Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी पर घर की इस दिशा में रख दें 'तुलसी का दीपक'; बंद किस्मत के ताले भी खुलेंगे, नोट कर लें सही नियम
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी पर तुलसी के पास किस दिशा में घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है? जानें दीपक की सही संख्या, पूजा नियम, परिक्रमा, मंत्र जाप और धार्मिक मान्यताएं.

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और यहीं से चातुर्मास का शुभारंभ होता है. इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु के साथ माता तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है.
देवशयनी एकादशी पर तुलसी के पास विधि-विधान से घी का दीपक जलाने और मंत्र जाप करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. लेकिन, यह धार्मिक मान्यताओं पर आधारित परंपराएं हैं और इन्हें श्रद्धा एवं आस्था के साथ ही अपनाया जाता है.
देवशयनी एकादशी पर तुलसी के पास किस दिशा में जलाएं दीपक?
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी का पौधा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है. अगर आपके घर में तुलसी पहले से किसी अन्य स्थान पर स्थापित है, तो उसे बिना उचित कारण स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं है. ऐसे में उसी स्थान पर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है.
अगर दीपक रखने की बात करें तो शुद्ध घी का दीपक तुलसी के समीप इस प्रकार रखें कि पूजा श्रद्धा और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो. ईशान कोण को सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक उन्नति और शुभता का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इस दिशा में दीपदान करने की परंपरा विशेष फलदायी मानी जाती है.
कितने दीपक जलाना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी की संध्या में तुलसी के पास घी के दीपक जलाना विशेष शुभ माना गया है. आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार 11 दीपक, 21 दीपक, 51 दीपक जला सकते हैं.
इस दिन दीपदान करने से भगवान विष्णु और माता तुलसी की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में आने वाली आर्थिक बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं. लेकिन, दीपकों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति का भाव माना गया है.
एकादशी के दिन तुलसी में जल क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, एकादशी के दिन माता तुलसी भी व्रत रखती हैं. इसी कारण इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने से बचने की सलाह दी जाती है.
इस दिन केवल:
- दीपक जलाएं.
- धूप-अगरबत्ती अर्पित करें.
- भगवान विष्णु का स्मरण करें.
- तुलसी को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त करें.
अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर तुलसी को पुनः जल अर्पित किया जा सकता है.
दीपदान के बाद करें यह आसान उपाय:
दीपक जलाने के बाद तुलसी माता की 11 या 21 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. परिक्रमा करते समय भगवान विष्णु का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक यह मंत्र जपें—
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
इस मंत्र का जाप मन को शांत करता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है. नियमित रूप से श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करने से आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव भी किया जा सकता है.
देवशयनी एकादशी पर इन बातों का भी रखें ध्यान:
- पूजा के लिए शुद्ध घी का दीपक उपयोग करें.
- दीपक सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि कोई दुर्घटना न हो.
- तुलसी के आसपास स्वच्छता बनाए रखें.
- पूजा के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान और भक्ति भाव बनाए रखें.
- अगर अधिक दीपक जलाना संभव न हो तो एक दीपक भी पूर्ण श्रद्धा से जलाया जा सकता है.
क्या कहते हैं धार्मिक विश्वास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर तुलसी के पास घी का दीपक जलाना, परिक्रमा करना और भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करना शुभ फलदायी माना जाता है. ऐसा करने से घर में सकारात्मक वातावरण, सुख-शांति और समृद्धि का वास होने की मान्यता है. साथ ही, भक्तों का विश्वास है कि इस दिन किए गए पूजा-पाठ का विशेष पुण्य प्राप्त होता है.
लेकिन, ये सभी बातें धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार ही अपनाना चाहिए.
FAQs
Q1. क्या देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना शुभ माना जाता है?
उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए. अगर पूजा के लिए तुलसी दल की आवश्यकता हो, तो उसे एक दिन पहले ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना बेहतर माना जाता है.
Q2. देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होने का क्या महत्व है?
उत्तर: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है. इस अवधि में पूजा-पाठ, व्रत, दान और सात्विक जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व बताया गया है.
Q3. क्या देवशयनी एकादशी पर शाम के समय ही पूजा करना जरूरी है?
उत्तर: नहीं. भगवान विष्णु की पूजा दिन में भी की जा सकती है, लेकिन तुलसी के पास दीपदान और संध्या आरती का विशेष महत्व माना जाता है. इसलिए अधिकांश श्रद्धालु शाम के समय दीपक जलाकर पूजा करना शुभ मानते हैं.
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