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Holashtak and Chandra Grahan 2026: होलाष्टक के आखिरी दिन चंद्र ग्रहण, राहु बिगाड़ सकता है बना बनाया खेल, ऐसे बचें

Holashtak 2026: होलाष्टक के आखिरी दिन फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया है. ये संयोग खतरनाक माना जा रहा है. ऐसे में राहु बना बनाया खेल बिगाड़ सकता है. ऐसे में किन बातों का ध्यान रखें यहां जानें.

Holashtak and Chandra Grahan 2026: इस साल होलाष्टक का आरंभ 24 फरवरी से होगा, जिसका समापन 3 मार्च 2026 को होगा. पुराणों के अनुसार होलाष्टक को अशुभ अवधि माना जाता है. ये 8 दिन बहुत खतरनाक होते हैं क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक में सारे ग्रह उग्र हो जाते हैं और व्यक्ति पर इसका  विपरीत प्रभाव पड़ता है. यही वजह है कि होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.

हालांकि होलाष्टक में ग्रहों की अशुभता से बचने के लिए जप-तप, देवी-देवताओं का पूजन करने की सलाह दी जाती है लेकिन इस बार होलाष्टक के आखिरी दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है, ऐसे में किन बातों का विशेष ध्यान रखें जान लें.

होलाष्टक में चंद्र ग्रहण का साया

इस साल होलाष्टक के आखिरी दिन फाल्गुन पूर्णिमा पर यानी होलिका दहन वाले दिन 3 मार्च 2026 मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरु होगा और शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. कुल मिलाकर 3 घंटे 27 मिनट तक ये ग्रहण रहेगा. ये भारत में भी दिखेगा. इसका सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा.

होलाष्टक में चंद्र ग्रहण कितना खतरनाक

मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक का संबंध राक्षसी शक्तियों से जुड़ा हुआ है. होलाष्टक के आठ दिनों तक नकारात्मक ऊर्जा बेहद सक्रिय रहती हैं.

वहीं बात करें चंद्र ग्रहण की तो हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ माना जाता है. चंद्र ग्रहण के दिन राहु का प्रभाव रहता है. इस समय ग्रहण दोष बनता है जो बेवजह के डर और नकारात्मकता के कारण स्वास्थ्य व रिश्तों को प्रभावित करती है. होलाष्टक के 8 दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रहते हैं.

राहु से बचकर रहना होगा

  • होलाष्टक के आखिरी दिन यानी होलिका दहन पर लग रहा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा. खास बात ये है कि होलाष्टक के आखिरी दिन फाल्गुन पूर्णिमा रहती है. इस दिन राहु उग्र रहता है.
  • साथ ही चंद्र ग्रहण के दिन भी राहु की नकारात्मकता बढ़ जाती है.चंद्रमा मन का कारक है और राहु भ्रम का. दोनों की युति से मन में बेचैनी, तनाव और भय पैदा होता है.
  • ऐसे में डिप्रेशन, अनावश्यक डर, निर्णय लेने की क्षमता में कमी, मानसिक तनाव, वैवाहिक जीवन में विवाद आदि की समस्या बढ़ सकती हैं. इनसे बचने के लिए फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) पर कुछ खास उपाय जरुर करें.

होलाष्टक और चंद्र ग्रहण की अशुभता से कैसे बचें

फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण है, ग्रहण में देवी-देवताओं की पूजा, दान आदि नहीं किए जाते हैं लेकिन राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए इस दिन भगवान विष्णु के मंत्र नमो भगवते वासुदेवाय का जाप और हवन करें. उनकी कृपा से आपका मंगल होगा.

  • होलाष्टक के दौरान नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करें.
  • हनुमान चालीसा या हनुमान बाहुक का पाठ करें.
  • भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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