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Sleep Apnea: सोते वक्त 32 पर्सेंट लोगों की सांसें रोकती है यह बीमारी, जानें कैसे करा सकते हैं इसकी पहचान?

Obstructive Sleep Apnea: बदलती लाइफस्टाइल के चलते हम ऐसे बीमारियों से पीड़ित होते जा रहे हैं, जिनके बारे में हमको पता भी नहीं होता है. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसे ही स्लीप एपनिया के बारे में.

Breathing Problems During Sleep: स्लीप एपनिया एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें सोते समय बार-बार सांस रुकने लगती है. इसकी वजह से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और दिल समेत कई अंगों पर बुरा असर पड़ता है. यह बीमारी दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है और हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और हार्ट डिजीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा देती है. इसके अलावा, यह दिमाग की काम करने की क्षमता को भी धीमा कर सकती है, कामकाज की क्षमता घटाती है और जीवन की क्वालिटी को प्रभावित करती है.

स्लीप एपनिया क्या है?

स्लीप एपनिया में नींद के दौरान बार-बार सांस रुकने या बहुत धीमी हो जाने की घटनाएं होती हैं. ये रुकावटें एक रात में सैकड़ों बार हो सकती हैं, जिससे फेफड़ों तक हवा का सही फ्लो नहीं हो पाता और शरीर में ऑक्सीजन का लेवल गिर जाता है. ऑक्सीजन की यह कमी हार्ट और अन्य अंगों पर दबाव डालती है और शरीर में सूजन को बढ़ावा देती है. साथ ही, सर्कैडियन रिदम भी टूट जाता है, जिससे याददाश्त, एकाग्रता और मेंटल क्लियरिटी पर निगेटिव असर पड़ता है.

स्लीप एपनिया के लक्षण

इस बीमारी की पहचान समय पर हो जाए तो इलाज आसान हो सकता है. इसके मुख्य लक्षण हैं

  • तेज खर्राटे लेना
  • दिन में जरूरत से ज्यादा नींद आना

इसके अलावा कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे

  • सुबह सिरदर्द
  • याददाश्त कमजोर होना
  • दिनभर थकान या सुस्ती
  • नींद से उठते समय गला सूखा या खराश होना

कई बार स्लीप एपनिया गंभीर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन की गड़बड़ी का कारण भी बन सकता है, इसलिए इन स्थितियों में इसकी जांच कराना जरूरी माना जाता हैच

जांच और इलाज

स्लीप एपनिया की पुष्टि पॉलीसोमनोग्राफी  से की जाती है. यह जांच नींद के दौरान की जाती है, जिसमें शरीर पर लगे सेंसर नींद की गहराई, सांस में रुकावट और ऑक्सीजन लेवल को रिकॉर्ड करते हैं. इसके आधार पर बीमारी की गंभीरता तय की जाती है. आजकल घर पर होने वाली स्लीप स्टडी की सुविधा भी उपलब्ध है, जो कम खर्चीली और ज्यादा सुविधाजनक होती है. आप इसकी जांच 500 के आसपास में करव सकते हैं.  इलाज की बात करें तो सीपीएपी मशीन स्लीप एपनिया के इलाज में क्रांतिकारी साबित हुई हैच यह मशीन सांस की नली को खुला रखने में मदद करती है. इसके अलावा सर्जरी, ओरल डिवाइस और सबसे अहम वजन कम करना भी लंबे समय तक असरदार समाधान माना जाता है.

भोपाल में 32 प्रतिशत लोग इससे पीड़ित

हाल ही में एम्स भोपाल और आईसीएमआर की एक क्मबाइंड स्टडी में यह निकल कर सामने आया कि मध्य प्रदेश में स्लिप की दिक्कत से करीब 32 प्रतिशत लोग जूझ रहे हैं. इसमें1080 मरीजों पर यह रिसर्च हुआ था. जिसमें 15-60 साल उम्र के लोगों को शामिल थे.इसमें निकल कर आया कि 66 प्रतिशत लोग बीपी से पीडित थे. इसमें 50 साल वालों की संख्या सबसे ज्यादा थी. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

हाल ही में X और यूट्यूब पर साझा किए गए एक वीडियो में डॉ. सुधीर कुमार, एमडी (MD) वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, हैदराबाद ने खर्राटों की समस्या से जूझ रहे लोगों को एक आसान लेकिन असरदार सलाह दी है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पीठ के बल सोने से बचना चाहिए. इसकी बजाय करवट लेकर, यानी साइड में सोना बेहतर होता है. इससे न सिर्फ खर्राटे कम हो सकते हैं, बल्कि हल्के से मध्यम स्तर के स्लीप एपनिया के लक्षणों में भी राहत मिल सकती है.

यह भी पढ़ें: ब्रश करते वक्त हो सकता है ये हादसा, दुनियाभर में ऐसे सिर्फ 10 मामले

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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