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Depression in men and women: डिप्रेशन में मर्द चुप हो जाते हैं लेकिन ज्यादा बोलती हैं महिलाएं, क्या यह बीमारी भी देखती है जेंडर डिफरेंस?

depression: डिप्रेशन में जेंडर डिफरेंस यानी लिंग आधारित फर्क बहुत गहरा है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर पुरुषों और महिलाओं के डिप्रेशन में इतना अंतर क्यों देखने को मिलता है.

Gender difference in depression: डिप्रेशन एक ऐसा बीमारी है, जो इंसान को अंदर से तोड़ कर रख देती है. इसलिए इसे साइलेंट डिसीज के नाम से जाना जाता है. लेकिन क्या आपको यह मालूम है कि यह जेंडर के आधार पर भेदभाव करता है. आपको सुनकर भले ही हैरानी हो, लेकिन यह सच्चाई है कि यह पुरुष और महिलाओं में भेदभाव करता है. हाल के रिसर्च बताते हैं कि डिप्रेशन में जेंडर डिफरेंस यानी लिंग आधारित फर्क बहुत गहरा है. जहां महिलाएं अपनी इमोशन्स खुलकर व्यक्त करती हैं, वहीं पुरुष अक्सर भीतर ही भीतर टूटते रहते हैं. यह अंतर केवल व्यवहार तक सीमित नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलता है. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और कैसे होता है.

महिलाओं में डिप्रेशन का खतरा दो गुना ज्यादा

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक मेटा-एनलिसिस के अनुसार, महिलाओं में डिप्रेशन का खतरा पुरुषों की तुलना में करीब दो गुना ज्यादा होता है. इसका कारण हार्मोनल बदलाव, पीरियड्स में बदलाव, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसी अवस्थाओं से जुड़ा है, जो महिलाओं की मेंटल हेल्थ को सीधे प्रभावित करते हैं. इसके अलावा, समाज में महिलाओं पर पारिवारिक और सामाजिक दबाव भी उन्हें इमोश्नल रूप से अधिक संवेदनशील बनाता है.

पुरुष डिप्रेशन में साइलेंट मोड

Johns Hopkins Medicine की रिपोर्ट बताती है कि डिप्रेशन पुरुषों में अक्सर छिपा रहता है. वे इसे स्वीकार नहीं करना चाहते क्योंकि समाज ने मर्दों के लिए मजबूत रहने का दबाव बना रखा है. ऐसे में पुरुष अपने दर्द को शब्दों में नहीं कहते, बल्कि चुप हो जाना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नींद की कमी, शराब या नशे का सहारा लेना जैसे लक्षण दिखाते हैं. वहीं महिलाएं अधिकतर अपने दोस्तों या परिवार के साथ बात करती हैं, रोती हैं या डॉक्टर से सलाह लेती हैं.

ऐसा आखिर क्यों होता है

 ये तो पता चल गया कि ऐसा होता है, लेकिन यह सवाल अभी नहीं सुलझा कि आखिर ऐसा होता क्यों है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है. साइकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, पुरुष और महिला दोनों में डिप्रेशन तो समान हैं, जैसे तनाव या अकेलापन. लेकिन उनकी प्रतिक्रिया अलग होती है. जैसे कि महिलाओं के मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर अधिक संवेदनशील होता है, जिससे वे भावनाओं को ज्यादा गहराई से महसूस करती हैं. जबकि पुरुषों का दिमाग समस्या-सुलझाने पर केंद्रित होता है, इसलिए वे अपनी भावनाओं को दबाकर व्यावहारिक बनने की कोशिश करते हैं. यह दबाव लंबे समय में डिप्रेशन को और बढ़ा देता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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