हिंदी न्यूज़लाइफस्टाइलधर्मबागपत के जैन मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नया ड्रेस कोड लागू, जींस-टॉप और स्कर्ट में एंट्री बैन!
बागपत के जैन मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नया ड्रेस कोड लागू, जींस-टॉप और स्कर्ट में एंट्री बैन!
Baghpat: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के प्रसिद्ध श्री पार्श्वनाथ प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं के लिए शालीन पहनावे को लेकर नई पहल शुरू की है. जानिए मंदिर का नया आदेश?
Written By : राजीव पंडित | Edited By: Ankur Agnihotri | Updated at : 30 Apr 2026 07:45 PM (IST)
Baghpat Shri Parshvanath Jain Temple: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक अहम और चर्चित मामला सामने आया है. श्री पार्श्वनाथ प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं के लिए शालीन पहनावे को लेकर नई पहल शुरू की है.
मंदिर परिसर में लगाए गए बोर्ड ने स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का भी ध्यान खींचा है. मंदिर समिति ने स्पष्ट अपील की है कि श्रद्धालु भारतीय संस्कृति के अनुरूप वस्त्र पहनकर ही मंदिर में प्रवेश करें.
बोर्ड में जींस-टॉप, स्कर्ट, बरमूडा और हाफ पैंट जैसे आधुनिक परिधानों से परहेज करने को कहा गया है. साथ ही महिलाओं और बालिकाओं से सिर ढककर मंदिर में आने की अपील भी की गई है.
परंपरा और गरिमा बनाए रखने की पहल
मंदिर प्रबंधन समिति का कहना है कि यह निर्णय किसी की स्वतंत्रता को सीमित करने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है, बल्कि धार्मिक स्थल की गरिमा, अनुशासन और परंपराओं को बनाए रखने के लिए है.
समिति के अनुसार, ऐसे छोटे-छोटे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि इस पहल को श्रद्धालुओं का समर्थन भी मिल रहा है. कई लोगों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर शालीनता बनाए रखना हमारी परंपरा का हिस्सा है और नियमों का पालन करना जरूरी है.
मंदिर समिति के प्रबंधक तरुण चंद जैन ने कहा, “मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मर्यादा में रहकर आएं. आजकल कई लोग छोटे कपड़े और हाफ पैंट पहनकर मंदिर आ जाते हैं, जिससे समाज में अच्छा संदेश नहीं जाता. सभी को अपने अनुसार कपड़े पहनने की स्वतंत्रता है, लेकिन मंदिर में मर्यादित वस्त्र पहनकर आना जरूरी है.”
श्रद्धालुओं ने किया फैसले का समर्थन
श्रद्धालु निहारिका जैन ने मंदिर के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “मैं इस निर्णय का स्वागत करती हूं और सभी महिला-पुरुषों से अनुरोध करती हूं कि नियमों का पालन करें. मंदिर में जो स्वीकार्य नहीं है, उसका उल्लंघन न करें. इससे हमारी संस्कृति सुरक्षित रहेगी. मैं खुद इस नियम का पालन कर रही हूं.”
धार्मिक स्थलों की मर्यादा पर जोर
एक अन्य श्रद्धालु ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि जैसे गुरुद्वारों में सिर ढकना और मस्जिदों में टोपी पहनना जरूरी होता है, वैसे ही जैन मंदिर में भी श्रद्धालुओं को मर्यादा का पालन करना चाहिए.
उनका कहना है कि मंदिर में अच्छी भावना के साथ प्रवेश करना चाहिए और वहां के लिए एक निर्धारित पहनावा होना जरूरी है. हाफ पैंट, जींस या अशोभनीय कपड़ों में मंदिर आना उचित नहीं है और यह धार्मिक माहौल के विपरीत है.
संस्कृति और अनुशासन का संदेश
मंदिर समिति की यह पहल अब चर्चा का विषय बन गई है. जहां एक ओर इसे संस्कृति और अनुशासन को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है, वहीं यह नई पीढ़ी को धार्मिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में भी एक प्रयास माना जा रहा है.
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Frequently Asked Questions
श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पहनावे को लेकर क्या नियम लागू किए गए हैं?
मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं से भारतीय संस्कृति के अनुरूप वस्त्र पहनकर आने की अपील की है। जींस-टॉप, स्कर्ट, बरमूडा और हाफ पैंट जैसे परिधानों से परहेज करने को कहा गया है।
महिलाओं और बालिकाओं के लिए क्या विशेष निर्देश हैं?
महिलाओं और बालिकाओं से सिर ढककर मंदिर में आने की अपील की गई है, ताकि धार्मिक स्थल की गरिमा बनी रहे।
मंदिर प्रबंधन समिति ने यह निर्णय क्यों लिया है?
यह निर्णय धार्मिक स्थल की गरिमा, अनुशासन और परंपराओं को बनाए रखने के लिए लिया गया है, न कि किसी की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए।
श्रद्धालुओं की इस पहल पर क्या प्रतिक्रिया है?
अधिकांश श्रद्धालुओं ने इस पहल का समर्थन किया है, उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों पर शालीनता बनाए रखना हमारी परंपरा का हिस्सा है।
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