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Kaila Devi: कैला देवी में चैत्र नवरात्रि मेला शुरू, यहां बिना बिजली के अनोखे तरीके से होते हैं माता के दर्शन

Kaila Devi Mandir: राजस्थान के करौली में कैला देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि मेले का आगाज हो चुका है. इस मंदिर का इतिहास और यहां दर्शन करने की परंपरा बेहद निराली है.

Kaila Devi Mandir, Chaitra Navratri Mela 2026: चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से होगा लेकिन इससे पहले राजस्थान के करौली के केला देवी मंदिर में नवरात्रि मेला 16 मार्च से शुरू हो गया है. मां कैला देवी के दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा है. कैला देवी मंदिर में दर्शन बहुत अदभुत तरीके से होते हैं क्योंकि यहां गर्भग्रह में बिजली नहीं है. आइए जानते हैं कैला देवी मंदिर का इतिहास और भक्त कैसे करते हैं माता के दिव्य दर्शन.

कैला देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि मेला 2026 शुरू

कैला देवी मंदिर में 16 मार्च से 1 अप्रैल यानी 15 दिन तक चैत्र नवरात्रि मेला रहेगा. यहां लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा करके माता के दर्शन के लिए आते हैं

कई भक्त कांवड़ या ध्वजा लेकर पदयात्रा करते हैं. मंदिर ट्रस्ट और पुलिस प्रशासन ने भक्त की सुविधा के लिए यहां व्यापक इंतजाम किए हैं. दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए रैंप, 11 व्हीलचेयर और 5 ई-रिक्शा तैनात किए गए हैं. भीड़ नियंत्रण के लिए 12 इमरजेंसी गेट बनाए गए हैं.

बिजली नहीं, दीपक की लौ में होते हैं दर्शन

मां केला देवी मंदिर में सालों से एक विचित्र परंपरा निभाई जाती है. यहां माता के गर्भगृह में किसी प्रकार की बिजली की व्यवस्था नहीं है. दीपक की लौ में भक्त माता के दर्शन करते हैं. इस दिव्य धाम में ये अनूठी परंपरा आकर्षण का केंद्र है.

श्रीकृष्ण और माता कैला का गहरा नाता

यह मंदिर भगवान कृष्ण के अवतार से जुड़ी अपनी आकर्षक कथा के लिए भी प्रसिद्ध है. माँ कैलादेवी मंदिर को आदिम शक्ति, महायोगिनी माया के अवतार के रूप में पूजा जाता है, स्कंद पुराण के अनुसार, कैलादेवी उसी देवी महा योगिनी महामाया का एक रूप हैं, जिन्होंने नंदा और यशोदा के घर में जन्म लिया था और बाद में भगवान कृष्ण को प्रतिस्थापित किया था.

कैला देवी मंदिर का इतिहास

  • यह मंदिर यदुवंशी राजाओं की कुलदेवी माना जाता है.
  • कैलादेवी प्रतिमा की स्थापना 1114 ईस्वी में महात्मा केदार गिरि ने की थी.
  • 1116 ईस्वी में राजा मुकुंद दास खींची ने यहां लघु मंदिर का निर्माण कराया. इसके बाद करौली के यदुबंशी शासकों ने मंदिर की सार-संभाल की जिम्मेदारी संभाली
  • करौली के राजा गोपाल सिंह ने वर्ष 1723 में इस मंदिर का पुनः निर्माण करवाया.यहां माता कैला के साथ मां चामुंडा जी की प्रतिमा भी स्थापित है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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