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Explained: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान आमने-सामने! क्या सेना वापसी और होर्मुज कंट्रोल समेत 10 बड़े एजेंडा पर बनेगी बात?

Iran 10 Points Proposal: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का हल्ला-बोल है और जल्द ही इस्लामाबाद में बड़ी बैठक होने वाली है. इसमें 10 एजेंडों पर बात होगी. दोनों देश अपने पक्ष रखेंगे. वो क्या होंगे?

8 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच 20 दिन का सीजफायर का ऐलान कर दिया, जिसमें पाकिस्तान और चीन ने बड़ा रोल प्ले किया.पाकिस्तान ने दोनों देशों को 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद बुलाया है. ईरान ने इस सीजफायर के लिए 10 पॉइंट प्लान पेश किया है, जिसे ट्रंप ने 'बातचीत की मजबूत नींव' बताया है. ईरान का कहना है कि ये प्लान सिर्फ अस्थायी रुकावट नहीं, बल्कि स्थायी शांति का रोडमैप है. तो इस्लामाबाद में बातचीत का एजेंडा क्या और है और दोनों देश क्या पक्ष रखेंगे? समझते हैं एक्सप्लेनर में...

ईरान का 10 पॉइंट प्लान ठीक-ठीक क्या है?

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने ये 10 सूत्री योजना अपनी स्टेट मीडिया के जरिए जारी की. ये प्लान युद्ध को पूरी तरह खत्म करने, क्षेत्रीय शांति बहाल करने और ईरान को आर्थिक-सैन्य राहत देने पर जोर देता है:

1. इराक, लेबनान और यमन पर युद्ध को पूरी तरह रोकना: ईरान चाहता है कि अमेरिका-इजरायल के हमले इन तीन देशों में तुरंत बंद हो जाएं. ये ईरान के सहयोगी समूहों (प्रॉक्सी फोर्सेज) की सुरक्षा के लिए जरूरी है. साथ ही मिडिल ईस्ट में जंग बंद हो.

  • ईरान का पक्ष: ये क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बुनियादी शर्त है.
  • अमेरिका का पक्ष: ट्रंप प्रशासन इसे 'क्षेत्रीय संघर्षों का अंत' मानकर चर्चा करने को तैयार है, लेकिन इजरायल लेबनान को इसमें शामिल नहीं करना चाहता.

2. ईरान पर युद्ध को परमानेंट खत्म करना: ईरान मांग करता है कि अमेरिका-इजरायल उसके खिलाफ कोई हमला कभी न करें. ये सिर्फ 2 हफ्ते की नहीं, बल्कि हमेशा के लिए शांति हो.

  • ईरान का पक्ष: युद्ध खत्म होने के बाद कोई नया हमला न हो.
  • अमेरिका का पक्ष: ट्रंप इसे 'स्थायी समाप्ति' की दिशा में देख रहे हैं, लेकिन पूरा युद्ध रोकने के बजाय 'समझौते' पर जोर दे रहे हैं.

3. ईरान-ओमान को टोल मिले: होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर शिप को ईरान और ओमान को समुद्री टोल देना होगा. हर शिप से 20 लाख डॉलर, यानी 19 करोड़ रुपए वसूल सकते हैं.

  • ईरान का पक्ष: ईरान इसे बड़ी जीत मान रहा है और इसे अधिकार मान रहा है.
  • अमेरिका का पक्ष: अमेरिका ने शर्त को बातचीत लायक माना है, लेकिन टोल को मानना मुश्किल है.

4. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना: ईरान ने जंग के दौरान इस रास्ते को बंद कर रखा था, जिससे दुनिया का 20% तेल प्रभावित हुआ. अब वो कह रहा है कि सीजफायर के साथ इसे खोल देगा.

  • ईरान का पक्ष: ये उसकी ताकत का सबूत है.
  • अमेरिका का पक्ष: ट्रंप ने इसे सीजफायर की मुख्य शर्त बनाया है.

5. शर्त के साथ समुद्री आवाजाही: ईरान जहाजों को रास्ता देने को तैयार है, लेकिन इसके लिए एक ईरानी सेना से कोऑर्डिनेशन करना होगा. हर जहाज को डेटा साझा करना होगा.

  • ईरान का पक्ष: होर्मुज की सुरक्षा उसके हाथ में रहे.
  • अमेरिका का पक्ष: अमेरिका और ओमान के साथ मिलकर फीस वसूलने का प्लान है, लेकिन ईरान का पूरा कंट्रोल नहीं मानेगा.

6. ईरान को युद्ध का पूरा मुआवजा देना: ईरान मांग करता है कि अमेरिका-इजरायल उसके नुकसान (तेल फैसिलिटी, अस्पताल, इंफ्रास्ट्रक्चर) का पूरा पैसा दें.

  • ईरान का पक्ष: आर्थिक क्षति की पूरी भरपाई हो.
  • अमेरिका का पक्ष: ये मुश्किल मांग है, लेकिन बातचीत में 'कम्पेनसेशन' पर चर्चा हो सकती है.

7. ईरान पर लगे सैंक्शन्स हटाना: ईरान पर लगे सभी तरह के प्राइमरी और सेकंडरी सैंक्शन्स दोनों खत्म हों.

  • ईरान का पक्ष: अर्थव्यवस्था को सांस लेने का मौका मिले.
  • अमेरिका का पक्ष: ट्रंप प्रशासन पहले भी सैंक्शन्स हटाने पर बात कर चुका है, लेकिन इसे 'पक्का वादा' कहना मुश्किल है.

8. ईरानी फंड और एसेट्स को रिलीज करना: ईरान को अरबों डॉलर के फंसे पैसे वापस मिलें.

  • ईरान का पक्ष: सीजफायर के साथ फौरन राहत मिले.
  • अमेरिका का पक्ष: ये आसान शर्त हो सकती है, क्योंकि पहले भी ऐसी डील हो चुकी हैं.

9. ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा: ईरान वादा करता है कि वो न्यूक्लियर वेपन नहीं बनाएगा. फारसी वर्जन में यूरेनियम एन्क्रिचमेंट की स्वीकृति भी शामिल है.

  • ईरान का पक्ष: अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता दूर करना है.
  • अमेरिका का पक्ष: ट्रंप इसे 'नो न्यूक्लियर वीपन' के रूप में स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन इंस्पेक्शन और वेरिफिकेशन की मांग करेंगे.

10. सारी शर्तों को मंजूर करते ही सीजफायर लागू: ये आखिरी पॉइंट है. सारी शर्तें मान ली जाएं तो तुरंत सीजफायर हो.

  • ईरान का पक्ष: कोई देरी नहीं.
  • अमेरिका का पक्ष: ट्रंप ने इसे 'दो तरफा सीजफायर' कहा, यानी दोनों तरफ से पालन जरूरी.

अमेरिका और ईरान के बीच इन पॉइंट्स पर क्या मतभेद हैं? कौन क्या चाहता है?

ईरान का प्लान ज्यादा से ज्यादा मांगों वाला है. वो चाहता है कि युद्ध हमेशा के लिए खत्म हो, सैंक्शन्स हटें, मुआवजा मिले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका कंट्रोल बरकरार रहे. अमेरिका इसे 'वर्केबल बेसिस' मान रहा है, यानी पूरी तरह स्वीकार नहीं, लेकिन बातचीत की शुरुआत के लिए ठीक है.

ट्रंप ने कहा कि ज्यादातर बड़े मुद्दे सुलझ चुके हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाड़ी देशों से अमेरिकी सेना की वापसी और होर्मुज पर ईरान का पूरा कंट्रेल जैसे पॉइंट्स पर अमेरिका आसानी से नहीं मानेगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर हमलों को रोक दिया जाए तो ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित मार्ग देगा, लेकिन ये ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से होगा. ट्रंप ने साफ कहा कि सीजफायर तभी चलेगा जब ईरान तुरंत और सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दे.

इसमें पाकिस्तान की भूमिका अहम है क्योंकि उसने दोनों को मेज पर बिठाया. चीन ने भी ईरान पर दबाव बनाया. अब इस्लामाबाद में 2 हफ्ते की बातचीत तय है. अगर सफल हुई तो स्थायी शांति हो सकती है, वरना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद हो सकता है और तेल संकट लौट सकता है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें 8 साल से ज्यादा का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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