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क्या हेल्दी समझकर गपागप खाते हैं मखाने? कोई भी नहीं जानता ये 3 तीन साइड इफेक्ट्स

मखाना देखने में भले ही हल्का और हवादार लगे, लेकिन इसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है. इसलिए, जिन लोगों को पहले से ही कब्ज की शिकायत है. उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प नहीं है.

स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के इस दौर में मखाना या फॉक्स नट्स को अक्सर एक सुपरफूड और गिल्टफ्री स्नैक के रूप में प्रचारित किया जाता है. हालांकि, न्यूट्रिशनिस्ट नंदिनी अग्रवाल ने मखाने के तीन ऐसे संभावित दुष्प्रभावों के बारे में चेतावनी दी है, जिन पर आमतौर पर लोग ध्यान नहीं देते. उनका कहना है कि कोई भी स्वास्थ्यवर्धक भोजन भी आपके शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. अगर वह आपके शरीर के अनुकूल न हो.

मखाने के ये हैं संभावित दुष्प्रभाव

कब्ज की समस्या बढ़ा सकता है: मखाना देखने में भले ही हल्का और हवादार लगे, लेकिन इसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है. इसलिए, जिन लोगों को पहले से ही कब्ज की शिकायत है. उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प नहीं है, क्योंकि यह लक्षणों को कम करने की बजाय बढ़ा सकता है. यह पेट में भारीपन और असहजता का कारण बन सकता है.

कैलोरी की मात्रा होती है अधिक

बहुत से लोग वजन कम करने के लिए मखाना खाते हैं, लेकिन अगर इसकी मात्रा पर नियंत्रण न रखा जाए तो यह कैलोरी का एक छिपा हुआ जाल बन सकता है. 100 ग्राम मखाने में अच्छी-खासी कैलोरी होती है. नंदिनी अग्रवाल के अनुसार, अगर आप जरूरत से ज्यादा मखाना खाते हैं, तो यह वजन घटाने की बजाय वजन बढ़ा सकता है. इसलिए, स्वस्थ माने जाने वाले खाद्य पदार्थों को भी सोच-समझकर खाना बहुत जरूरी है.

किडनी के रोगियों के लिए जोखिम भरा

मखाने में पोटेशियम की मात्रा स्वाभाविक रूप से बहुत अधिक होती है. यह उन लोगों के लिए सबसे गंभीर चेतावनी है, जिन्हें किडनी की बीमारी है. किडनी के मरीजों को अपने आहार में पोटेशियम को सीमित रखना होता है. ऐसे में, मखाने का सेवन करने से उनके खून में पोटेशियम की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ सकती है, जिसे हाइपरकेलेमिया कहते हैं. यह स्थिति जानलेवा हार्ट रिद्म की समस्याओं का कारण बन सकती है. इसलिए, किडनी के मरीजों को मखाने का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए.

ऐसे में आपको किसी भी नए सुपरफूड को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले, खासकर अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है तो किसी डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है.

ये भी पढ़ें: गैस की वजह से दर्द या हार्ट अटैक? समझें दोनों में अंतर, जो समझ नहीं पाते लोग

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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