Hanuman Jayanti: हनुमान जयंती और उनसे जुड़ी सात प्रचलित भ्रांतियां
Hanuman Jayanti 2025: हनुमान जयंती की तिथि को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां प्रचलित हैं, जिससे कभी-कभी असमंजस और विवाद उत्पन्न हो सकता है.इन विषयों को शास्त्रीय आधार पर स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे.

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती का पर्व आज 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है. हनुमान जयंती की तिथि को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां प्रचलित हैं, जिससे कभी-कभी असमंजस और विवाद उत्पन्न हो सकता है. आज हम इन विषयों को शास्त्रीय आधार पर स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे.
पहली भ्रांति: तिथि भेद
स्कन्द पुराण में लिखा है—
“यो वै चैकादशी रुद्रो हनुमान स महाकपि.
अवतीर्णः सहायार्थ विष्णोः अमित तेजसः॥”
(महेश्वर खंड, केदार महात्म्य 8.100)
इसमें लिखा है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन शिव के ग्यारहवें रुद्र ने हनुमान के रूप में विष्णु की सहायता हेतु जन्म लिया.
उत्सव सिंधु के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास में हुआ था—
“ऊर्जस्य चासिते पक्षे स्वात्यां भौमे कपीश्वरः.
मेषलग्नेऽञ्जनीगर्भात् शिवः प्रादुरभूत् स्वयम्॥”
अर्थ— कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, मंगलवार, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में अंजनी के गर्भ से स्वयं शिव हनुमान के रूप में प्रकट हुए.
आनंद रामायण (सार कांड 13.162–163) में—
“चैत्रे मासि सिते पक्षे हरिदिन्यां मघाभिधे.
नक्षत्रे स समुत्पन्नो हनुमान् रिपुखण्डनः॥
महाचैत्रीपूर्णिमायां समुत्पन्नोऽञ्जनीसुतः.
वदन्ति कल्पभेदेन बुधाः इत्यादि केचन॥”
अर्थ— चैत्र शुक्ल पक्ष में मघा नक्षत्र में हनुमान जी का जन्म हुआ. कुछ विद्वान कल्पभेद के कारण चैत्र पूर्णिमा को उनका जन्म मानते हैं.
अलग-अलग शास्त्रों में तिथियां भिन्न हैं, पर यह भिन्नता कल्प भेद के कारण है. अगस्त्य संहिता और व्रत रत्नाकर में भी कार्तिक मास का उल्लेख मिलता है. इसलिए कहीं-कहीं हनुमान जयंती दो बार (चैत्र और कार्तिक) मनाई जाती है.
इनमें से कोई भी तिथि गलत नहीं है.
सभी शास्त्र इस बात पर सहमत हैं कि हनुमान जी शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं.
दूसरी भ्रांति: केसरी पुत्र या वायु पुत्र?
हनुमान जी केसरी और अंजना के पुत्र थे, लेकिन उन्हें वायु देव और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त था.
अंजना जी ने दोनों की तपस्या की थी, इसलिए वे वायु पुत्र और शंकर सुवन भी कहलाए.
तीसरी भ्रांति: “शंकर सुवन” या “शंकर स्वयं”?
हनुमान चालीसा में “शंकर सुवन केसरी नंदन” लिखा है.
शिव पुराण में भी हनुमान जी को शिव का अंश (पुत्र) बताया गया है—
“सर्वथा सुखिनं चक्रे सरामं लक्ष्मणं हि सः.
सर्वसैन्यं ररक्षासौ महादेवात्मजः प्रभुः॥”
अर्थ— महादेव के पुत्र हनुमान जी ने श्रीराम और लक्ष्मण सहित पूरी सेना की रक्षा की.
हनुमान जी शिव के पूर्ण अवतार नहीं, बल्कि अंश अवतार (ग्यारहवें रुद्र) हैं.
इसलिए “शंकर सुवन” और “शंकर स्वयं”— दोनों भावों में स्वीकार्य हैं.
चौथी भ्रांति: मारुति अथवा हनुमान?
बाल्यकाल में हनुमान जी का नाम मारुति था.
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब इंद्र के वज्र से उनकी ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी, तब उनका नाम “हनुमान” पड़ा.
पांचवीं भ्रांति: शिक्षा कहां तक थी?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार—
हनुमान जी अत्यंत विद्वान थे.
उन्हें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और व्याकरण का पूर्ण ज्ञान था.
छठी भ्रांति: हनुमान जयंती या हनुमान जन्मोत्सव?
“जयंती” शब्द केवल मृत व्यक्तियों के लिए नहीं होता.
यह शास्त्र सम्मत शब्द है और “जन्मोत्सव” का पर्यायवाची है.
अग्नि पुराण में भगवान कृष्ण के जन्म को भी “जयंती” कहा गया है.
इसलिए “हनुमान जयंती” कहना पूर्णतः उचित है.
सातवीं भ्रांति: जनेऊ और मंगलवार पूजा
हनुमान चालीसा में “कंधे मूंज जनेऊ साजे” का उल्लेख है.
“हनुमदुपासना कल्पद्रुम” में इसका प्रमाण मिलता है—
“चैत्रे मासि सिते पक्षे पौर्णमास्यां कुजेऽहनि.
मौञ्जीमेखलया युक्तं कौपीनपरिधारकम्॥”
अर्थ— चैत्र पूर्णिमा, मंगलवार के दिन यज्ञोपवीत धारण किए हुए हनुमान जी का जन्म हुआ.
इसी कारण मंगलवार को हनुमान जी की पूजा विशेष मानी जाती है.
बजरंगबली बल के प्रतीक हैं. हनुमान जयंती पर उनकी उपासना करके आप अपने शारीरिक और मानसिक बल में वृद्धि कर सकते हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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