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Apara Ekadashi 2026: क्या एकादशी व्रत में एलोपैथी दवाईयां खा सकते हैं ?

Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी 13 मई को है. एकादशी व्रत में खाने को कई नियम हैं जिनका पालन करने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है. क्या एकादशी व्रत में दवाई खा सकते हैं जान लें.

Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी 13 मई को है. पुराणों के अनुसार एकादशी व्रत निर्जल या फलाहार दोनों तरह से रखा जा सकता है. इस दिन अन्न खाने की मनाही होती है. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत न सिर्फ शारीरिक लाभ बल्कि आध्यात्मिक विकास के लिए भी रखा जाता है. चूंकि ये सभी व्रत में श्रेष्ठ है इसलिए इसके नियम भी अलग है.

एकादशी व्रत सभी अपनी मान्यता अनुसार करते हैं लेकिन जो लोग एकादशी व्रत करते हैं क्या वह उपवास के दिन एलोपैथी दवाई खा सकते हैं या नहीं. शास्त्र क्या कहते हैं आइए जानते हैं.

क्या एकादशी व्रत में एलोपैथी दवाईयां खा सकते हैं ?

अगर आप प्रतिदिन दवाईयों का सेवन कर रहे हैं, तो एकादशी व्रत करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरुर लें. विज्ञान के अनुसार सभी एलोपैथी दवाईयां शाकाहारी नहीं होती है.कुछ दवाईयों में जिलेटिन, ग्लिसरीन आदि तत्व हो सकते हैं जिन्हें पशुओं से बनाया जाता है. चूंकि इस व्रत में अन्न, मांसाहर का त्याग किया जाता है ऐसे में जो लोग एकादशी व्रत कर रहे हैं वह उस दिन एलोपैथी दवाईयां खाने से बचें. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप जो गोलियां ले रहे हैं वे शाकाहारी हों.

व्रत में स्वास्थ्य की अनदेखी करना शास्त्रसम्मत नहीं है. धार्मिक दृष्टि से व्रत का उद्देश्य श्रद्धा और संयम है, न कि स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना. शरीर स्वस्थ रहेगा तभी पूजा-पाठ और भगवान की भक्ति सही ढंग से की जा सकती है इसलिए जरूरत पड़ने पर व्रत के दौरान दवा लेना अनुचित नहीं माना जाता.

एकादशी व्रत में खाने के नियम

Apara Ekadashi 2026: क्या एकादशी व्रत में एलोपैथी दवाईयां खा सकते हैं ?

एकादशी व्रत करने के लाभ

  • मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से पापों का क्षय होता है.
  • भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है.
  • मन में भक्ति, सकारात्मकता और शांति बढ़ती है.
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.
  • व्रत से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है.
  • तनाव और नकारात्मक विचारों में कमी आती है.
  • ध्यान और एकाग्रता बेहतर होती है.
  • पाचन तंत्र को आराम मिलता है.
  • शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है.
  • उपवास से अनुशासन और संयम की आदत विकसित होती है.
  • पूजा, जप और ध्यान से आत्मिक ऊर्जा बढ़ती है.
  • व्यक्ति के भीतर धैर्य और सहनशीलता का विकास होता है.
  • जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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