धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे के बाद बदला गया पोर्टफोलियो? BJP ने दिया जवाब
धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से पूरी तरह हटाने के बजाय उनका पोर्टफोलियो बदलने की खबरों का बीजेपी ने पूरी तरह खंडन किया है. संबित पात्रा ने इस दावे को बेबुनियाद करार दिया है.

केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से पूरी तरह हटाने के बजाय उनका पोर्टफोलियो बदलने का प्रस्ताव की खबरों का बीजेपी ने पूरी तरह खंडन किया है. बीजेपी सांसद और पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस दावे को बेबुनियाद करार दिया है. संबित पात्रा ने कहा, "मैं यह साफ करना चाहता हूं कि एक प्रतिष्ठित अख़बार में छपी यह रिपोर्ट पूरी तरह से बेबुनियाद, काल्पनिक और निराधार है. एक आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर मैंने यह बात साफ तौर पर कही है. किसी भी तरह का भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए."
इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि आशुतोष रांका और सौरव दास के नेतृत्व वाले CJP प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था और साफ कर दिया था कि वे शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे के अलावा किसी और विकल्प को स्वीकार नहीं करेंगे.
बता दें कि शनिवार को CJP नेताओं की केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत का तीसरा दौर खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद CJP ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस लिया. CJP और केंद्र सरकार के बीच पहली बातचीत 20 जुलाई को हुई, जब CJP जंतर-मंतर से 'संसद चलो' मार्च निकाल रहा था.
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि उनके फोन ले लिए गए थे और उन्हें नजरबंद कर दिया गया था, जबकि प्रतिनिधिमंडल को नड्डा के घर पर 10 मिनट की मीटिंग के लिए 2 घंटे इंतजार करना पड़ा. नड्डा को सौंपे गए ज्ञापन में CJP ने तीन मुख्य मांगें रखीं थी. पहली सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई (जिन्हें जंतर-मंतर से पुलिस ने हिरासत में लेकर सफदरजंग अस्पताल भेजा था, उस समय वे भूख हड़ताल पर थे) दूसरी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाना और तीसरी NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देना.
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई सुलह
एक दिन बाद दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया. आखिरकार सरकार मान गई और बातचीत का तीसरा और आखिरी दौर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुआ. यहां सरकार CJP की सभी मांगें मानने को तैयार हो गई, जिसमें दिल्ली और NDA-शासित राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना भी शामिल था.
विपक्ष का प्रदर्शन
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में विपक्ष के नेताओं ने छात्रों पर ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों को लेकर विरोध जताया. विपक्ष और NDA के बीच यह टकराव ऐसे समय में हुआ, जब संसद में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स अमेंडमेंट बिल, 2026' पर चर्चा होनी थी. इस बिल का मकसद NEET विवाद के बाद देश में पेपर लीक रोकने वाले कानूनों को और सख्त बनाना है.
ये भी पढ़ें
करूर भगदड़: मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को आज SC में चुनौती देगी विजय सरकार























