक्तियों के विनाश की अधिष्ठात्री माना गया है. इसलिए दुर्गाष्टमी की पूजा में केवल किसी भौतिक इच्छा की पूर्ति ही नहीं, बल्कि अपने भीतर आत्मबल, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने की भावना भी रखी जाती है.
सावन दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा से क्या लाभ मिलता है?
मान्यता है कि देवी की आराधना करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है. भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और जीवन में मंगल की कामना करते हैं.
शाम को कैसे करें पूजा
सूर्यास्त के बाद स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें. मां काली की तस्वीर या प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं. इसके बाद धूप अर्पित करें और मां को लाल या गुड़हल के फूल चढ़ाएं.
माता को फल, मिठाई या अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें. इसके बाद मां काली का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें. ॐ क्रीं कालिकायै नमः इस मंत्र का अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जाप किया जा सकता है. इसके बाद मां काली की आरती करें और जीवन से भय, बाधा और नकारात्मकता दूर करने की प्रार्थना करें.
सावन दुर्गाष्टमी पर कैसे करें मां दुर्गा की पूजा?
- सुबह स्नान करके पूजा स्थान को साफ करें. इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें. सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें और फिर देवी का ध्यान करें.
- मां को लाल या पीले पुष्प, अक्षत, रोली, कुमकुम और फल अर्पित किए जा सकते हैं.
- चुनरी और श्रृंगार सामग्री भी चढ़ा सकते हैं. इसके बाद देवी को मिठाई या घर में बना सात्विक भोग अर्पित करें.
- पूजा के दौरान ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप किया जा सकता है. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. पूरा पाठ संभव न हो तो दुर्गा चालीसा या देवी स्तुति का पाठ भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है.
- मां दुर्गा की आरती करें और परिवार के सुख, स्वास्थ्य, शांति और मंगल के लिए प्रार्थना करें.
सावन दुर्गाष्टमी पर किन बातों का रखें ध्यान?
- स्वास्थ्य अनुकूल न हो तो फलाहार या सात्विक भोजन के साथ भी देवी की उपासना की जा सकती है.
- पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें.
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दुर्गाष्टमी की पूजा में भय या दिखावे के बजाय श्रद्धा, संयम और सद्भाव का भाव रखा जाए.
- किसी के अहित के उद्देश्य से ये कार्य न करें.
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