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Datia: दतिया सिर्फ राजनीति नहीं, मां पीतांबरा की नगरी भी है…जानिए यहां की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान

Datia Pitambara Peeth: दतिया की राजनीति के अलावा इस नगरी की पहचान का सबसे बड़ा आधार यहां का पीतांबरा पीठ है. दतिया का पीतांबरा पीठ पूरे देश में प्रसिद्ध है आखिर क्या है इसका महत्व जान लें.

Datia Pitambara Peeth: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर नरोत्तम मिश्रा की जगह बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया है. नाम की घोषणा होने के बाद से गूगल पर दतिया ट्रेंड कर रहा है.

दतिया जिला अक्सर अपनी राजनीतिक गतिविधियों और ऐतिहासिक विरासत के कारण चर्चा में रहता है, लेकिन इस नगर की सबसे बड़ी पहचान इसकी आध्यात्मिक और धार्मिक परंपरा है. दतिया को पूरे देश में मां पीतांबरा की नगरी के रूप में जाना जाता है.

मां पीतांबरा की नगरी है दतिया

दतिया राजनीति के अलावा यहां सिद्ध शक्तिपीठ होने के कारण भी प्रसिद्ध है. दतिया में मां बगलामुखी का पीतांबरा पीठ 51 शक्तिपीठों में शामिल नहीं है, लेकिन यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित तांत्रिक शक्ति साधना केंद्रों में से एक माना जाता है. बड़े बड़े राजनेता यहां मां का आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं आइए जानते हैं क्या है दतिया के पीतांबरा पीठ का धार्मिक महत्व और मान्यताएं.

जानकारी के अनुसा इस नगर का नाम शिशुपाल के भाई दन्तवक्त्र के नाम पर पड़ा जो कि कालान्तर में दतिया नाम से प्रसिद्ध हुआ.

दतिया के पीतांबरा पीठ का धार्मिक महत्व

दतिया के पीतांबरा पीठ की अधिष्ठात्री देवी मां पीतांबरा (मां बगलामुखी) हैं, जो दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं. यहां मां धूमावती का मंदिर भी है. यहां दूर-दूर से लोग तांत्रिक साधना, शत्रु बाधा निवारण कोर्ट-कचहरी में सफलता, राजनीतिक विजय और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए पूजन करने आते हैं. नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि और विशेष तांत्रिक मुहूर्तों में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की दर्शन के लिए भीड़ लगती है.

किसने की स्थापना ?

दतिया में पीतांबरा पीठ की स्थापना श्री स्वामीजी महाराज ने सन् 1935 में की थी. स्वामीजी महाराज एक सिद्ध संत और शक्तोपासक थे. धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्वामीजी महाराज को मां बगलामुखी की कृपा प्राप्त थी और उनके निर्देश पर इस पीठ की स्थापना की गई. कहा जाता है कि पूर्व में यहां श्मशान था. 

Datia: दतिया सिर्फ राजनीति नहीं, मां पीतांबरा की नगरी भी है…जानिए यहां की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान

कौन हैं मां बगलामुखी

मध्ये सुधाब्धि-मणिमण्डप-रत्नवेदी-

सिंहासनोपरिगतां परिपीतवर्णाम्.

पीताम्बराभरण-माल्य-विभूषिताङ्गीं

देवीं स्मरामि धृतमुद्गर-वैरिजिह्वाम्॥

अर्थात - मैं उस पीतवर्णा देवी का ध्यान करता हूं, जो अमृत सागर के मध्य रत्नमंडप में सिंहासन पर विराजमान हैं, पीतांबर धारण किए हुए हैं, पीले आभूषणों और मालाओं से विभूषित हैं तथा एक हाथ में मुद्गर (गदा) और दूसरे हाथ से शत्रु की जिह्वा को पकड़े हुए हैं.

मां बगलामुखी की पूजा के लाभ

  • मां बगलामुखी को शत्रु बाधा से रक्षा करने वाली देवी हैं.
  • वाणी पर नियंत्रण मिलता है.
  • न्याय और विजय के लिए इनकी पूजा अचूक है
  • इनकी आराधना से विरोधियों की नकारात्मक योजनाएं निष्फल होती है
  • सही पक्ष को मजबूती और निर्णय का सामना करने का आत्मविश्वास मिलता है.

बड़े-बड़े राजनेता लगा चुके हैं हाजिरी

दतिया के पीतांबरा पीठ पर राजनेताओं का तातां लगा रहता है. इंदिरा गांधी, वसुंधरा राजे सिंधिया, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, राहुल गांधी, और अन्य नेता भी यहां मां की विशेष पूजा-अर्चना कर चुके हैं. कई बड़े नेताओं ने अपने संकट के समय में यज्ञ करवाया है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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