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Devshayani Ekadashi 2026: एकादशी तिथि आज सुबह 9.13 से लग जाएगी, व्रत कब रखा जाएगा, पंचांग से जानें

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9.13 पर शुरू हो जाएगी.व्रत 25 जुलाई को है लेकिन एकादशी तिथि शुरू होने के बाद ये कार्य भूलकर भी न करें.

Devshayani Ekadashi 2026: साल की प्रमुख एकादशियों में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है. इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं. इसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाते हैं और विष्णु जी पाताल लोक में योगनिद्रा में चले जाते हैं. देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को है.

कब शुरू होगी देवशयनी एकादशी तिथि

पंचांग की गणना अनुसार आषाढ़ माह की एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर शुरू हो रही है. 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी. 11 जून 2026 को उदयातिथि में एकादशी तिथि पड़ने के कारण गुरुवार को ही व्रत रखा जाएगा. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार 25 जुलाई 2026 को उदयातिथि में एकादशी होने से व्रत शनिवार को रखा जाएगा.

देवशयनी एकादशी तिथि शुरू होने के बाद न करें ये काम

एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह संयम, सात्विकता और भगवान विष्णु की भक्ति का पर्व है, इसलिए आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि लगते ही कुछ कार्यों से परहेज करें.अगर इन नियमों का पालन नहीं किया जाए तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता.

देवशयनी एकादशी व्रत भले ही 25 जुलाई को रखा जाएगा लेकिन 24 जुलाई से ही व्रत के नियमों का पालन करें. जानते हैं कि एकादशी शुरू होते ही किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

  • दशमी तिथि के दिन से ही सात्विक और हल्का भोजन करना चाहिए और तामसिक आहार, मसालेदार भोजन से दूरी बनानी चाहिए, ताकि एकादशी तिथि के समय पेट में अन्न न रहे.
  • व्रती को एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. देर तक सोना या आलस्य करना इस दिन उचित नहीं माना गया है.
  • एकादशी तिथि के शुरू होने से लेकर व्रत पारण तक ब्रह्मचर्य का पालन विशेष रूप से करें. मन, वचन और कर्म से संयम रखें. नकारात्मक विचार मन में न लाएं.
  • एकादशी के दिन केवल भोजन का ही नहीं, बल्कि व्यवहार का भी संयम जरूरी है. क्रोध करना, कटु वचन बोलना, झूठ कहना या किसी का अपमान करना व्रत के पुण्य को कम करता है.
  • एकादशी तिथि की शुरुआत से समाप्त तक घर में चावल न बनाएं. एकादशी तिथि जब विद्यमान हो तो चावल नहीं खाना चाहिए. भले ही व्रत  इससे दोष लगता है.

देवशयनी एकादशी पूजा मुहूर्त - सुबह 7.21 - सुबह 9.03

व्रत पारण समय - 26 जुलाई 2026 को सुबह 05:39 से सुबह 08:22 के बीच किया जाएगा

देवशयनी एकादशी पर विष्णु जी को कैसे सुलाएं

एकादशी व्रत वाले दिन विष्णु जी की विधिवत पूजा करें. फिर इस मंत्र को बोले ये श्रीहरि को शयनकाल में जाने से पहले का प्रार्थना मंत्र.

सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्.

विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत् सर्वं चराचरम्॥

अर्थ - हे जगन्नाथ! आपके शयन करने पर समस्त चराचर जगत भी विश्राम की अवस्था में आ जाता है और आपके जागने पर पुनः संपूर्ण सृष्टि जागृत होकर अपने कार्यों में प्रवृत्त होती है. आप योगनिद्रा में विराजमान होकर संसार का कल्याण करें.

(FAQ)

प्रश्न 1. देवशयनी एकादशी 2026 का व्रत कब रखा जाएगा?
उत्तर: देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा, क्योंकि इसी दिन उदयातिथि में एकादशी रहेगी.

प्रश्न 2. देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे शयन कराएं?
उत्तर: भगवान विष्णु की पूजा के बाद "सुप्ते त्वयि जगन्नाथ..." प्रार्थना मंत्र का पाठ करें और उन्हें योगनिद्रा में विराजमान होने की प्रार्थना करें.

प्रश्न 3. देवशयनी एकादशी तिथि लगते ही क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर: तामसिक भोजन, चावल का सेवन, क्रोध, झूठ, अपमान और ब्रह्मचर्य भंग से बचना चाहिए तथा सात्विक जीवनचर्या अपनानी चाहिए.

Devshayani Ekadashi 2026: देव सोने के बाद क्या बदल जाते हैं श्रीकृष्ण की पूजा के नियम ? शास्त्रों क्या कहते हैं

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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