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Ash Wednesday 2023: ईस्टर से पहले 'राख बुधवार', क्यों ईसाईयों के लिए अगले 46 दिन विशेष, जानें

Ash Wednesday 2023: ईस्टर से पहले चालीसा काल होता है, जिसकी शुरुआत राख बुधवार से होती है. 22 फरवरी से राख बुधवार की शुरुआत होते ही आज से 40 दिनों तक ईसाई पश्चाताप और प्रार्थना के साथ चालीसा करेंगे.

Ash Wednesday 2023, Chalisa Period: आज 22 फरवरी 2023 को ऐश बुधवार यानी राख बुधवार मनाया जा रहा है. ईसाई धर्म के लोगों के लिए राख बुधवार के दिन को लेंट की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसे एशेज का दिन भी कहा जाता है, जोकि ईस्टर रविवार से 40 दिन पहले होता है.

कैथोलिक कलीसिया के लिए ऐश बुधवार यानी राख बुधवार का दिन बेहद खास होता है. मान्यता है कि आज होने वाली प्रार्थनाएं लोगों के जीवन में परिवर्तन, त्याग और आदर्श को बढ़ावा देती है. ईसाई समुदाय के लोग आज चर्च में प्रार्थना करते हैं और इसके बाद श्रद्धालुओं के माथे पर राख लगाई जाती है. आज से लेकर पूरे चालीस दिनों तक लोग प्रार्थना, त्याग, तपस्या, पुण्य काम और अपने जीवन का मूल्यांकन करते हुए यीशु के प्रेम, बलिदान, दुख, मृत्य आदि को याद करते हुए ईस्टर की तैयारी करते हैं.

 राख बुधवार के लिए कैसी तैयार की जाती है राख

राख बुधवार के दिन माथे पर लगाए जाने वाले राख का निर्माण बीते वर्ष खजूर पर्व पर लाई गई खजूर की पत्तियों को सालभर रखा जाता है और अगले साल राख बुधवार के लिए इसे जलाकर इसकी राख बनाई जाती है. इसी राख का प्रयोग राख बुधवार के दिन आशीष प्रदान करने के लिए श्रद्धालुओं के माथे पर लगाया जाता है.

आमतौर पर चर्च के पादरी ही लोगों के माथे पर राख से क्रॉस का चिह्न लगाते हैं. माथे पर राख लगाते हुए पादरी कहते हैं- तू मिट्टी से आया है और मिट्टी में मिल जाएगा. माथे पर राख को लगाने के बाद ईसाई यह प्रण लेते हैं कि वे उपवास, प्रार्थना, पुण्य के काम और दान में अपना जीवन बिताएंगे और यीशु के शिक्षा का पालन करेंगे.

चालीसा काल की शुरुआत है राख बुधवार

पवित्र बाइबिल के अनुसार, ईसा मसीह ने चालीस दिन और चालीस रात मरुस्थल में रहकर प्रार्थना और उपवास किए थे. इसी घटना का अनुकरण करते हुए चालीसा काल मनाया जाता है. इस दौरान लोग प्रार्थना, उपवास और प्रायश्चित करके ईस्टर या पास्का पर्व की तैयारी करते हैं.

लेंट पर्व 2023 की अवधि

आज 22 फरवरी को राख बुधवार से लेंट की भी शुरुआत हो चुकी है. यह ईस्टर पर्व मनाने में सक्षम होने की तैयारी की अवधि है. लेंट को शुद्धि और ज्ञान की अवधि भी कहा जाता है. लेकिन लेंट की समाप्ति कब होगी, इसे लेकर असमंजस है. क्योंकि कुछ चर्च के पादरियों के अनुसार, लेंट की समाप्ति पवित्र गुरुवार 6 अप्रैल 2023 को होगी. तो वहीं कुछ गुड फ्राइडे 7 अप्रैल 2023, पवित्र शनिवार 8 अप्रैल 2023 आदि बता रहे हैं. हालांकि आमतौर पर लेंट 46 दिनों तक की अवधि होती है, जिसमें श्रद्धालु 40 दिनों का उपवास रखते हैं और 6 रविवार को उपवास नहीं रखा जाता है.

लेंट की शुरुआत से 40 दिनों तक जश्न नहीं मनाते ईसाई

आज राख बुधवार के साथ ही लेंट पर्व की शुरुआत भी हो चुकी है. ईसाई समुदाय के लोग अब पूरे 40 दिनों तक कोई जश्न या समारोह नहीं मनाएंगे. इसे लेंट काल, ईस्टर काल,महाउपवास या चालीसा कहा जाता है. इस दौरान पूरे 40 दिनों तक शादी-विवाह, समारोह या पार्टी वगैरह जैसे कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे. बच्चे का नामकरण किया जा सकता है, लेकिन कोई जश्न या पार्टी नहीं होती है. चालीसा या लेंट पर्व के 40 दिनों को पुण्य काम में व्यतीत करने, प्रभु यीशु के दुख भोग काल को याद करने और प्रार्थना करने के लिए किया जाता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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