नियमित तेल मालिश, तीखा और तला-भुना भोजन कम करना, आंवला खाना, और सर्वांगासन, शीर्षासन जैसे योगासन करना फायदेमंद होता है.
अप्रैल-मई में क्यों टूटते हैं ज्यादा बाल? जानिए पित्त, सीजन और साइंस का सीधा कनेक्शन?
अप्रैल-मई में बालों का झड़ना आम है, जिसे आयुर्वेद में पित्त से जोड़ा जाता है, जबकि विज्ञान इसे हेयर साइकिल में बदलाव मानता है. सही डाइट, तेल मालिश और योग के जरिए इसे काफी हद कंट्रोल किया जा सकता है.

क्या आपने भी हाल के दिनों में कंघी, बाथरूम या तकिए पर ज्यादा बाल गिरते हुए नोटिस किए हैं? अगर हां, तो यह केवल आपकी समस्या नहीं है. दरअसल अप्रैल और मई के महीनों में बालों का झड़ना आम बात है.
दिलचस्प बात यह है कि, इस बदलाव को आयुर्वेद ने हजारों साल पहले ही समझ लिया था और आधुनिक विज्ञान भी इस बात पर काफी हद तक सहमत है.
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आयुर्वेद के अनुसार बाल झड़ने की मुख्य वजह
आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता के अनुसार, “यत् खलित्य रोमपातं च करोति तत् पित्तम्”
मतलब, पित्त दोष का बढ़ना ही बाल झड़ने का मुख्य कारण है.
अष्टांग हृदयम के ऋतुचर्या अध्याय के मुताबिक, शिशिर ऋतु (सर्दियों का अंत) में शरीर में कफ जमा होता है. जैसे ही वसंत और गर्मी की शुरुआत होती है, सूर्य की गर्मी से यह कफ पिघलता है और शरीर में पित्त बढ़ने लगता है.
यह बढ़ा हुआ पित्त बालों की झड़ों यानी केश भूमि को कमजोर करता है, जिससे बाल झड़ने लगते हैं.
आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?
केवल आयुर्वेद ही नहीं, बल्कि आधुनिक शोध भी इस seasonal hair fall को मानते हैं. एक peer-reviewed स्टडी (823 महिलाओं पर) में पाया गया कि अप्रैल और मई के दौरान बालों का झड़ने का चरण जिसे telogen phase भी कहा जाता है, बढ़ जाता है.
इसके पीछे एक वजह दिन की बढ़ती रोशनी भी है. लंबे दिन और ज्यादा घूप के कारण शरीर में melatonin हार्मोन का लेवल कम होता है, जिससे हेयर ग्रोथ साइकिल प्रभावित होती है और बाल झड़ने लगते हैं.
यह गौर करने वाली बात यह है कि, विज्ञान इसे hormonal और biological cycle से जोड़कर देखता है, जबकि आयुर्वेद इसे दोष imbalance के रूप में देखता है.
बाल झड़ने से बचने के सरल उपाय
तेल से नियमित मालिश (Oil Massage)
हफ्ते में कम से कम दो बार हल्के हाथों से 10 मिनट तक सिर की मालिश करें. इससे स्कैल्प में खून का प्रवाह बढ़ता है और बालों की जड़ों तक पोषण पहुंचता है.
खानपान पर नियंत्रण
बालों का ज्यादा टूटना खान-पान पर भी निर्भर करता है. तीखा, तला-भुना और ज्यादा नमकीन खाना पित्त को बढ़ाने का काम करता है. इसके बजाय रोज आंवला खाना चाहिए, जिसे आयुर्वेद में पित्त शांत करने वाला माना गया है.
योग और प्राणायाम
कुछ खास योगासन जिनमें सिर नीचे की ओर होता है, खासतौर पर लाभदायक माने जाता है-
- सर्वांगासन
- शीर्षासन
- विपरीत करनी
- पर्वतासन
- उत्तानासन
ये सभी आसन स्कैल्प तक ब्लड फ्लो को बढ़ाते हैं, जिससे बालों की जड़ों को बेहतर पोषण मिलता है.
अप्रैल और मई में बाल झड़ना एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, जिसे नजरअंदाज करने की बजाय समझना बेहद जरूरी है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों अलग-अलग नजरिए से इसे एक्सप्लेन करते हैं, लेकिन दोनों इस बात पर सहमत हैं कि, सही देखभाल और लाइफस्टाइल से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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Frequently Asked Questions
बाल झड़ने से बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
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