मान्यताओं के अनुसार, वराह अवतार राहु से जुड़ा है और मंगल की ऊर्जा को धारण करता है. यहां दर्शन करने से आर्थिक तनाव कम होता है और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है.
प्रॉपर्टी विवाद से हैं परेशान? मैसूर का भूवराह स्वामी मंदिर दिलाएगा मुक्ति! जानिए मंदिर का चमत्कारी अनुष्ठान?
Bhuvaraha Swami Temple: भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भूवराह स्वामी का एक ऐसा मंदिर जहां दर्शन करने से प्रॉपर्टी संबंधी समस्याओं से राहत मिलता है. जानिए इस खास मंदिर से अनोखी परंपरा और अनुष्ठान का राज?

Bhuvaraha Swami Temple: क्या आपको भी प्रॉपर्टी ढूंढने में दिक्तत हो रही है या घर बनाते वक्त बार-बार किसी न किसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो ऐसे में मैसूर के भूवराह स्वामी मंदिर के दर्शन करने जरूर जाए.
यह मंदिर भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह को समर्पित है. मान्यताओं के मुताबिक यहां दर्शन करने से जमीन से जुड़े विवाद, संपत्ति और गृह निर्माण संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
हालांकि एक लोकप्रिय मान्यताओं के मुताबिक, वराह अवतार राहु से जुड़ा है और मंगल की ऊर्जा की ऊर्जा को धारण करता है. मंदिर के मुख्य देवता भूवरहनाथ स्वामी कृष्णाशिला नामक एक दुर्लभ काले पत्थर से तराशे गए हैं. करीब 14 फीट ऊंची उनकी प्रतिमा हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचती है.
मंदिर से जुड़ी लोकप्रिय मान्यताएं
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, जब कभी भी कोई समस्या सताती है, तो ज्यादातर श्रद्धालु भूवराह स्वामी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. इनमें प्रमुख समस्याएं संपत्ति में देरी या बार-बार निर्माण कार्य में बाधाओं से जुड़ी होती है.
मंदिर में एक विशेष अनुष्ठान जिसका नाम है, ईंट पूजा. मंदिर में श्रद्धालु ईंट पूजा करने के बाद उनका इस्तेमाल निर्माण कार्यों के लिए करते हैं. ऐसा करने से निर्माण कार्य में आ रही देरी या संपत्ति विवाद की समस्या दूर होती है.
वराह भगवान का यह मंदिर भूमि से जुड़े कानूनी मामलों को सुलझाने में भी सहायक माना जाता है. कुछ भक्तों के मुताबिक, यहां नियमित रूप से प्रार्थना करने पर आर्थिक तनाव कम होने के साथ सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
मंदिर से जुड़ा अभिषेकम अनुष्ठान
मंदिर में ईंट पूजा अनुष्ठान के अलावा एक अन्य प्रभावशाली अभिषेकम अनुष्ठान भी शामिल है. इस अनुष्ठान में भूवराहनाथ स्वामी की विशाल कृष्णाशिला प्रतिमा को दूध, दही, शहद, नींबू, गन्ने का रस, गंगाजल, चंदन, हल्दी और कुमकुम जैसी सामग्रियों से स्नान कराते हैं.
मंदिर से जुड़ी परंपराएं
विष्णु अवतार भगवान वराह का यह मंदिर वैष्णव धर्म की थेनकलई परंपरा का अनुसरण करता है. मंदिर में मुख्य त्योहारों और खाकर वराह जयंती के मौके पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है. इन दिनों में अग्नि अनुष्ठान के साथ विशेष तरह के मंत्रोच्चार भी किए जाते हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Frequently Asked Questions
इस मंदिर से कौन सी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं?
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