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Ashtami Shraddha 2026: अष्टमी श्राद्ध 3 अक्टूबर को, लेकिन मृत्यु की तारीख अलग थी… फिर इसी दिन श्राद्ध क्यों?

Ashtami Shraddha 2026: अष्टमी श्राद्ध 3 अक्टूबर 2026 को है. मृत्यु की अंग्रेजी तारीख अलग होने पर भी श्राद्ध इसी दिन क्यों होता है? समझें हिंदू तिथि और तारीख का अंतर.

Ashtami Shraddha 2026: मृत्यु प्रमाणपत्र में कोई दूसरी तारीख लिखी है, लेकिन घर में 3 अक्टूबर को श्राद्ध की तैयारी हो रही है. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब निधन उस दिन हुआ ही नहीं था, तो श्राद्ध उसी दिन क्यों? क्या तारीख चुनने में गलती हुई है?

जरूरी नहीं. पितृ पक्ष में श्राद्ध का दिन मृत्यु की अंग्रेजी तारीख से नहीं, उस समय की हिंदू तिथि से तय होता है. इस साल यानी वर्ष 2026 में अष्टमी श्राद्ध शनिवार 3 अक्टूबर को है. अष्टमी तिथि पर दिवंगत हुए परिजनों का पितृ पक्ष का श्राद्ध इस दिन किया जाता है, भले ही उनकी मृत्यु किसी दूसरे महीने में हुई हो.

परिवार को तारीख याद है, फिर पंचांग क्यों देखें?

हम किसी अपने के निधन का दिन आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर से याद रखते हैं. लेकिन उसी दिन पंचांग में एक हिंदू तिथि भी चल रही होती है. श्राद्ध के लिए उसी का मिलान करना होता है.

मान लीजिए, किसी परिजन की मृत्यु जून में हुई थी. यदि मृत्यु के समय अष्टमी तिथि थी, तो पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध अष्टमी को होगा. जून की तारीख आने का इंतजार नहीं किया जाएगा.

यहीं एक और बात समझनी जरूरी है. किसी महीने की 8 तारीख का अर्थ अष्टमी नहीं है. अष्टमी पंचांग की तिथि है, जबकि 8, 15 या 23 अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखें हैं. दोनों को एक मान लेने से श्राद्ध का दिन गलत चुना जा सकता है.

हर साल श्राद्ध की तारीख बदलती क्यों है?

अंग्रेजी कैलेंडर में तारीख आधी रात को बदलती है. हिंदू तिथि सूर्य और चंद्रमा की आपसी स्थिति से तय होती है और दिन के बीच भी बदल सकती है. इसी कारण एक अंग्रेजी तारीख में दो अलग तिथियों का समय आ सकता है.

इसलिए जिस अंग्रेजी तारीख पर मृत्यु हुई थी, अगले साल उसी तारीख पर वही हिंदू तिथि हो, यह जरूरी नहीं. श्राद्ध की तारीख बदलने का कारण यही अंतर है. 

शुक्ल पक्ष की अष्टमी थी तो क्या 3 अक्टूबर को श्राद्ध होगा?

पितृ पक्ष के अष्टमी श्राद्ध में शुक्ल और कृष्ण, दोनों पक्षों की अष्टमी पर दिवंगत हुए परिजनों का श्राद्ध किया जाता है. इसलिए निधन तो शुक्ल पक्ष में हुआ था कहकर पितृ पक्ष की कृष्ण अष्टमी को गलत मानना उचित नहीं. पंचांग भी अष्टमी श्राद्ध के लिए दोनों पक्षों जिक्र मिलता है. 

हालांकि, वार्षिक श्राद्ध की गणना अलग है. उसके लिए मृत्यु का हिंदू महीना, पक्ष और तिथि देखी जाती है. इसलिए वार्षिक श्राद्ध और पितृ पक्ष का श्राद्ध अलग दिनों पर पड़ सकते हैं.

सिर्फ मृत्यु की तारीख मालूम है तो सही दिन कैसे पहचानें?

मृत्यु की तारीख और वर्ष के साथ स्थान तथा उपलब्ध समय की जानकारी लेकर पुराने पंचांग से तिथि निकलवाएं. समय इसलिए उपयोगी है क्योंकि उस दिन तिथि बदलने की स्थिति में सुबह और शाम की गणना अलग हो सकती है.

यदि मृत्यु की तिथि का पता ही न चल सके, तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है. ऐसी स्थिति में अनुमान से अष्टमी चुनने के बजाय परिवार के पुरोहित से निर्णय लें. 

3 अक्टूबर हर दिवंगत परिजन के श्राद्ध का दिन नहीं है. पहले मृत्यु के समय की तिथि पहचानें. वह अष्टमी थी, तभी इस दिन के श्राद्ध का आपके परिवार से संबंध बनता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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