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Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक के गुरु भैरवैक्य मंदिर की क्या है खासियत, आज पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक दौरे के दौरान आज पीएम नरेंद्र मोदी ने आदिचुनचनगिरी में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का लोकार्पण किया. क्या है इस मंदिर की खासियत, इस मंदिर को किसी याद में बनाया गया है देखें.

PM narendra Modi, Guru Bhairavaikya Mandira: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कर्नाटक दौरे पर मांड्या जिले के आदिचुनचनगिरी में आज श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया. गुरु भैरवैक्य मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, तपस्या और आध्यात्मिक एकत्व का प्रतीक है. ये मंदिर श्री श्री श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की स्मृति में बनाया गया है. क्या है इसकी खासियत आइए जानते हैं.

कौन हैं गुरु भैरवैक्य

भैरवैक्य शब्द का अर्थ है भैरव में लीन होना या भैरव के साथ एकत्व पाना है. ये मंदिर क्षेत्र की प्राचीन शैव परंपरा से जुड़ा हुआ है. भगवान भैरव को शिव का गण माना जाता है. यहां पीएम ने पूजा अर्चना की.ये मंदिर श्री श्री श्री बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी की पावन स्मृति में निर्मित किया गया है, जो आदिचुंचनगिरी मठ के 71वें पीठाधीश्वर थे. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी को उनके व्यापक समाजसेवा कार्यों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है.

बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी का इतिहास

श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी का जन्म 1945 में कर्नाटक में हुआ था. बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता, सेवा और अनुशासित जीवन की ओर था. कम उम्र में ही वे आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ से जुड़ गए और गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शिक्षा व साधना प्राप्त की. उनके नेतृत्व में मठ ने केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार किया.

श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर की विशेषता

  • श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर पारंपरिक द्रविड़ शैली में बनाया गया है.
  • इस मंदिर के निर्माण में लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत आई है, जो इसकी भव्यता और स्थापत्य कला को दर्शाता है.
  • पारंपरिक द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित इस मंदिर की स्थापना महान संत के जीवन और विरासत के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप की गई है.
  • आदिचुंचनगिरी मठ को एक सिद्ध पीठ माना जाता है, जहां साधकों ने वर्षों तक तप कर आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त कीं.
  • यहां की ऊर्जा और वातावरण को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है, जिसके कारण देशभर से श्रद्धालु और साधक यहां दर्शन और साधना के लिए आते हैं.
  •  इसे दक्षिण भारत के प्राचीन सिद्ध पीठों में विशेष स्थान मिला है. यह स्थान साधना, तपस्या और गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण माना गया है.
  • वर्तमान समय में इस मठ का नेतृत्व श्री श्री श्री निर्मलानंदनाथ स्वामीजी कर रहे हैं, जो 72वें पीठाधीश्वर हैं.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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