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क्या आप भी वर्क फ्रॉम होम करते हैं? तो ये खबर आपके लिए है!

नई दिल्लीः स्मार्टफोंस, लैपटॉप और बाकी टेक्नोलॉजी को वर्क फ्रॉम होम में इस्तेमाल करने के दौरान बेशक आप घंटों के ट्रैफिक से बच जाएं लेकिन इससे आपके काम करने के घंटे बढ़ जाते हैं. इतना ही नहीं, इसके साथ ही स्ट्रेस, स्लीपिंग प्रॉब्लम्स भी बढ़ जाती हैं. ये हम नहीं कह रहे बल्कि यूएन द्वारा भारत सहित 15 देशों में स्टडी के दौरान ये बात सामने आई है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट- यूएन इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) एंड यूरोफंड के को-ऑर्थर जोन मैसेंजर का कहना है कि इस रिपोर्ट में पाया गया है कि मॉडर्न कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी फैसिलिटीज वर्क लाइफ बैलेंस करने के लिए बहुत अच्छी है. लेकिन घर पर काम करने का इनका विपरीत असर होता है. क्या कहती है रिसर्च- ये स्टडी वर्कर्स के इंटरव्यू और 10 यूरोपियन यूनियन मेंबर स्टेट्स के एक्सपर्ट, अर्जेंटिना ब्राजील, इंडिया, जापान और यूएस पर बेस्ड है. रिसर्च में पाया गया कि अलग-अलग तरह के एम्पलाई ऑफिस के बाहर ऑफिशियल वर्क करने के दौरान नई तरह की टेक्नीक्स का इस्तेमाल करते हैं. रिसर्च के नतीजे- रिपोर्ट में पाया गया कि जो लोग घर से काम करते हैं वे ना सिर्फ अधिक घंटों तक काम करते हैं बल्कि वे बेहद स्ट्रेस में भी काम करते हैं. इतना ही नहीं, काम के घंटे तय ना होने के कारण ऐसे लोगों की नींद भी डिस्टर्ब रहने लगती है. हेल्थ पर पड़ता है नेगेटिव असर- इंडिया में इस स्टडी पर जब रिसर्च की गई तो पाया गया कि T/ICTM वर्कर्स घर पर काम करते हैं तो लॉन्ग ऑवर्स तक काम करते हैं जबकि ऑफिस में ऐसा नहीं है. ऐसे में वर्कर्स की हेल्थ पर नेगेटिव इफेक्टव पड़ता है.
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