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राखी पर चंद्र ग्रहण बताकर डराया जा रहा है! समय बदलने से पहले पढ़ें पूरा सच

रक्षाबंधन 2026 (Raksha Bandhan) पर चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) की खबर से भ्रमित न हों. जानिए भारत में ग्रहण दिखाई देगा या नहीं, सूतक लगेगा या नहीं और राखी बांधने का सही समय.

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन की तैयारियों के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से फैल रहा है, इस बार राखी पर चंद्र ग्रहण लगेगा, सूतक के कारण पूजा नहीं होगी और राखी बांधने का समय बदलना पड़ेगा. कुछ पोस्ट में तो पूरे दिन को अशुभ तक बताया जा रहा है.

लेकिन क्या वास्तव में 28 अगस्त 2026 को भारत में ग्रहण दिखाई देगा? क्या यहां सूतक माना जाएगा? आइए डर और अधूरी जानकारी से अलग पूरा सच समझते हैं.

क्या रक्षाबंधन पर सचमुच चंद्र ग्रहण है?

हां, खगोलीय गणना के अनुसार 27-28 अगस्त 2026 की रात आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा. इसलिए यह कहना पूरी तरह गलत नहीं है कि रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण एक ही तारीख पर पड़ रहे हैं. लेकिन सिर्फ तारीख एक होने से भारत में ग्रहण के धार्मिक नियम लागू नहीं हो जाते.

असल बात ग्रहण की दृश्यता है. NASA और पंचांग के अनुसार 28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका तथा यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा.

भारत ये ग्रहण दिखाई नहीं देगा. चंद्र ग्रहण के समय भारत में दिन होगा और चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देगा. गौर करने वाली बात ये है कि NASA के अगस्त 2026 स्काईवॉचिंग में भी इसकी दृश्यता अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में बताई गई है.

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क्या भारत में सूतक लगेगा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण का सूतक सामान्यतः उसी स्थान पर माना जाता है, जहां ग्रहण प्रत्यक्ष दिखाई देता हो. यदि किसी क्षेत्र में ग्रहण दिखाई ही नहीं दे रहा, तो वहां उसके सूतक और पूजा-पाठ संबंधी प्रतिबंध लागू नहीं माने जाते.

इस आधार पर भारत में इस चंद्र ग्रहण का सूतक मान्य नहीं होगा. मंदिर बंद करने, भोजन रोकने या रक्षाबंधन की पूजा स्थगित करने जैसी बातों से घबराने की जरूरत नहीं है.

हालांकि विदेश में रहने वाले लोगों को अपने शहर की ग्रहण-दृश्यता और स्थानीय समय जरूर देखना चाहिए, क्योंकि अमेरिका तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में स्थिति अलग रहेगी.

राखी की सही तारीख और समय क्या है?

इस वर्ष 2026 में रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त को प्रातः लगभग 9:48 बजे तक रहेगी. इसलिए 28 अगस्त की सुबह राखी बांधना सबसे उपयुक्त माना जा रहा है.

शहर के सूर्योदय में अंतर होने के कारण मुहूर्त की शुरुआत कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है. उदाहरण के लिए दिल्ली में लगभग सुबह 5:57 से 9:48 बजे, नोएडा में 5:56 से 9:48 बजे और मुंबई में 6:23 से 9:48 बजे तक राखी का समय रहेगा. इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखना चाहिए.

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फिर भ्रम क्यों फैल रहा है?

भ्रम की सबसे बड़ी वजह यह है कि सोशल मीडिया पोस्ट में केवल 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण लिखा जा रहा है, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि ग्रहण कहां दिखाई देगा. किसी खगोलीय घटना की तारीख पूरी दुनिया के लिए एक हो सकती है, लेकिन उसका स्थानीय समय और दृश्यता हर देश में समान नहीं होती.

ग्रहण वाली राखी, सूतक में भूलकर भी न बांधें राखी और पूरा दिन अशुभ जैसे दावे इसी अधूरी जानकारी से पैदा हो रहे हैं.

आखिर क्या करें?

भारत में रहने वाले लोग 28 अगस्त की सुबह स्थानीय पंचांग से समय मिलाकर सामान्य रूप से रक्षाबंधन मना सकते हैं. यहां ग्रहण दिखाई न देने के कारण सूतक का डर दिखाकर राखी का समय बदलना उचित नहीं है. हां, पूर्णिमा तिथि सुबह ही समाप्त हो रही है, इसलिए देर करने के बजाय प्रातःकाल राखी बांधना बेहतर रहेगा.

याद रखिए, इस बार सावधानी ग्रहण से नहीं, वायरल हो रही अधूरी जानकारी से रखने की जरूरत है.

यह भी पढ़ें- Raksha Bandhan 2026: राखी से पहले कब लगेगी पूर्णिमा, भद्रा और शुभ मुहूर्त को लेकर क्या रहेगा गणित?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.

वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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