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Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को सुबह 6.20 से लग जाएगा सूतक काल, चंद्र ग्रहण कब से कब तक रहेगा देखें

Chandra Grahan 2026 Time: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा जो भारत में भी दिखेगा. भारत में अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय अनुसार ग्रहण दिखाई देगा. भारत में ग्रहण की अवधि कुल 25 मिनट की होगी.

Chandra Grahan 2026 Time: साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च 2026 को लगेगा. यह खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होगा. यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में दिखाई देगा.

3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह भारत में नजर आएगा और इसका सूतक काल भी प्रभावी रहने वाला है. ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता रहेगी.यह एक आंशिक (खण्डग्रास) चंद्रग्रहण होगा, इस दौरान चन्द्रमा सिंह राशि में रहेंगे, जहां पहले से छाया ग्रह केतु विराजमान हैं. दोनों की युति और चंद्र ग्रहण का प्रभाव कुछ राशि वालों पर नकारात्मक असर डाल सकता है.

3 मार्च को चंद्र ग्रहण का समय

3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा. जयपुर में चंद्र उदय शाम 6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा. ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा. ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा.

भारत में सूतक :- प्रातः 06:20 बजे इसका सूतक प्रारम्भ हो जायेगा.

भारत में चंद्रग्रहण की कुल अवधि 25 मिनट

भारत में यह चंद्रग्रहण ग्रस्तोदय रुप में दिखाई देगा यानी जब भारत में चंद्रमा उदित होंगे तब तक चंद्रमा को ग्रहण लग चुका होगा. इसलिए यह ग्रस्तोदय रुप में दिखाई देगा. भारत में इस चंद्रग्रहण का प्रारंभ, मध्य यानी खग्रास नहीं देखा जा सकेगा. भारत में स्थानीय चंद्रोदय से ही इस ग्रहण का आरंभ माना जाएगा.

भारत में जिस समय चंद्रोदय होगा उस समय चंद्रग्रहण समाप्त होने वाला होगा यानी भारत में चंद्रग्रहण समापन के समय ही दिखाई देगा. भारत में चंद्रग्रहण की कुल अवधि 25 मिनट की होगी. दरअसल, भारतीय समय अनुसार 3:20 मिनट पर ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा और शाम में 6:47 मिनट पर समाप्त हो जाएगा.

चंद्र ग्रहण की परिस्थितियाँ (भारतीय मानक समय)

उपच्छाया प्रवेश - दोपहर 02:13

  • ग्रहण प्रारम्भ (स्पर्श) - दोपहर 03:20,
  • पूर्णता प्रारम्भ - सायं 04:34, ग्रहण

मध्य - सायं 05:05

  • पूर्णता समाप्त : सायं 05:33,
  • ग्रहण समाप्त (मोक्ष) :- सायं 06:48

उपच्छाया अन्त : सायं 07:55

  • ग्रहण ग्रासमान (परिमाण) - 1.15
  • ग्रहण की अवधि - 03 घंटे 28 मिनट
  • पूर्णता की अवधि - 59 मिनट

कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण

साल का पहला चंद्र ग्रहण एशिया, भारत, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में नजर आएगा. अर्जेण्टीना, पैराग्वे के कुछ हिस्से, बोलीविया, ब्राजील, ग्रीनलैंड और उत्तरी अटलांटिक महासागर में उपच्छाया प्रवेश का प्रारम्भिक चरण चन्द्रास्त के समय दिखाई देगा। रूस, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिंद महासागर में ग्रहण की उपच्छाया का अन्त चन्द्रोदय के समय दिखाई देगा.

अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय अनुसार दिखेगा चंद्रग्रहण

  • दिल्ली में चंद्रोदय शाम में 6:22 मिनट पर होगा जिसके बाद ही ग्रहण भारत के शहरों में दिखाई देगा. ऐसे में भारत में चंद्रग्रहण की कुल अवधि 25 मिनट की ही रहेगी.
  • भारत के बाकी शहरों में चंद्रोदय के समय के अनुसार, ग्रहण दिखने की अवधि अलग-अलग हो सकती है लेकिन, दिल्ली में चंद्रोदय के अनुसार, महज 25 मिनट ही ग्रहण दिखाई देगा.
  • पूर्वी उत्तर राज्यों में ग्रहण दिखने की अवधि करीब 59 मिनट की होगी.
  • जयपुर में चंद्र ग्रहण - चन्द्रोदय: सायं 06:29, ग्रहण अवधि: 18 मिनट, यहाँ पर ग्रहण की उपच्छाया का अन्त दिखाई देगा.
  • उदयपुर में चंद्र ग्रहण - चन्द्रोदय: सायं 06:39, ग्रहण अवधि: 08 मिनट, यहाँ पर ग्रहण की उपच्छाया का अन्त दिखाई देगा.

साल 2026 में 2 चंद्र ग्रहण

साल में दो चंद्र ग्रहण होंगे, लेकिन इनमें से केवल एक ही भारत में दिखाई देगा. पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन पड़ेगा, जबकि दूसरा श्रावण पूर्णिमा को लगेगा। लेकिन भारत में केवल 3 मार्च का चंद्र ग्रहण ही देखा जा सकेगा. 28 अगस्त का ग्रहण भारत से दृश्य नहीं होगा, इसलिए देश में सिर्फ एक ही चंद्र ग्रहण का प्रत्यक्ष दर्शन होगा.

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पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक 'डॉक्टर अनीष व्यास' देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य हैं. पाल बालाजी के भक्त के रूप में इन्हें जाना जाता है. वैदिक ज्योतिष पर इनका कार्य सराहनीय है. इनकी भविष्यवाणियां काफी सटीक होती हैं. इनके लेख विभिन्न मंचों पर प्रकाशित होते रहते हैं, इन्हें भविष्यफल और दैनिक राशिफल बताने में महारत प्राप्त है. इन्हें हस्तरेखा और वास्तु विशेषज्ञ के रूप में भी जाना जाता है. देश के अलावा विदेशों में भी उनके काफी संख्या में फॉलोअर्स है. सोशल मीडिया पर भी यह एक्टिव रहते हैं.  इनकी अब तक 497 से अधिक भविष्यवाणियां सच साबित हो चुकी हैं.डॉक्टर अनीष व्यास को बचपन से ही कर्मकांड और ज्योतिष की शिक्षा-दीक्षा विरासत में प्राप्त हुई. एम.ए. पत्रकारिता में गोल्ड मेडल प्राप्त कर पीएचडी की उपाधि हासिल कर चुके हैं. डॉ. अनीष व्यास के ज्योतिष विषय पर आधारित लेख देश के प्रमुख समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं. इसके साथ ही विभिन्न न्यूज चैनल में लाईव शो में प्रतिभाग करते रहते हैं.
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