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Mahakumbh 2025: कुंभ मेला में जब तैमूर लंग ने हमला किया तो उसके साथ क्या हुआ?

तैमूर लंग ने दिल्ली में घुसते ही मौत का नंगा नाच शुरु कर दिया. दिल्ली की गलियां लाशों से पट गईं. यमुना का पानी लाल पड़ गया. दिल्ली के बाद उसने हरिद्वार का रुख किया, जहां कुंभ मेला लगा था. फिर क्या हुआ जानते हैं कुंभ गाथा में

Kumbh Mela: कुंभ चल रहा है था. वैशाखी का पर्व था. दिल्ली में तैमूर के कत्लेआम से पूरी तरह से बेखबर लाखों श्रद्धालु हरिद्वार कुंभ मेला में गंगा स्नान कर रहे थे. गुनगुनी धूप के बीच साधुओं की टोलियां गंगा स्नान कर लौट रहीं थी. महिलाएं भजन गा रही थीं. बुजुर्ग नदी के किनारे बैठकर ध्यान लगा रहे थे. छोटे बच्चे रेत में अटखेलियां कर रहे थे. कुछ बच्चे अपने पिता के कंधे पर बैठकर कुंभ मेले को निहार रहे थे. कुंभ के मेले में भक्ति चरम पर थी. निरंजनी, जूना और पंचाग्नि अखाड़े की पताका आसमान में लहरा रही थी. स्नान के बाद साधु इन आखड़ों में माथे पर चंदन तिलक लगा रहे थे....जटाओं को बांध रहे थे. ब्रह्मांण में देव गुरु बृहस्पति कुंभ राशि में गोचर कर रहे थे. ग्रहों के राजा सूर्य, मेष राशि में प्रवेश कर चुके थे. कुंभ मेला पूरे सवाब पर था. समूचा मेला सनातन धर्म में डूबा हुआ था. किसी को अंदेशा भी नहीं था कि दिल्ली में खून की होली खेलकर लौट रहा तैमूर उनकी तरफ तेजी चला आ रहा था.

तैमूर बड़ा जुल्मी था. उसके हृदय में करुणा नहीं थी. जब उसकी तलवार उठती तो रक्त से सराबोर होने के बाद ही वापिस म्यान में जाती थी. म्यान से जब भी उसकी तलवार बाहर आती तो बड़े पैमाने पर कत्लेआम करती. वो मौत बनकर अपने शत्रुओं पर झपटता था. तैमूर लंग की आत्मकथा 'तुजुक-ए-तैमूरी' से भारत पर हमले और यहां के कत्लेआम के बारे में चौकाने वाली जानकारी मिलती है.


Mahakumbh 2025: कुंभ मेला में जब तैमूर लंग ने हमला किया तो उसके साथ क्या हुआ?

हिंदुस्तान में जिस तरह से उसने कत्लेआम किया, उससे लगता है कि उसके दिल में हिंदुओं के लिए कितनी नफरत थी. कत्लेआम करते हुए उसकी तलवार किसी पर रहम नहीं करती थी. महिला, बच्चे और बूढ़े...उसकी तलवार किसी को नहीं छोड़ती थी. यही कारण है कि तैमूर इतिहास का सबसे क्रूरतम आक्रांता माना जाता है.

सर डेविड प्राइस अपनी किताब 'मेमॉएर्स ऑफ़ द प्रिंसिपल इवेंट्स ऑफ़ मोहमडन हिस्ट्री' में तैमूर की क्रूरता के बारे में बताते हैं. वे लिखते हैं कि- 'तैमूर की सेना पलक झपकते ही लाशों के ढ़ेर लगाने में परांगत थी. दिल्ली में तैमूर करीब 15 दिन तक रहा और यहां रह रहे लोगों के सिर पर मौत बनकर नाचता रहा.' तैमूर के बारे में कहा जाता है कि भारत में वो करीब तीन महीने तक रहा और इस दौरान उसने लगभग 30 हजार हिंदुओं का कत्ल किया, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. दिल्ली में रक्तपात और लूटपाट करने के बाद तैमूर ने सेना को मेरठ की तरफ कूच करने का आदेश दिया.

मेरठ से पहले तैमूर की सेना 'लोनी' के पास रुकी. यहां उसने एक लाख के करीब हिंदुओं को बंदी बनाया और कत्लेआम किया. उसके बाद वो हरिद्वार की तरफ बढ़ा. सन् 1398, उस समय यहां पर कुंभ का मेला लगा था. कुंभ स्नान के बाद मेले में आए लोग दोपहर का भोजन ग्रहण कर रहे थे. अखाड़ों के तंबुओं में साधु-संत और श्रद्धालु सुस्ता रहे थे. कुछ नींद में थे तो कुछ सामूहिक रुप से भजन कीर्तन में व्यस्त थे. उधर तैमूर तीसरे पहर की नमाज अदा कर जैसे ही उठता है, उसका एक मुखबिर उसके कानों में कुछ बुदबुदता है. तैमूर अपनी आत्मकथा 'तुजक-ए-तैमूर' या 'मलफूजात-ए-तैमूर' में एक जगह लिखता है, 'मुझे मेरे खुफिया लोगों ने खबर दी कि यहां से दो कोस की दूरी पर कुटिला घाटी में काफी संख्या में हिंदू लोग अपनी पत्‍‌नी और बच्चों के साथ जमा हैं, उनके साथ काफी धन-दौलत एवं पशु हैं, तो यह खबर सुनकर मैं की नमाज अदा कर अमीर सुलेमान के साथ दर्रा-ए-कुटिला की ओर रवाना हुआ'. पुरातत्ववेत्ता कनिंघम 'कु-पि-ला' को 'कोह-पैरी' यानि 'पहाड़ की पैड़ी' या 'हरि की पैड़ी' का उल्लेख मानते हैं. इतिहास से पता चलता है कि हरिद्वार में तैमूर ने कुंभ के दौरान भयंकर कत्लेआम किया था.


Mahakumbh 2025: कुंभ मेला में जब तैमूर लंग ने हमला किया तो उसके साथ क्या हुआ?

कुंभ में निहत्थे हिंदुओं की हत्या कर तैमूर ने जमकर लूटपाट की. मंदिरों को तोड़ा, मूर्तियों को खंडित किया. इस कृत्य से नागा साधु क्रोधित हो गए. कुंभ में लाशों को ढ़ेर और बच्चों और महिलाओं की चीखें सुनकर नागा साधुओं ने शस्त्र उठा लिए. भगवान शिव के भक्त कहलाने वाले नागा संतों ने तैमूर से जमकर लोहा लिया. बताते हैं कि हरिद्वार के पास ज्वालापुरी में तैमूर के साथ भयंकर युद्ध हुआ. तैमूर को नागा साधुओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. शरीर पर भभूत, हाथों में चिमटा, फरसा और कुल्हाड़ी के साथ नागा साधुओं के तीव्र गुस्से से तैमूर भयभीत हो गया. ये प्रदर्शन और रोष उसकी कल्पना से परे था. कुंभ में तैमूर को ऐसे अनुभव हुए जिससे वो बुरी तरह से डर गया. एक मंदिर पर जब उसने आक्रमण किया तो मूर्ति से सांप-बिच्छुओं का झुंड निकल आया जिससे तैमूर की सेना में भगदड़ मच गई. नागा साधुओं ने तैमूर को वापिस लौटने के लिए विवश कर दिया.

यह भी पढ़ें- Mahakumbh 2025: महाकुंभ से जुड़ी 10 बड़ी बातें, जो इसे बनाती है दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह- वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य। मीडिया रणनीतिकार। डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता पर कार्य कर रहे एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABPLive.com में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को आधुनिक जीवन की दिशा में बदलने वाले संकेतों के रूप में प्रस्तुत करते हैं. हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभव ज्योतिषी हैं.

इन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC, New Delhi) से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप और धार्मिक ब्रांडिंग के विशेषज्ञ हैं.

प्रसिद्ध भविष्यवाणियां जो समय के साथ सच साबित हुईं- IPL 2025 के विजेता की पूर्व घोषणा. हनी सिंह की वापसी और संगीत सफलता. भारत में AI नीति बदलाव की अग्रिम भविष्यवाणी. डोनाल्ड ट्रंप की पुनः राष्ट्रपति पद पर वापसी और उसके बाद के निर्णय. पुष्पा 2: द रूल की बॉक्स ऑफिस सफलता और अल्लू अर्जुन के करियर ग्राफ.

शेयर बाजार क्रैश 2025 और दिल्ली की मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का सटीक पूर्वानुमान. क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू और लोकप्रियता का संकेत. ये सभी भविष्यवाणियां शुद्ध वैदिक गणना, गोचर, दशा-अंतरदशा और मेदिनी ज्योतिषीय विश्लेषण पर आधारित थीं, जिन्हें समय ने सत्य सिद्ध किया.

विशेषज्ञता के क्षेत्र: वैदिक ज्योतिष, संहिता, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु. करियर, विवाह, शिक्षा, लव लाइफ, बिज़नेस, हेल्थ के लिए ग्रहों और मनोविज्ञान का समन्वित विश्लेषण. कॉर्पोरेट नीति, ब्रांड रणनीति और मीडिया कंटेंट प्लानिंग में ज्योतिषीय हस्तक्षेप. डिजिटल धर्म पत्रकारिता और गूगल रैंकिंग के अनुकूल धार्मिक कंटेंट का निर्माण करने में ये निपुण हैं.

उद्देश्य: 'ज्योतिष को भय या भाग्य का उपकरण नहीं, बल्कि जीवन के लिए बौद्धिक और आध्यात्मिक सहारा बनाना' हृदेश कुमार सिंह का मानना है कि ज्योतिष केवल प्रश्नों का उत्तर नहीं देता, वह सही समय पर साहसिक निर्णय लेने की दिशा दिखाता है.

अन्य रुचियां: फिल्मों की संरचनात्मक समझ, संगीत की मनोवैज्ञानिक गहराई, साहित्यिक दर्शन, राजनीति की परख. बाजार की समझ और यात्राओं से अर्जित मानवीय अनुभव ये सभी उनके लेखन में एक बहुस्तरीय अंतर्दृष्टि जोड़ते हैं. उनकी रुचियां केवल विषयगत नहीं, बल्कि उनके हर लेख, भविष्यवाणी और रणनीति को संवेदनशीलता और संस्कृति से जोड़ने वाली ऊर्जा हैं.

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