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Rambha Tritiya 2026: रंभा तीज क्या है, जून में कब ? स्त्रियां क्यों करती है इस दिन शिव-पार्वती की पूजा

Rambha Tritiya 2026: रंभा तीज 17 जून 2026 को है. ये व्रत सुखी वैवाहिक जीवन और सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए किया जाता है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व है.

Rambha Tritiya 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन देवी स्वरूप स्त्रियां अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं, इसे रंभा तीज व्रत कहा जाता है, जो 17 जून 2026 को किया जाएगा.

मान्यता है कि जो अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की कामना के साथ इस व्रत का पालन करती हैं उनके जीवन में तमाम मनोकामनाओं की पूर्ति शीघ्र होती है. धार्मिक ग्रंथों में इस व्रत को शुभ फल देने वाला और जीवन में मंगलकारी परिवर्तन लाने वाला बताया गया है. रंभा तीज के दिन पूजा का मुहूर्त क्या है, क्यों इसे रंभा नाम दिया गया.

रंभा तीज 2026 मुहूर्त

 ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 16 जून, मंगलवार के दिन रात में 12 बजकर 53 मिनट पर होगा. अगले दिन यानी 17 जून, बुधवार को रात में 9 बजकर 49 मिनट तक तृतीय तिथि समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 17 जून को ही रंभा तीज का व्रत किया जाएगा.

रंभा तीज नाम कैसे  पड़ा

रंभा को स्वर्गलोक की अत्यंत रूपवान, कलात्मक और आकर्षक अप्सराओं में गिना जाता है. मान्यता है कि उन्होंने भी अपने जीवन में शुभता, सौभाग्य और मनचाहे सुख की प्राप्ति के लिए इस तृतीया तिथि पर श्रद्धा के साथ व्रत और शिव पार्वती जी की पूजा की थी. उनके इसी तप और आराधना से जुड़ी कथा के कारण इस पर्व को रंभा तृतीया या रंभा तीज के नाम से जाना जाने लगा. माना जाता है कि यह व्रत जीवन में सौभाग्य, दांपत्य सुख और शुभ फल की कामना से किया जाता है.

रंभा तीज व्रत पूजा विधि

  • रंभा तीज के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • मन में श्रद्धा रखते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें.
  • पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से करें, ताकि सभी कार्य निर्विघ्न पूरे हों.
  • इसके बाद शिवलिंग और माता पार्वती को जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें.
  • फिर चंदन, अक्षत, पुष्प, बिल्वपत्र, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.
  • माता पार्वती को सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उन्हें चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
  • इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित कर ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ गौर्यै नमः मंत्रों का जप करें. पूजा के दौरान रंभा तीज व्रत कथा का श्रवण या पाठ भी करें.
  • कर्पूर से आरती करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि तथा सौभाग्य की प्रार्थना करें.
  • प्रसाद सभी में बांटें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करें.
  • व्रत का पालन दिनभर नियमपूर्वक करें. यदि निर्जला या पूर्ण उपवास संभव न हो,
  • तो फलाहार कर सकते हैं और दूध या फलों के रस का सेवन कर सकते हैं.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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