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दुनिया के इन 5 देशों में सबसे पहले होता है पेट का कैंसर, लिस्ट में कहीं आपका देश तो नहीं?

पेट का कैंसर अक्सर शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नहीं दिखाता, जिससे इसका पता देर से चलता है. एच. पाइलोरी इंफेक्शन, नमकीन या प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, धूम्रपान और शराब इसका खतरा बढ़ाते हैं.

दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का तीसरा प्रमुख कारण है, पेट का कैंसर. 2020 में, दुनिया भर में 1.089 मिलियन से अधिक नए पेट के कैंसर के मामले सामने आए थे और 769,000 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, भारत में भी पेट का कैंसर एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है. 2025 में इसके मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. हर साल देश में लगभग 60,000 से ज़्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं.

पेट का कैंसर अक्सर शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नहीं दिखाता, जिससे इसका पता देर से चलता है. हालांकि, कुछ रिस्क फैक्टर्स जैसे एच. पाइलोरी इंफेक्शन, नमकीन या प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, धूम्रपान और शराब इसके खतरे को बढ़ाते हैं.

आपको बता दें कि पेट के कैंसर की रेट़्स दुनिया भर में काफी अलग-अलग हैं और कुछ देशों में ये बहुत ज्यादा हैं. यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. 2022 के डाटा के अनुसार, पेट के कैंसर की सबसे ज्यादा रेट्स वाले देश और उनके पीछे के मुख्य कारण इस प्रकार हैं.

  • मंगोलिया में पेट के कैंसर की उच्च दर का मुख्य कारण यहां के लोगों का नमकीन और स्मोक्ड खाना ज्यादा खाना है. इसके अलावा, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया का इंफेक्शन भी यहां की आबादी में काफी फैला हुआ है, जो पेट के कैंसर का एक बड़ा कारण है. स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता भी उतनी अच्छी नहीं है, जिससे बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है.
  • जापान में भी पेट के कैंसर की दरें काफी ज्यादा हैं, जिसकी वजह पुराने समय से चले आ रहे नमकीन, अचार वाले और स्मोक्ड फूड्स का बहुत ज्यादा सेवन है. एच. पाइलोरी इंफेक्शन अभी भी एक बड़ा फैक्टर है. जापान की आबादी लगातार बूढ़ी हो रही है और यह कैंसर अक्सर बुजुर्गों में ज्यादा देखा जाता है. हालांकि, जापान में बेहतरीन स्क्रीनिंग प्रोग्राम भी मौजूद हैं, जिससे ज्यादा केस पकड़ में आते हैं.
  • दक्षिण कोरिया में भी पेट के कैंसर के केस काफी ज्यादा हैं. यहां नेशनल कैंसर स्क्रीनिंग प्रोग्राम सक्रिय हैं, जो ज्यादा केसेस को डिटेक्ट करने में मदद करते हैं. ट्रेडिशनल कोरियन फूड्स, जिनमें नमकीन और फर्मेंटेड चीजें होती हैं, इसका एक कारण है. एच. पाइलोरी इंफेक्शन रेट भी यहां काफी हाई है.
  • ईरान में नमकीन और स्मोक्ड फूड्स का ज्यादा सेवन किया जाता है, जबकि फ्रेश वेजिटेबल्स और फ्रूट्स कम खाए जाते हैं, जो कैंसर के खतरे को बढ़ाते है. एच. पाइलोरी  इंफेक्शन यहां भी व्यापक रूप से फैला हुआ है. कुछ इलाकों में पर्यावरण से जुड़े कारण भी हाई रेट्स के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं.
  • तजाकिस्तान में भी पेट के कैंसर होने के काफी केसेज मिलते हैं. यहां के लोग भी नमकीन और प्रोसेस्ड फूड्स का ज्यादा सेवन करते हैं. एच. पाइलोरी इंफेक्शन रेट हाई है. साथ ही, हेल्थकेयर एक्सेस की कमी और जागरूकता न होने से बीमारी का पता देर से चलता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है.

ये हैं पेट के कैंसर के मुख्य कारण

पेट के कैंसर के कई कारक हैं, जो इसका खतरा बढ़ाते हैं. सबसे बड़ा जोखिम हेलिकोबैक्टर पाइलोरी इंफेक्शन है, जो पेट में पुरानी सूजन पैदा करता है. आपका डाइड भी महत्वपूर्ण है; बहुत ज्यादा नमकीन, और स्मोक्ड फूड, साथ ही फ्रेश वेजिटेबल्स और फ्रूट्स की कमी जोखिम को बढ़ाती है. स्मोकिंग और अल्कोहल जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें भी इसमें योगदान करती हैं. वहीं, जेनेटिक्स और फैमिली हिस्ट्री भी मायने रखती है. खराब हाइजीन और पानी की क्वालिटी एच. पाइलोरी  के प्रसार को बढ़ावा दे सकती है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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