Iran: ईरान की लड़कियां किस उम्र में बन जाती हैं मां, जानें कितना है यहां का फर्टिलिटी रेट?
Iran Women Childbirth Age: ईरान पर इस समय पूरी दुनिया की नजर है. वहां के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ईरान में महिलाएं पहले बच्चे को कब जन्म देती हैं?

Average Age Of First Birth In Iran: ईरान में पिछले कई दिनों से सरकार के खिलाफ भारी विरोध हो रहा है. इन विरोध प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई बार चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या करते हैं, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि ईरान में लड़कियां किस उम्र में मां बन जाती हैं और यहां फर्टिलिटी रेट क्या है.
ईरान में कब लड़कियां बन जाती हैं मां?
ईरान में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है. पिछले कई सालों से वहां की महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती आ रही हैं. इसका उदाहरण मौजूदा विरोध प्रदर्शनों और इससे पहले हिजाब को लेकर हुए प्रदर्शनों में देखने को मिला था. दुनियाभर में ईरानी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को लेकर चिंता जताई जाती रही है. सरकार और ईरान की धार्मिक पुलिस पर महिलाओं के दमन के आरोप लगते रहे हैं. JEPHA की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की 87 प्रतिशत महिलाएं 25 से 29 साल की उम्र के बीच पहले बच्चे को जन्म देती हैं. वहीं, तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में ईरान के मौजूदा ईरानी कैलेंडर वर्ष के पहले पांच महीनों में पहली बार मां बनने वाली महिलाओं की औसत उम्र 27.4 साल दर्ज की गई थी. इसके बाद साल 2025 के पहले पांच महीनों में पहले बच्चे के जन्म की औसत उम्र बढ़कर 27.7 साल हो गई थी.
अगर फर्टिलिटी रेट की बात करें, तो Macrotrends की रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में ईरान का औसत फर्टिलिटी रेट 2.08 बच्चे प्रति महिला रहा था. वहीं, साल 2023 की तुलना में 2024 में फर्टिलिटी रेट में 22.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
अब जान लीजिए क्यों हो रहे हैं ईरान में प्रदर्शन?
28 दिसंबर को तेहरान में दुकानदार सड़कों पर उतर आए. उन्होंने खुले बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत में आई तेज गिरावट को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया. पिछले एक साल में रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है और महंगाई दर 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसका असर यह हुआ है कि खाना पकाने का तेल और मांस जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, जो पहले से ही सरकारी कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण कमजोर थी.
इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र भी विरोध में शामिल हो गए और आंदोलन धीरे-धीरे दूसरे शहरों तक फैलने लगा. प्रदर्शनकारियों की मांगें केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि राजनीतिक बदलाव की आवाज भी तेज हो गई. कई जगहों पर भीड़ को देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाते सुना गया.
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